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ऊष्मागतिकी और तापमापी के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह स्थापित करता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
  2. 2. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी (Platinum Resistance Thermometer) विद्युत प्रतिरोध के तापमान के साथ रैखिक परिवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करती है और इसका उपयोग बहुत कम तापमान (-200°C) से लेकर उच्च तापमान (1200°C) तक के परास को मापने के लिए किया जाता है।
  3. 3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य ($Q = 0$) होता है, और यदि किसी आदर्श गैस का रुद्धोष्म रूप से संपीड़न किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घटती है जिसके परिणामस्वरूप उसके तापमान में गिरावट आती है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम तापमान के अस्तित्व और उसकी माप के आधार को स्पष्ट करता है, जिसके अनुसार तापीय साम्य संक्रमणशील होता है। कथन 2 सही है क्योंकि प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी उच्च परिशुद्धता के साथ विस्तृत तापीय परास (-200°सेल्सियस से 1200°सेल्सियस) को मापने में सक्षम होती है, जो धातुओं के विद्युत प्रतिरोध के ताप-गुणांक पर आधारित है। कथन 3 असत्य है क्योंकि रुद्धोष्म संपीड़न (Adiabatic compression) के दौरान निकाय पर बाह्य कार्य किया जाता है जिससे उसकी आंतरिक ऊर्जा बढ़ती है और परिणामस्वरूप तापमान में वृद्धि होती है, न कि गिरावट (गिरावट रुद्धोष्म प्रसार के समय होती है)। विकिपीडिया संदर्भ
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'एब्सिसिक एसिड' (Abscisic Acid - ABA) एक तनाव हार्मोन है जो पौधों में जल की कमी के समय रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है, तथा यह जिबरेलिन (Gibberellin) के विपरीत कार्य करते हुए बीज प्रसुप्तन (Seed dormancy) को बढ़ावा देता है और पत्तियों के विलगन (Abscission) को रोकता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक का विद्युत प्रतिरोध (Electrical resistance) उसके तापमान पर निर्भर करता है, और धात्विक चालकों के लिए तापमान में वृद्धि करने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है क्योंकि मुक्त इलेक्ट्रॉनों का विश्रांति काल (Relaxation time) घट जाता है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) में तापमान बढ़ाने पर प्रतिरोध घटता है। 2. किर्चऑफ़ का प्रथम नियम (Kirchhoff's Current Law) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है, जबकि किर्चऑफ़ का द्वितीय नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन करता है। 3. जब समान आंतरिक प्रतिरोध वाले कई प्राथमिक सेलों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ से प्राप्त अधिकतम धारा प्राप्त करने की शर्त यह होती है कि बाह्य प्रतिरोध का मान सेलों के कुल आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में नगण्य होना चाहिए। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र के नियामक एवं क्रियात्मक तंत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. छोटी आंत की श्लेष्मला (Mucosa) द्वारा स्रावित 'एंटेरोकाइनेज' (Enterokinase) एंजाइम अग्नाशयी रस के निष्क्रिय 'ट्रिप्सिनोजेन' को सक्रिय 'ट्रिप्सिन' में परिवर्तित करता है, जो आगे चलकर अन्य प्रोटीएज एंजाइमों को सक्रिय करता है। 2. विश्राम की अवस्था में सामान्य वयस्क मनुष्य द्वारा प्रति मिनट अंतःश्वसित या उच्च्वसित वायु की कुल मात्रा 'ज्वारीय आयतन' (Tidal Volume) कहलाती है, जिसका मान लगभग 6000 से 8000 मिलीलीटर प्रति मिनट होता है। 3. मानव हृदय के संकुचन के दौरान उत्पन्न होने वाले विद्युत विभवांतर को दर्शाने वाले 'इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम' (ECG) में QRS कॉम्प्लेक्स निलय के ध्रुवण (Ventricular depolarization) को निरूपित करता है, जो निलय के संकुचन की शुरुआत का प्रतीक है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और ऊष्मागतिकीय चरों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवां नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्यावस्था में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे। 2. किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा ($U$) एक अवस्था फलन (State function) है, जिसका अर्थ है कि इसका परिवर्तन पथ पर निर्भर नहीं करता है, जबकि ऊष्मा ($Q$) और कार्य ($W$) पथ फलन (Path functions) हैं जो निकाय द्वारा अपनाए गए प्रक्रम पर निर्भर करते हैं। 3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान शून्य होता है ($Q = 0$), जिसके कारण यदि किसी गैस का रुद्धोष्म रूप से संपीड़न किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा घट जाती है और परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट आती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है। 2. 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