त्वरित लिंक्स
General Science
9 views
रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) की विभिन्न सैद्धांतिक संकल्पनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लुईस (Lewis) संकल्पना के अनुसार, वे रासायनिक स्पीशीज जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) दान करने की क्षमता रखती हैं, 'लुईस क्षार' कहलाती हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाली स्पीशीज 'लुईस अम्ल' होती हैं।
- 2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल प्रकृति का होता है।
- 3. जब किसी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट - $CH_3COONa$) का जलीय अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त विलयन का pH मान 7 से कम होता है क्योंकि इसमें हाइड्रोजन आयनों की साधिकता होती है।
- 4. आरहेनियस की जल-आधारित संकल्पना निर्जलीय माध्यमों (Non-aqueous media) में अम्लों और क्षारों के व्यवहार की व्याख्या करने में असमर्थ है, क्योंकि यह केवल जलीय विलयनों में $H^+$ और $OH^-$ आयनों की उपस्थिति पर आधारित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि लुईस सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉन युग्म दाता लुईस क्षार और ग्राही लुईस अम्ल होते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि ब्रॉन्स्टेड-लोरी युग्मों में एक प्रोटॉन का अंतर होता है और प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार दुर्बल होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे $CH_3COONa$) के जल अपघटन से प्राप्त विलयन क्षारीय होता है और इसका pH मान 7 से अधिक होता है। कथन 4 सही है क्योंकि आरहेनियस सिद्धांत केवल जलीय माध्यम तक सीमित है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जटिल जैव-रासायनिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह के प्रतिजन (Antigens) सीधे प्रोटीन के रूप में संश्लेषित नहीं होते हैं, बल्कि यह ओलिगोसैक्राइड श्रृंखलाएँ होती हैं जिनका निर्माण ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों द्वारा एक पूर्ववर्ती 'H-एंटीजन' पर शर्करा इकाइयों के जुड़ने से होता है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फिनोटाइप) वाले व्यक्तियों में FUT1 जीन के उत्परिवर्तन के कारण H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी के साथ-साथ एक विशिष्ट 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जो उन्हें किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (जैसे O, A, B, AB) से रक्त प्राप्त करने से रोकती है।
3. Rh-असंगतता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति में, प्रथम गर्भधारण के दौरान माँ के शरीर में बनने वाली प्रारंभिक एंटी-Rh एंटीबॉडी मुख्य रूप से उच्च आणविक भार वाली $IgM$ प्रकार की होती हैं, जो प्लेसेंटा को आसानी से पार कर लेती हैं और प्रथम Rh-धनात्मक शिशु को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
4. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक प्रणाली (Intrinsic pathway) की शुरुआत तब होती है जब रक्त वाहिका के उपकला आवरण की क्षति के बाद संपर्क कारकों (Contact factors) जैसे कि फैक्टर XII और प्रीकैलिक्रिन की सक्रियता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोनल नियंत्रण प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीयूष ग्रंथि का पश्च भाग (न्यूरोहाइपोफाइसिस) 'ऑक्सीटोसिन' और 'वैसोप्रेसिन' (ADH) हार्मोनों का संश्लेषण स्वयं करता है, जिनका स्रावण हाइपोटैलेमस के न्यूरोसेक्रेटरी तंत्र के नियंत्रण में होता है।
2. अधिवृक्क वल्पुट (Adrenal Cortex) द्वारा स्रावित 'एल्डोस्टेरॉन' (Aldosterone) एक मिनरलोकोर्टिकोइड है जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम और जल के पुनरावशोषण को प्रेरित करता है तथा पोटैशियम और फॉस्फेट आयनों के उत्सर्जन को बढ़ावा देता है।
3. अग्न्याशय की लैंगरहैंस द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाएँ 'इंसुलिन' का स्रावण करती हैं, जो एक पेप्टाइड हॉर्मोन है और यकृत व वसा ऊतकों में ग्लाइकोजेनेसिस की प्रक्रिया को प्रेरित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करता है।
4. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'थायरोकैल्सीटोनिन' (TCT) हार्मोन रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को बढ़ाता है, जिससे अस्थियों से कैल्शियम का विखनिजीकरण तेज हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
इग्लू?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि वे मृदा में जीवित रह सकते हैं, किंतु निषेचन के लिए उन्हें जल की अनिवार्यता होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो स्वतंत्र होता है।
2. C4 पौधों में प्रकाश संश्लेषण की दर C3 पौधों की तुलना में अधिक होती है क्योंकि इनमें प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, और कार्बन डाइऑक्साइड का प्राथमिक स्थिरीकरण मेसोफिल कोशिकाओं में PEP कार्बोक्सिलेज एंजाइम द्वारा होता है।
3. 'जिबरेलिन' (Gibberellin) एक ऐसा पादप हार्मोन है जो आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में पर्वो (Internodes) की लंबाई को बढ़ाकर तने के दीर्घीकरण को प्रेरित करता है, तथा बीजों की प्रसुप्तति को समाप्त कर एमाइलेज एंजाइम के संश्लेषण को उद्दीप्त करता है।
4. प्रकाश संश्लेषण के 'प्रकाशिक अभिक्रिया' (Light reaction) के दौरान थाइलाकोइड झिल्ली में जल के प्रकाשיय अपघटन (Photolysis) से ऑक्सीजन, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं, और इस प्रक्रिया के लिए मैंगनीज और क्लोरीन आयनों की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
रक्त समूह की खोज?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.