BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
7 views

मानव शरीर में पोषण, कार्बोहाइड्रेट उपापचय और विटामिनों की जैव रासायनिक भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'ग्लाइकोजेनोलिसिस' (Glycogenolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें उपवास या व्यायाम के दौरान रक्त में ग्लूकोज का स्तर कम होने पर, ग्लूकागोन और एड्रेनालिन हॉर्मोन की प्रेरणा से संचित ग्लाइकोजन का ग्लूकोज-1-फास्फेट में विघटन होता है।
  2. 2. विटामिन B1 (थiamin) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थियामिन पाइरोफास्फेट' (TPP) है, जो पाइरुवेट डीहाइड्रोजनेज और अल्फा-कीटोग्लूटा्रेट डीहाइड्रोजनेज एंजाइमों के माध्यम से कार्बोहाइड्रेट के ऑक्सीडेटिव डिकारबॉक्सिलेशन के लिए अनिवार्य है।
  3. 3. 'विटामिन E' (टोकोफेरोल) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोशिका झिल्ली में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड को मुक्त मूलकों (Free radicals) की क्षति से बचाने के लिए एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ग्लाइकोजेनोलिसिस वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा यकृत और पेशियों में संचित ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में तोड़ा जाता है, जो मुख्य रूप से ग्लूकागोन और एड्रेनालिन द्वारा नियंत्रित होती है। कथन 2 सही है क्योंकि विटामिन B1 का सक्रिय रूप थियामिन पाइरोफास्फेट (TPP) क्रेब्स चक्र और ग्लाइकोलिसिस के बीच की कड़ी यानी पाइरुवेट के ऑक्सीडेटिव डिकारबॉक्सिलेशन के लिए एक महत्वपूर्ण सह-एंजाइम है। कथन 3 गलत है क्योंकि विटामिन E वसा-विलेय (Fat-soluble) विटामिन है, जल-विलेय नहीं। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

आँख के किस भाग में वस्तु का प्रतिबिंब बनता है? ओकाज़ाकी खंड किस स्ट्रैंड पर? छोटी आंत? उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा (यांत्रिक ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो उसकी गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग होती है, और यह ऋणात्मक मान इस बात का प्रतीक है कि उपग्रह पृथ्वी से गुरुत्वाकर्षण रूप से बंधा हुआ है। 2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की कक्षीय चाल ध्रुवीय उपग्रहों की तुलना में अधिक होती है, क्योंकि भू-स्थिर उपग्रह को पृथ्वी की भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर स्थापित किया जाता है और इसका परिक्रमण काल ठीक 24 घंटे होता है। 3. भारहीनता (Weightlessness) की स्थिति में अंतरिक्ष यान के भीतर किसी वस्तु का आभासी भार शून्य होता है, क्योंकि अंतरिक्ष यान और उसमें स्थित वस्तु दोनों ही पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र के अधीन समान त्वरण से मुक्त पतन (Free fall) की स्थिति में होते हैं। 4. पलायन वेग ($v_e$) का मान पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर करता है, अर्थात अधिक द्रव्यमान वाले उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर भेजने के लिए कम पलायन वेग की आवश्यकता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) की विभिन्न सैद्धांतिक संकल्पनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लुईस (Lewis) संकल्पना के अनुसार, वे रासायनिक स्पीशीज जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) दान करने की क्षमता रखती हैं, 'लुईस क्षार' कहलाती हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाली स्पीशीज 'लुईस अम्ल' होती हैं। 2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल प्रकृति का होता है। 3. जब किसी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट - $CH_3COONa$) का जलीय अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त विलयन का pH मान 7 से कम होता है क्योंकि इसमें हाइड्रोजन आयनों की साधिकता होती है। 4. आरहेनियस की जल-आधारित संकल्पना निर्जलीय माध्यमों (Non-aqueous media) में अम्लों और क्षारों के व्यवहार की व्याख्या करने में असमर्थ है, क्योंकि यह केवल जलीय विलयनों में $H^+$ और $OH^-$ आयनों की उपस्थिति पर आधारित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.