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General Science
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) की विभिन्न सैद्धांतिक संकल्पनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लुईस (Lewis) संकल्पना के अनुसार, वे रासायनिक स्पीशीज जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) दान करने की क्षमता रखती हैं, 'लुईस क्षार' कहलाती हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाली स्पीशीज 'लुईस अम्ल' होती हैं।
  2. 2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल प्रकृति का होता है।
  3. 3. जब किसी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट - $CH_3COONa$) का जलीय अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त विलयन का pH मान 7 से कम होता है क्योंकि इसमें हाइड्रोजन आयनों की साधिकता होती है।
  4. 4. आरहेनियस की जल-आधारित संकल्पना निर्जलीय माध्यमों (Non-aqueous media) में अम्लों और क्षारों के व्यवहार की व्याख्या करने में असमर्थ है, क्योंकि यह केवल जलीय विलयनों में $H^+$ और $OH^-$ आयनों की उपस्थिति पर आधारित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लुईस सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉन युग्म दाता लुईस क्षार और ग्राही लुईस अम्ल होते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि ब्रॉन्स्टेड-लोरी युग्मों में एक प्रोटॉन का अंतर होता है और प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार दुर्बल होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे $CH_3COONa$) के जल अपघटन से प्राप्त विलयन क्षारीय होता है और इसका pH मान 7 से अधिक होता है। कथन 4 सही है क्योंकि आरहेनियस सिद्धांत केवल जलीय माध्यम तक सीमित है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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