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नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) और तारकीय ऊर्जा (Stellar Energy) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला अभिक्रिया है, जिसमें अत्यधिक उच्च तापमान और दाब पर चार हाइड्रोजन नाभिक संलित होकर एक ही हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं और इस प्रक्रिया में द्रव्यमान क्षति (Mass defect) के समतुल्य ऊर्जा मुक्त होती है।
  2. 2. नाभिकीय संलयन अभिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए प्रयोगशालाओं में 'चुंबकीय परिबद्धता' (Magnetic Confinement) तकनीक जैसे टोकामक (Tokamak) का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्लाज्मा को नियंत्रित करने के लिए अत्यंत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग किया जाता है।
  3. 3. नाभिकीय संलयन के लिए आवश्यक है कि संलयित होने वाले हल्के नाभिकों के बीच का कूलामी प्रतिकर्षण (Coulombic repulsion) преодо्लित हो, जिसके लिए लगभग $10^8$ केल्विन जैसी अत्यधिक उच्च कोटि के तापमान की आवश्यकता होती है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। सूर्य और तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है, जहाँ प्रोटॉन-प्रोटॉन चक्र के माध्यम से हाइड्रोजन के चार नाभिक मिलकर हीलियम का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया में अल्बर्ट आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण ($E = mc^2$) के अनुसार द्रव्यमान का कुछ अंश ऊर्जा में रूपांतरित हो जाता है। संलयन के लिए लगभग $10^7$ से $10^8$ केल्विन का अत्यंत उच्च तापमान आवश्यक होता है ताकि हल्के नाभिकों के मध्य तीव्र कूलामी प्रतिकर्षण बल को पार किया जा सके। अत्यधिक उच्च तापमान पर पदार्थ प्लाज्मा अवस्था में बदल जाता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए टोकामक जैसी चुंबकीय परिबद्धता प्रणालियों का उपयोग किया जाता है।
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