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अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
बुद्धि, व्यक्तित्व एवं सृजनशीलता सभी देखें (925) बुद्धि: अवधारणा एवं सिद्धांत212 गार्डनर: बहुबुद्धि301 संवेगात्मक बुद्धि (EQ)11 बुद्धि परीक्षण (IQ)65 व्यक्तित्व: सिद्धांत एवं प्रकार219 व्यक्तित्व मापन एवं परीक्षण24 सृजनशीलता (Creativity)92 अभिक्षमता, अभिवृत्ति एवं अभिरुचि1
वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
समायोजन, मानसिक स्वास्थ्य एवं मार्गदर्शन सभी देखें (54) समायोजन एवं रक्षा-युक्तियाँ35 मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव14 समस्यात्मक व्यवहार एवं बाल अपराध1 निर्देशन एवं परामर्श4
बाल अधिकार एवं संरक्षण सभी देखें (44) बाल अधिकार (UNCRC)1 POCSO अधिनियम एवं बाल सुरक्षा0 शिक्षा का अधिकार (RTE Act 2009)33 किशोर न्याय एवं अन्य कानून0 बाल कल्याण योजनाएँ (ICDS, मध्याह्न भोजन आदि)10
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा सभी देखें (48) ECCE: अवधारणा एवं महत्व1 खेल आधारित एवं गतिविधि आधारित शिक्षा1 मॉन्टेसरी, फ्रोबेल एवं बाल-शिक्षा के प्रणेता10 आधारभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN)3 बच्चों का पोषण एवं स्वास्थ्य33
शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया सभी देखें (546) शिक्षण: अर्थ, प्रकृति एवं सिद्धांत3 शिक्षण विधियाँ153 शिक्षण युक्तियाँ, सूत्र एवं तकनीकें5 पाठ योजना एवं इकाई योजना13 शिक्षण अधिगम सामग्री एवं ICT34 कक्षा प्रबंधन एवं अनुशासन5 शिक्षक की भूमिका एवं व्यावसायिक दक्षता92 बाल-केंद्रित एवं सक्रिय शिक्षण231 शैक्षिक मनोविज्ञान: अर्थ एवं विधियाँ10
पाठ्यचर्या, नीतियाँ एवं शिक्षा दर्शन सभी देखें (365) राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF)242 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 202021 शिक्षा आयोग, समितियाँ एवं नीतियाँ27 शिक्षा की संस्थाएँ (NCERT, NCTE, SCERT, DIET)10 शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक65
मूल्यांकन एवं मापन सभी देखें (355) मापन, मूल्यांकन एवं परीक्षण: अवधारणा200 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE)49 परीक्षण निर्माण, विश्वसनीयता एवं वैधता5 निदानात्मक एवं उपचारात्मक शिक्षण39 शैक्षिक उद्देश्य एवं ब्लूम का वर्गीकरण20 प्रश्न-पत्र निर्माण एवं प्रश्नों के प्रकार2 शैक्षिक सांख्यिकी (माध्य, माध्यिका, बहुलक)40
भाषा शिक्षण शास्त्र सभी देखें (45) भाषा अर्जन एवं भाषा अधिगम21 भाषा कौशल (LSRW)13 बहुभाषिकता एवं मातृभाषा3 हिंदी शिक्षण5 अंग्रेजी शिक्षण (English Pedagogy)3
विषय शिक्षण शास्त्र सभी देखें (57) गणित शिक्षण4 पर्यावरण अध्ययन (EVS) शिक्षण47 विज्ञान शिक्षण2 सामाजिक विज्ञान शिक्षण4

मानव शरीर के विभिन्न तंत्रों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मानव पाचन तंत्र में आमाशय (Stomach) से निकलने वाला 'पेप्सिनोजेन' निष्क्रिय एंजाइम हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आकर सक्रिय 'पेप्सिन' में बदल जाता है, जो प्रोटीन को पेप्टोन और प्रोटियोज़ में विखंडित करता है।
  2. 2. मानव परिसंचरण तंत्र में 'पेसमेकर' (Sinoatrial Node - SA Node) दाएँ आलिंद की दीवार पर स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करके हृदय की धड़कन की शुरुआत करता है, जिसे हृदय का 'पेसमेकर' कहा जाता है।
  3. 3. मानव तंत्रिका तंत्र में प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex Actions) का नियंत्रण मुख्य रूप से मस्तिष्क के 'प्रमस्तिष्क' (Cerebrum) द्वारा किया जाता है, जो बिना सोचे-समझे तीव्र अनुक्रिया उत्पन्न करता है।
  4. 4. मानव उत्सर्जन तंत्र में वृक्क (Kidney) की कार्यात्मक इकाई 'नेफ्रॉन' (Nephron) होती है, जिसके 'हेनले का लूप' (Loop of Henle) का मुख्य कार्य मूत्र का सांद्रण करना और जल एवं खनिजों का पुनравशोषण करना है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

मानव शरीर के तंत्रों के संदर्भ में कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। आमाशय में HCl की उपस्थिति में पेप्सिनोजेन सक्रिय पेप्सिन में बदलकर प्रोटीन का पाचन करता है। एस.ए. नोड (SA Node) को हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है जो दाएँ आलिंद में स्थित होता है। वृक्क की कार्यात्मक इकाई नेफ्रॉन है जिसमें हेनले का लूप जल के पुनравशोषण और मूत्र सांद्रण का कार्य करता है। वहीं, कथन 3 असत्य है क्योंकि प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex Actions) का नियंत्रण और समन्वय मुख्य रूप से 'मेरुरज्जु' (Spinal Cord) द्वारा किया जाता है, न कि प्रमस्तिष्क (Cerebrum) द्वारा। इस तरह के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।

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'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा की पुरानी 10+2 संरचना को पूरी तरह से समाप्त करके एक नए 5+3+3+4 पाठ्यचर्या संबंधी ढांचे में बदल दिया गया है, जिसमें 3 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को शामिल किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक डिज़ाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के तीन मुख्य सिद्धांतों—अभिप्रेरणा के बहु-साधन, प्रस्तुतीकरण के बहु-साधन, और अभिव्यक्ति के बहु-साधन—का तात्विक एवं मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) सहित सभी विद्यार्थियों के लिए अधिगम वातावरण का निर्माण करता है, तो UDL के इन सिद्धांतों और 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP 2020) के प्रावधानों के आलोक में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है? → पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के ऊर्जा प्रवाह और जैव-रासायनिक चक्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदशकीय (Unidirectional) होता है, और लिंडमैन के 'दस प्रतिशत नियम' (10% Law) के अनुसार, एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर केवल 10 प्रतिशत ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है, जबकि शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा श्वसन, ताप और उपापचय क्रियाओं के दौरान ह्रासित हो जाती है। 2. 'पारिस्थितिक पिरामिड' (Ecological Pyramid) में संख्या का पिरामिड और ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा (Upright) बनता है, किंतु एक बड़े वृक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र में पक्षियों के लिए 'संख्या का पिरामिड' उल्टा (Inverted) हो सकता है, और महासागरीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में 'बायोमास का पिरामिड' भी सदैव उल्टा होता है। 3. वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस की प्रचुरता के बावजूद पौधे इसे सीधे वायुमंडल से ग्रहण नहीं कर पाते हैं, अतः राइजोबियम और एजोटोबैक्टर जैसे सूक्ष्मजीव इसे नाइट्रेट्स या अमोनिया में बदलकर 'नाइट्रोजन स्थिरीकरण' (Nitrogen Fixation) का कार्य करते हैं, जो जैव-रासायनिक चक्र का एक प्रमुख हिस्सा है। 4. पारिस्थितिक अनुक्रमण (Ecological Succession) की प्रक्रिया में किसी नग्न चट्टान पर उगने वाले सबसे पहले पौधे 'लाइकेन' (Lichens) होते हैं, जिन्हें 'पायनियर कम्युनिटी' (Pioneer Community) कहा जाता है, जो चट्टानों को विघटित करके मृदा निर्माण की प्रक्रिया को शुरू करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → मानव शरीर में विभिन्न पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका, उनके स्रोतों तथा उनकी कमी से होने वाले रोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कार्बोहाइड्रेट और वसा शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करने वाले पोषक तत्व हैं, जहाँ 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण से लगभग 9.3 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है, जो कि समान मात्रा में कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली ऊर्जा की तुलना में लगभग दोगुनी से भी अधिक होती है। 2. विटामिन D, जिसे 'कैल्सीफेरोल' भी कहा जाता है, एक वसा-विलेय (Fat-soluble) विटामिन है जिसका संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा द्वारा कोलेस्ट्रॉल से किया जा सकता है, और इसकी कमी से वयस्कों में 'ऑस्टियोमैलेसिया' तथा बच्चों में 'रिकेट्स' नामक रोग हो जाता है। 3. प्रोटीन जटिल नाइट्रोजनयुक्त कार्बनिक यौगिक होते हैं जो अमीनो अम्लों की इकाइयों से पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े होते हैं; इनकी गंभीर कमी के कारण बच्चों में 'क्वाशियोकोर' (जिसमें हाथ-पैर पतले और पेट फूल जाता है) और 'मरास्मस' रोग उत्पन्न होते हैं। 4. खनिज लवणों के अंतर्गत 'आयोडीन' की कमी से थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है जिसे घेंघा (Goiter) कहा जाता है, तथा गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की भारी कमी से उत्पन्न होने वाले विकार को 'क्रिटिनिज़्म' कहते हैं, जिसमें बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → मानव शरीर में संतुलित आहार और विभिन्न पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कार्बोहाइड्रेट और वसा शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करने वाले पोषक तत्व हैं, जहाँ 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण से लगभग 9.3 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है, जो कि समान मात्रा में कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली ऊर्जा की तुलना में लगभग दोगुनी से भी अधिक है। 2. प्रोटीन को 'बॉडी बिल्डिंग फूड' (शरीर निर्माता भोजन) कहा जाता है, जिसका मुख्य कार्य ऊतकों की मरम्मत और नई कोशिकाओं का निर्माण करना है, तथा इसकी कमी से बच्चों में क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) और मैरासमस (Marasmus) जैसे गंभीर रोग उत्पन्न होते हैं। 3. विटामिन 'ए' (रेटिनॉल) एक जल-विघुलनशील (Water-soluble) विटामिन है, जिसकी कमी से रतौंधी (Night blindness) और जीरोफथैल्मिया (Xerophthalmia) नामक नेत्र रोग हो जाता है, जबकि विटामिन 'सी' और 'बी' कॉम्प्लेक्स वसा-विघुलनशील होते हैं। 4. खनिज लवणों में आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है जिसे घेंघा (Goitre) रोग कहते हैं, और लौह तत्व (Iron) की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन के संश्लेषण में बाधा उत्पन्न होती है जिससे रक्ताल्पता (Anemia) नामक विकार उत्पन्न होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → विटामिनों और उनके रासायनिक नामों तथा उनके अभाव से होने वाले रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विटामिन B1 (थायमिन) की कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जिसमें तंत्रिका तंत्र की कमजोरी और मांसपेशियों का पक्षाघात जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तथा यह जल में घुलनशील विटामिन है। 2. विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) एक एंटीऑक्सीडेंट विटामिन है, जिसकी कमी से 'स्कर्वी' रोग होता है, जिसमें मसूड़ों से खून आना और घाव भरने में देरी होना मुख्य लक्षण हैं, और यह शरीर में संचित रहता है। 3. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसका संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा द्वारा किया जाता है, और इसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' तथा वयס्कों में 'ऑस्टियोमैलेसिया' रोग हो जाता है। 4. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) का रासायनिक नाम है, जिसमें कोबाल्ट धातु पाई जाती है, और इसकी कमी से 'परनिशियस एनीमिया' (घातक अरक्तता) नामक रोग होता है, क्योंकि यह लाल रक्त कोशिकाओं के परिपक्वता के लिए आवश्यक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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