बच्चों का पोषण एवं स्वास्थ्य
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मानव शरीर के विभिन्न तंत्रों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मानव पाचन तंत्र में आमाशय (Stomach) से निकलने वाला 'पेप्सिनोजेन' निष्क्रिय एंजाइम हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आकर सक्रिय 'पेप्सिन' में बदल जाता है, जो प्रोटीन को पेप्टोन और प्रोटियोज़ में विखंडित करता है।
- 2. मानव परिसंचरण तंत्र में 'पेसमेकर' (Sinoatrial Node - SA Node) दाएँ आलिंद की दीवार पर स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करके हृदय की धड़कन की शुरुआत करता है, जिसे हृदय का 'पेसमेकर' कहा जाता है।
- 3. मानव तंत्रिका तंत्र में प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex Actions) का नियंत्रण मुख्य रूप से मस्तिष्क के 'प्रमस्तिष्क' (Cerebrum) द्वारा किया जाता है, जो बिना सोचे-समझे तीव्र अनुक्रिया उत्पन्न करता है।
- 4. मानव उत्सर्जन तंत्र में वृक्क (Kidney) की कार्यात्मक इकाई 'नेफ्रॉन' (Nephron) होती है, जिसके 'हेनले का लूप' (Loop of Henle) का मुख्य कार्य मूत्र का सांद्रण करना और जल एवं खनिजों का पुनравशोषण करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मानव शरीर के तंत्रों के संदर्भ में कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। आमाशय में HCl की उपस्थिति में पेप्सिनोजेन सक्रिय पेप्सिन में बदलकर प्रोटीन का पाचन करता है। एस.ए. नोड (SA Node) को हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है जो दाएँ आलिंद में स्थित होता है। वृक्क की कार्यात्मक इकाई नेफ्रॉन है जिसमें हेनले का लूप जल के पुनравशोषण और मूत्र सांद्रण का कार्य करता है। वहीं, कथन 3 असत्य है क्योंकि प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex Actions) का नियंत्रण और समन्वय मुख्य रूप से 'मेरुरज्जु' (Spinal Cord) द्वारा किया जाता है, न कि प्रमस्तिष्क (Cerebrum) द्वारा। इस तरह के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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मानव शरीर के पोषण और संतुलित आहार के संदर्भ में, विभिन्न पोषक तत्वों…
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और 'अधिकार अधिनियम (RPwD Act 2016)' के प्रावधानों तथा 'सार्वभौमिक डिज़ाइन फॉर लर्निंग' (UDL) के सिद्धांतों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय संवेदी, शारीरिक, बौद्धिक या बहु-विकलांगता (Multiple Disabilities) से ग्रस्त बच्चों को सामान्य बालकों के साथ मुख्यधारा की शिक्षा में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पाठ्यचर्या में लचीलापन, सुगम्यता (Accessibility) और सहायक तकनीकी (Assistive Technology) का उपयोग करता है, तो समावेशी शिक्षाशास्त्र के इन तात्विक एवं वैधानिक मानदंडों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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निम्नलिखित में से कौन सी अवस्था 'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता' (FLN) के लिए महत्वपूर्ण है?
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भारत सरकार द्वारा संचालित 'राष्ट्रीय योजनाएँ एवं नीतियाँ' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत मैदानी क्षेत्रों में मकान निर्माण के लिए वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये तथा पहाड़ी व कठिन क्षेत्रों में 1.30 लाख रुपये कर दिया गया है, और इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2024 तक 'सभी के लिए आवास' के लक्ष्य को प्राप्त करना था।
2. 'जल जीवन मिशन' (JJM) के अंतर्गत वर्ष 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को हर घर नल से जल (Functional Household Tap Connection - FHTC) उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर पीने योग्य पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित 'आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (AB-PMJAY) दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो देश के लगभग 50% गरीब और कमज़ोर परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए प्रदान करती है।
4. 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा की पुरानी 10+2 संरचना को पूरी तरह से समाप्त करके एक नए 5+3+3+4 पाठ्यचर्या संबंधी ढांचे में बदल दिया गया है, जिसमें 3 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को शामिल किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक डिज़ाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के तीन मुख्य सिद्धांतों—अभिप्रेरणा के बहु-साधन, प्रस्तुतीकरण के बहु-साधन, और अभिव्यक्ति के बहु-साधन—का तात्विक एवं मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) सहित सभी विद्यार्थियों के लिए अधिगम वातावरण का निर्माण करता है, तो UDL के इन सिद्धांतों और 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP 2020) के प्रावधानों के आलोक में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के ऊर्जा प्रवाह और जैव-रासायनिक चक्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदशकीय (Unidirectional) होता है, और लिंडमैन के 'दस प्रतिशत नियम' (10% Law) के अनुसार, एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर केवल 10 प्रतिशत ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है, जबकि शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा श्वसन, ताप और उपापचय क्रियाओं के दौरान ह्रासित हो जाती है।
2. 'पारिस्थितिक पिरामिड' (Ecological Pyramid) में संख्या का पिरामिड और ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा (Upright) बनता है, किंतु एक बड़े वृक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र में पक्षियों के लिए 'संख्या का पिरामिड' उल्टा (Inverted) हो सकता है, और महासागरीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में 'बायोमास का पिरामिड' भी सदैव उल्टा होता है।
3. वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस की प्रचुरता के बावजूद पौधे इसे सीधे वायुमंडल से ग्रहण नहीं कर पाते हैं, अतः राइजोबियम और एजोटोबैक्टर जैसे सूक्ष्मजीव इसे नाइट्रेट्स या अमोनिया में बदलकर 'नाइट्रोजन स्थिरीकरण' (Nitrogen Fixation) का कार्य करते हैं, जो जैव-रासायनिक चक्र का एक प्रमुख हिस्सा है।
4. पारिस्थितिक अनुक्रमण (Ecological Succession) की प्रक्रिया में किसी नग्न चट्टान पर उगने वाले सबसे पहले पौधे 'लाइकेन' (Lichens) होते हैं, जिन्हें 'पायनियर कम्युनिटी' (Pioneer Community) कहा जाता है, जो चट्टानों को विघटित करके मृदा निर्माण की प्रक्रिया को शुरू करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव शरीर में विभिन्न पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका, उनके स्रोतों तथा उनकी कमी से होने वाले रोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कार्बोहाइड्रेट और वसा शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करने वाले पोषक तत्व हैं, जहाँ 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण से लगभग 9.3 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है, जो कि समान मात्रा में कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली ऊर्जा की तुलना में लगभग दोगुनी से भी अधिक होती है।
2. विटामिन D, जिसे 'कैल्सीफेरोल' भी कहा जाता है, एक वसा-विलेय (Fat-soluble) विटामिन है जिसका संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा द्वारा कोलेस्ट्रॉल से किया जा सकता है, और इसकी कमी से वयस्कों में 'ऑस्टियोमैलेसिया' तथा बच्चों में 'रिकेट्स' नामक रोग हो जाता है।
3. प्रोटीन जटिल नाइट्रोजनयुक्त कार्बनिक यौगिक होते हैं जो अमीनो अम्लों की इकाइयों से पेप्टाइड बंधों द्वारा जुड़े होते हैं; इनकी गंभीर कमी के कारण बच्चों में 'क्वाशियोकोर' (जिसमें हाथ-पैर पतले और पेट फूल जाता है) और 'मरास्मस' रोग उत्पन्न होते हैं।
4. खनिज लवणों के अंतर्गत 'आयोडीन' की कमी से थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है जिसे घेंघा (Goiter) कहा जाता है, तथा गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की भारी कमी से उत्पन्न होने वाले विकार को 'क्रिटिनिज़्म' कहते हैं, जिसमें बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव शरीर में संतुलित आहार और विभिन्न पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कार्बोहाइड्रेट और वसा शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करने वाले पोषक तत्व हैं, जहाँ 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण से लगभग 9.3 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है, जो कि समान मात्रा में कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली ऊर्जा की तुलना में लगभग दोगुनी से भी अधिक है।
2. प्रोटीन को 'बॉडी बिल्डिंग फूड' (शरीर निर्माता भोजन) कहा जाता है, जिसका मुख्य कार्य ऊतकों की मरम्मत और नई कोशिकाओं का निर्माण करना है, तथा इसकी कमी से बच्चों में क्वाशियोरकर (Kwashiorkor) और मैरासमस (Marasmus) जैसे गंभीर रोग उत्पन्न होते हैं।
3. विटामिन 'ए' (रेटिनॉल) एक जल-विघुलनशील (Water-soluble) विटामिन है, जिसकी कमी से रतौंधी (Night blindness) और जीरोफथैल्मिया (Xerophthalmia) नामक नेत्र रोग हो जाता है, जबकि विटामिन 'सी' और 'बी' कॉम्प्लेक्स वसा-विघुलनशील होते हैं।
4. खनिज लवणों में आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है जिसे घेंघा (Goitre) रोग कहते हैं, और लौह तत्व (Iron) की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन के संश्लेषण में बाधा उत्पन्न होती है जिससे रक्ताल्पता (Anemia) नामक विकार उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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विटामिनों और उनके रासायनिक नामों तथा उनके अभाव से होने वाले रोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B1 (थायमिन) की कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जिसमें तंत्रिका तंत्र की कमजोरी और मांसपेशियों का पक्षाघात जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तथा यह जल में घुलनशील विटामिन है।
2. विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) एक एंटीऑक्सीडेंट विटामिन है, जिसकी कमी से 'स्कर्वी' रोग होता है, जिसमें मसूड़ों से खून आना और घाव भरने में देरी होना मुख्य लक्षण हैं, और यह शरीर में संचित रहता है।
3. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसका संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में त्वचा द्वारा किया जाता है, और इसकी कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' तथा वयס्कों में 'ऑस्टियोमैलेसिया' रोग हो जाता है।
4. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) का रासायनिक नाम है, जिसमें कोबाल्ट धातु पाई जाती है, और इसकी कमी से 'परनिशियस एनीमिया' (घातक अरक्तता) नामक रोग होता है, क्योंकि यह लाल रक्त कोशिकाओं के परिपक्वता के लिए आवश्यक है।
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