यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत बल, गति, और ऊर्जा के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब कोई वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर एकसमान चाल से गति करती है, तो उस पर कार्य करने वाला अभिकेंद्र बल (Centripetal Force) वस्तु द्वारा तय किए गए वृत्त के केंद्र की ओर निर्देशित होता है, किंतु यह बल वस्तु द्वारा किया गया कार्य शून्य (Zero Work) होता है क्योंकि विस्थापन की दिशा हमेशा अभिकेंद्र बल के लंबवत होती है।
- 2. प्रत्यास्थ टक्कर (Elastic Collision) के मामले में न केवल रैखिक संवेग (Linear Momentum) संरक्षित रहता है, बल्कि कुल गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) भी पूर्ण रूप से संरक्षित रहती है, और इसमें प्रयुक्त प्रत्यास्थता गुणांक (Coefficient of Restitution, e) का मान ठीक शून्य होता है।
- 3. किसी वस्तु का जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) केवल उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है, तथा घूर्णन अक्ष (Axis of Rotation) की स्थिति बदलने पर भी वस्तु के जड़त्व आघूर्ण के मान में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
- 4. सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion) करने वाले किसी कण की कुल ऊर्जा उसके विस्थापन के साथ लगातार बदलती रहती है, तथा जब कण अपने माध्य स्थिति (Mean Position) पर होता है, तब उसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम और गतिज ऊर्जा न्यूनतम होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि जब कोई वस्तु एकसमान वृत्ताकार गति करती है, तो अभिकेंद्र बल त्रिज्या के अनुदिश केंद्र की ओर लगता है और विस्थापन हमेशा स्पर्शरेखा (Tangent) के अनुदिश होता है, जिससे बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° बनता है; चूँकि $W = F s \cos(90^\circ)$, इसलिए किया गया कार्य शून्य होता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर के लिए प्रत्यास्थता गुणांक ($e$) का मान 1 होता है, न कि शून्य (शून्य पूर्णतः अप्रत्यास्थ टक्कर के लिए होता है)। कथन 3 असत्य है क्योंकि जड़त्व आघूर्ण वस्तु के द्रव्यमान के साथ-साथ घूर्णन अक्ष से कणों की दूरी के वर्ग ($mr^2$) पर भी निर्भर करता है, अतः अक्ष बदलने पर यह बदल जाता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि सरल आवर्त गति में माध्य स्थिति पर वेग अधिकतम होता है, इसलिए गतिज ऊर्जा अधिकतम और स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।