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General Science
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अप्रगामी तरंगों (Stationary Waves) और ध्वनि की चाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एक खुले आर्गन पाइप (Open organ pipe) में सभी संनादी (Harmonics) अर्थात मूल आवृत्ति के पूर्ण गुणज आवृत्तियाँ उत्पन्न होती हैं, जबकि बंद आर्गन पाइप (Closed organ pipe) में केवल विषम संनादी (Odd harmonics) ही उत्पन्न होते हैं।
- 2. किसी गैस में ध्वनि की चाल उस गैस के घनत्व के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक होती है, जिसका अर्थ है कि भारी गैसों में ध्वनि की चाल हल्की गैसों की तुलना में हमेशा अधिक होती है।
- 3. जब कोई ध्वनि तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्ध्य (Wavelength) दोनों अपरिवर्तित रहते हैं, जबकि उसका वेग बदल जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: एक खुले आर्गन पाइप में दोनों सिरों पर प्रस्पंद (Antinodes) बनते हैं, जिससे मूल आवृत्ति ($f$), $2f$, $3f$ आदि सभी संनादी प्राप्त होते हैं। इसके विपरीत, बंद आर्गन पाइप में एक सिरा बंद होने के कारण वहाँ निष्पंद (Nodes) बनता है, जिसके परिणामस्वरूप केवल विषम संनादी ($f$, $3f$, $5f$) ही उत्पन्न होते हैं। कथन 2 गलत है: लाप्लास के संशोधन के अनुसार गैस में ध्वनि की चाल $v = \sqrt{\frac{\gamma P}{\rho}}$ होती है, जिससे स्पष्ट है कि ध्वनि की चाल घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है ($v \propto \frac{1}{\sqrt{\rho}}$)। अतः हल्की गैसों (जैसे हाइड्रोजन) में ध्वनि की चाल भारी गैसों (जैसे ऑक्सीजन) की तुलना में अधिक होती है। कथन 3 गलत है: जब कोई तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है, तो उसकी आवृत्ति स्रोत पर निर्भर होने के कारण अपरिवर्तित रहती है, लेकिन वेग और तरंगदैर्ध्य दोनों बदल जाते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव रोगों और उनके सूक्ष्मजीवतीय कारकों (Pathogens) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ट्यूबरकुलोसिस' (तपेदिक) एक जीवाणु जनित रोग है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) के कारण होता है, और इसके उपचार के लिए डॉट्स (DOTS) प्रणाली के अंतर्गत रिफैम्पिसिन और आइसोनियाज़िड जैसी औषधियां दी जाती हैं।
2. 'रेबीज' (Hydrophobia) एक विषाणु जनित तंत्रिका संबंधी घातक रोग है जो लाइساवायरस (Lyssavirus) के संक्रमण से होता है, और यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
3. 'एड्स' (AIDS) उत्पन्न करने वाला ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) एक रेट्रोवायरस है जो शरीर की CD4+ T-लिम्फोसाइट्स कोशिकाओं को नष्ट कर प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर करता है, और इसके संचरण का मुख्य माध्यम केवल दूषित जल और भोजन का सेवन है।
4. 'मलेरिया' प्लासमोडियम प्रजाति के परजीवी प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संचरण मादा एनाफिलिस मच्छर द्वारा होता है, तथा इस परजीवी का जीवन चक्र मानव और मच्छर दोनों में पूर्ण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव पोषण और जैव-अणुओं (विटामिन, कार्बोहाइड्रेट एवं प्रोटीन) की रासायनिक संरचना और उनके कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जल-विलेय विटामिनों में विटामिन B-कॉम्प्लेक्स और विटामिन C आते हैं, जिन्हें शरीर में संग्रहित नहीं किया जा सकता है (सिવાય विटामिन $B_{12}$ के, जो यकृत में संचित होता है), इसलिए इन्हें आहार के माध्यम से निरंतर ग्रहण करना आवश्यक होता है।
2. ग्लाइकोजन एक शाखित बहुलक (Branched polymer) है जो डी-ग्लूकोज इकाइयों से मिलकर बनता है, और इसकी संरचना एमाइलोपेक्टिन के समान होती है किंतु इसमें शाखाओं का घनत्व एमाइलोपेक्टिन की तुलना में बहुत अधिक होता है।
3. प्रोटीनों की द्वितीयक संरचना (Secondary structure) में पाई जाने वाली 'α-हेलिक्स' संरचना का स्थायित्व पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के विभिन्न एमीनो अम्लों के बीच बनने वाले अंतरा-आणविक हाइड्रोजन आबंधों (Intermolecular hydrogen bonds) के कारण होता है।
4. विटामिन A (रेटिनॉल) एक वसा-विलेय विटामिन है, जिसकी कमी से रोडोप्सिन (Visual purple) का संश्लेषण बाधित होता है, जिससे दृष्टिबाधता और 'जीरोफथैल्मिया' (Xerophthalmia) जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ सेबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. भंवर धाराएँ (Eddy currents) किसी चालक के भीतर तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction furnace) में धातुओं को पिघलाने तथा चुंबकीय ब्रेक (Magnetic braking) प्रणालियों में किया जाता है।
4. किसी धारावाही परिनालिका (Solenoid) के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता उसके सिरों पर अधिकतम होती है और केंद्र की ओर जाने पर घटती जाती है, तथा यह क्षेत्र परिनालिका की त्रिज्या पर निर्भर करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, समस्थानिक प्रभाव और अम्ल-क्षार साम्यावस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी अम्ल की प्रबलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका संयुग्मी क्षार कितना स्थायी है; अतः यदि किसी अम्ल के वियोजन में जुड़े बंध के निर्माण में शामिल परमाणुओं के आकार में वृद्धि होती है या विद्युत ऋणात्मकता अधिक होती है, तो बंध की लंबाई और उसकी वियोजन ऊर्जा में परिवर्तन के कारण अम्ल की सामर्थ्य बढ़ जाती है।
2. भारी हाइड्रोजन (ड्यूटीरियम, D) युक्त अम्लों (जैसे DCl) का आबंध वियोजन समस्थानिक प्रभाव (Isotope Effect) के कारण सामान्य हाइड्रोजन अम्ल (HCl) की तुलना में अधिक होता है, जिसके परिणामस्वरूप ड्यूटीरियम युक्त अम्ल जलीय विलयन में अधिक तीव्रता से और पूर्ण रूप से वियोजित होते हैं।
3. 'कठिन-मृदु अम्ल-क्षार' (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, एक कठोर अम्ल (Hard Acid) छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश घनत्व और कम ध्रुवणीयता वाले धनायनों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जो प्राथमिकता से कठोर क्षारों (Hard Bases) के साथ मजबूत और स्थिर आयनिक या उपसहसंयोजक बंध बनाते हैं।
4. बहुप्रोटिक अम्लों (जैसे ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल, $H_3PO_4$) के क्रमिक वियोजन स्थिरांकों ($K_{a1}, K_{a2}, K_{a3}$) का मान उत्तरोत्तर घटता जाता है, जिसका मुख्य कारण यह है कि ऋणावेशित आयन से धनात्मक प्रोटॉन को अलग करना अधिक कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process) में शुद्ध एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट विलायक का कार्य करते हुए मिश्रण के गलनांक को कम करता है और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाता है।
2. कॉपर मैटे (Copper matte), जो प्रगलन (Smelting) प्रक्रिया के दौरान परावर्ती भट्टी (Refractory furnace) में प्राप्त होता है, मुख्य रूप से क्यूप्रस सल्फाइड ($Cu_2S$) और फेरस सल्फाइड ($FeS$) का मिश्रण होता है, और इससे तांबे के निष्कर्षण (बेसेमरलीकरण) के दौरान फेरस सल्फाइड को हटाने के लिए सिलिका ($SiO_2$) का उपयोग गालक (Flux) के रूप में किया जाता है।
3. सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) एक अत्यधिक अभिक्रियाशील, प्रतिक्रियाशील और दीप्तशील (Phosphorescent) अणु है जो कमरे के तापमान पर वायु में स्वतः जल उठता है, जबकि लाल फॉस्फोरस पॉलीमरिक संरचना होने के कारण कम अभिक्रियाशील होता है और विषैला नहीं होता है।
4. संक्रमण धातुओं के यौगिकों में 'लैंथेनाइड संकुचन' के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणियों के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ्नियम) की परमाणु त्रिज्याएँ और रासायनिक गुण लगभग समान हो जाते हैं, जिससे उन्हें अयस्कों से पृथक्करण करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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