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ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और ऊष्मागतिकीय चरों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
- 2. किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा ($U$) एक अवस्था फलन (State function) है, जिसका अर्थ है कि इसका परिवर्तन पथ पर निर्भर नहीं करता है, जबकि ऊष्मा ($Q$) और कार्य ($W$) पथ फलन (Path functions) हैं जो निकाय द्वारा अपनाए गए प्रक्रम पर निर्भर करते हैं।
- 3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है ($Q = 0$), जिसके कारण यदि किसी गैस का रुद्धोष्म रूप से संपीड़न किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घट जाती है और परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट आती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम तापमान की संकल्पना को स्पष्ट करता है और तापीय साम्यावस्था की शर्त बताता है। कथन 2 सही है क्योंकि आंतरिक ऊर्जा एक अवस्था फलन है जो प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर करती है, जबकि ऊष्मा और कार्य पथ फलन होते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि रुद्धोष्म संपीड़न (Adiabatic compression) के दौरान जब गैस पर कार्य किया जाता है ($W < 0$), तो ऊर्जा संरक्षित रहने के कारण उसकी आंतरिक ऊर्जा बढ़ती है और तापमान में वृद्धि होती है, न कि गिरावट। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक एवं भौतिक गुणों की आवर्तिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन को विलग करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' कहलाती है, और आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु आकार घटने के कारण आयनन एन्थैल्पी सामान्यतः बढ़ती है, तथापि ऑक्सीजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी नाइट्रोजन से कम होती है क्योंकि नाइट्रोजन के $2p$ कक्षकों में अर्ध-पूरित (half-filled) विन्यास का अतिरिक्त स्थायित्व पाया जाता है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान फ्लोरिन (-328 kJ/mol) की तुलना में क्लोरीन (-349 kJ/mol) के लिए अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरिन परमाणु का अत्यंत छोटा आकार होना है, जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉन पर तीव्र अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण उत्पन्न होता है।
3. लैंथेनाइड आकुंचन (Lanthanoid contraction) के प्रभावस्वरूप, संक्रमण तत्वों की दूसरी और तीसरी श्रेणियों (जैसे ज़िरकोनियम और हाफ़िज़ियम) के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसके कारण उनके रासायनिक गुण अत्यधिक भिन्न हो जाते हैं और उन्हें पृथक् करना बहुत आसान हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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ऊष्मागतिकी और तापमापी के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह स्थापित करता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
2. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी (Platinum Resistance Thermometer) विद्युत प्रतिरोध के तापमान के साथ रैखिक परिवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करती है और इसका उपयोग बहुत कम तापमान (-200°C) से लेकर उच्च तापमान (1200°C) तक के परास को मापने के लिए किया जाता है।
3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य ($Q = 0$) होता है, और यदि किसी आदर्श गैस का रुद्धोष्म रूप से संपीड़न किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घटती है जिसके परिणामस्वरूप उसके तापमान में गिरावट आती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाश के अपवर्तन-परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई प्रकाश किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, और इस घटना के दौरान परावर्तन के सामान्य नियम ($i = r$) पूरी तरह से लागू होते हैं।
2. एक पतले उत्तल लेंस को जब ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी प्रकृति अपरिवर्तित रहती है किंतु उसकी फोकस दूरी अनंत हो जाती है जिससे वह समतल कांच की भांति व्यवहार करता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए दर्पण सूत्र ($\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$) केवल परपेक्सी (Paraxial) किरणों के लिए ही वैध होता है, अर्थात उन किरणों के लिए जो मुख्य अक्ष के अत्यंत निकट होती हैं और जिनका आपतन कोण बहुत छोटा होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाश के अपवर्तन-परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total internal reflection) होता है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश सघन माध्यम में ही वापस लौटे और इस घटना के दौरान परावर्तन का नियम ($i = r$) पूरी तरह से लागू होता है।
2. एक पतले उत्तल लेंस की फोकस दूरी ($f$) लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक और उसके दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं पर निर्भर करती है, और जब ऐसे लेंस को उस द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की प्रकृति अभिसारी (Converging) से बदलकर अपसारी (Diverging) हो जाती है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए दर्पण सूत्र ($rac{1}{f} = rac{1}{v} + rac{1}{u}$) सभी प्रकार की स्थितियों में लागू होता है, चाहे आपतन कोण कितना भी बड़ा हो और किरणें मुख्य अक्ष के कितनी भी दूर (Non-paraxial rays) क्यों न हों, क्योंकि यह परावर्तन के नियमों का एक सार्वभौमिक और सन्निकट-मुक्त गणितीय परिणाम है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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