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General Science
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छोटी आंत?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अवशोषण।
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन को जोड़ने पर हमेशा ऊर्जा का निष्कासन होता है।
2. आवर्त सारणी में वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के कारण आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) के मान में सामान्यतः कमी आती है, किंतु संक्रमण तत्वों की तीसरी श्रेणी (5d) के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक ऊपर की दूसरी श्रेणी (4d) के तत्वों की तुलना में अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण लैंथेनाइड संकुचन के कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश में अत्यधिक वृद्धि है।
3. फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) पॉलिंग पैमाने पर संपूर्ण आवर्त सारणी में सर्वाधिक (4.0) होती है, लेकिन इसकी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि फ्लोरिन का आकार बहुत छोटा होता है।
4. किसी तत्व की धात्विक प्रकृति आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर घटती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति कम हो जाती है, जबकि वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक प्रकृति बढ़ती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं के निष्कर्षण (Metallurgical Processes) और उनके अयस्क के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रिया में सांद्रित अयस्क को वायु की नियमित या नियंत्रित आपूर्ति के साथ उसके गलनांक से कम ताप पर तीव्रता से गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग आमतौर पर सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड अयस्कों में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
2. 'निस्तापन' (Calcination) प्रक्रिया के दौरान कार्बोनेट और हाइड्रेटेड ऑक्साइड अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में गर्म किया जाता है, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और अयस्क सरलता से छिद्रयुक्त ऑक्साइड में बदल जाता है।
3. 'प्रगालन' (Smelting) एक ऐसी उच्च-तापीय प्रक्रिया है जिसमें भर्जित या निस्पापित अयस्क को किसी उपयुक्त गलनक (Flux) और कोक (कार्बन) के साथ उसके गलनांक से ऊपर गर्म किया जाता है, जिससे धातु का अपचयन होकर वह द्रवित अवस्था में प्राप्त होती है और साथ ही अशुद्धियाँ 'धातुमल' (Slag) के रूप में अलग हो जाती हैं।
4. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हैरॉल्ट प्रक्रम में क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) का मुख्य उपयोग ऐलुमिनियम ऑक्साइड के गलनांक को कम करने के लिए किया जाता है, क्योंकि शुद्ध एलुमिना का गलनांक बहुत उच्च होता है और यह विद्युत का बहुत अच्छा चालक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु संरचना और पदार्थ की अवस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं विशिष्ट वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग (Angular momentum) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज (Integral multiple) होता है।
2. 'बोस-आइंस्टीन संघनन' (Bose-Einstein Condensate) पदार्थ की एक ऐसी अवस्था है जिसे अत्यंत कम घनत्व वाली गैस को परम शून्य (Absolute zero) के अत्यंत निकट के तापमान तक ठंडा करके प्राप्त किया जाता है।
3. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (Uncertainty principle) के अनुसार, किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना संभव है, यदि माप के उपकरण अत्यधिक उच्च विभेदन (High resolution) वाले हों।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव हृदय की आंतरिक संरचना, कार्डियक चक्र और रक्त परिसंचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय का दाहिना आलिंद-निलय वाल्व (त्रिवलनी कपाट या Tricuspid valve) तीन मस्कुलर फ्लैप से बना होता है, जो आलिंद से निलय में रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करता है और निलय संकुचन के समय रक्त को वापस आलिंद में जाने से रोकता है।
2. 'पेसमेकर' के रूप में प्रसिद्ध साइनोआट्रियल नोड (SAN) दाहिने आलिंद के दाहिने ऊपरी कोने पर स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजित होने की क्षमता रखता है और हृदय की संकुचन दर की लयबद्धता को निर्धारित करता है।
3. जब दोनों निलय शिथिलन (Diastole) की स्थिति में होते हैं, तो महाधमनी और फुफ्फुसीय धमनी के आधार पर स्थित अर्धचंद्राकार वाल्व (Semilunar valves) खुल जाते हैं, जिससे रक्त तेजी से निलयों से धमनियों में प्रवाहित होता है।
4. हृदय चक्र के दौरान, 'दूसरा हृदय ध्वनि' (Dubb) तब उत्पन्न होता है जब निलय के अंत में अर्धचंद्राकार कपाट (Semilunar valves) बंद होते हैं, जो त्रिवलनी और द्विवलनी कपाटों के बंद होने की तुलना में अधिक समय तक सुनाई देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तरलों के यांत्रिकी गुणों और उनके व्यवहार—विशेषकर पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface tension) अणुओं के बीच प्रभावी संसंजक बलों (Cohesive forces) के कारण उत्पन्न होता है, और जब किसी द्रव में कोई अल्प विलेय अशुद्धि जैसे सर्फेक्टेंट मिलाई जाती है, तो यह पृष्ठ को आंशिक रूप से ढंककर द्रव के पृष्ठ तनाव को काफी हद तक कम कर देती है।
2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) द्रवों में आंतरिक घर्षण का माप है, और जहाँ गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घटती है, वहीं द्रवों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है क्योंकि उच्च तापमान पर द्रवों के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ने से संसंजक बल मजबूत हो जाते हैं।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, और यह उत्प्लावन बल विस्थापित तरल के गुरुत्व केंद्र (Centre of gravity) पर कार्य करता है, न कि डूबे हुए भाग के द्रव्यमान केंद्र पर।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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