संवेगात्मक विकास
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत बल आघूर्ण (Torque), जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) तथा कोणीय संवेग (Angular Momentum) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी पिंड पर कार्य करने वाला बाह्य बल आघूर्ण (Torque) उस पिंड के कोणीय संवेग (Angular Momentum) में परिवर्तन की दर के बराबर होता है, जो न्यूटन के गति के द्वितीय नियम का घूर्णीय समरूप (Rotational Analogue) है।
- 2. यदि किसी घूर्णी गति करती हुई वस्तु पर आरोपित बाह्य बल आघूर्ण का मान शून्य (τ = 0) हो, तो उस वस्तु का कुल कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिसे कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत कहा जाता है और इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण अपने अक्ष पर घूमती हुई बैले नर्तकी द्वारा अपनी बाहों को सिकोड़कर अपनी घूमने की गति को बढ़ाना है।
- 3. किसी समांग ठोस गोले (Solid Sphere) का उसके व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण का मान उसी द्रव्यमान और त्रिज्या वाले खोखले गोले (Hollow Sphere) के जड़त्व आघूर्ण से अधिक होता है।
- 4. जड़त्व आघूर्ण एक अदिश राशि है जिसका एसआई मात्रक किग्रा-मीटर² (kg·m²) होता है, और यह इस बात पर निर्भर करता है कि वस्तु का द्रव्यमान उसके घूर्णन अक्ष से किस प्रकार वितरित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यांत्रिकी के नियमों के अनुसार कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। कथन 1 के अनुसार, बल आघूर्ण कोणीय संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है (τ = dL/dt)। कथन 2 के अनुसार, बाह्य बल आघूर्ण शून्य होने पर कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिसका उदाहरण नर्तकी का अपनी बाहें सिकोड़कर कोणीय वेग बढ़ाना है। कथन 4 के अनुसार, जड़त्व आघूर्ण एक अदिश (अथवा टेंसर) राशि है जिसका मात्रक kg·m² है। किंतु कथन 3 असत्य है, क्योंकि किसी व्यास के परितः ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण (2/5 MR²) खोखले गोले (2/3 MR²) की तुलना में कम होता है, अधिक नहीं। इस प्रकार के उच्च स्तरीय और वैचारिक प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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Related Questions
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केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों और गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस बात का संकेत देता है कि सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करते हुए ग्रह का कोणीय संवेग (Angular Momentum) संरक्षित रहता है, क्योंकि केंद्रीय बलों के अधीन गति में क्षेत्रीय वेग ($dA/dt$) अचर होता है।
2. न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, किन्हीं दो पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करता है, और यदि दोनों पिंडों को पानी के भीतर रख दिया जाए, तो उनके बीच का आकर्षण बल शून्य हो जाता है।
3. पृथ्वी की सतह से अनंत दूरी तक किसी पिंड को भेजने के लिए आवश्यक 'पलायन वेग' (Escape Velocity) उस पिंड के द्रव्यमान और प्रक्षेपण कोण पर निर्भर करता है, तथा अधिक द्रव्यमान वाले पिंड के लिए पलायन वेग का मान अधिक होता है।
4. यदि पृथ्वी अपने वर्तमान कोणीय वेग से 17 गुना अधिक वेग से घूमने लगे, तो भूमध्य रेखा (Equator) पर रखी वस्तुओं का आभासी भार शून्य हो जाएगा और वहाँ की वस्तुएँ भारहीनता का अनुभव करेंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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आधुनिक भौतिकी तथा परमाणु संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण ($K_{max} = h\nu - \Phi$) के अनुसार, उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर रेखीय रूप से निर्भर करती है और यह प्रकाश की तीव्रता से स्वतंत्र होती है।
2. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, हाइड्रोजन परमाणु की किसी भी स्थिर कक्षा में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग ($L$) प्लैंक स्थिरांक ($h$) का पूर्ण गुणज अर्थात् $L = \frac{nh}{2\pi}$ होता है, जहाँ $n$ मुख्य क्वांटम संख्या है।
3. रेडियोएक्टिव क्षय के नियम के अनुसार, किसी भी रेडियोधर्मी पदार्थ के विघटन की दर किसी भी क्षण उस समय उपस्थित परमाणुओं की कुल संख्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और इसका अर्द्ध-आयु काल विघटन नियतांक के वर्ग के सीधे आनुपातिक होता है।
4. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता के सिद्धांत ($E = mc^2$) के अनुसार, नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) और नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) दोनों ही प्रक्रियाओं में बंधन ऊर्जा (Binding Energy) प्रति न्यूक्लियन में वृद्धि के कारण द्रव्यमान क्षति (Mass Defect) ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों और गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस तथ्य पर आधारित है कि केंद्रीय बलों के अंतर्गत कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिसके अनुसार ग्रह सूर्य को मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल तय करती है।
2. न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, दो पिंडों के बीच लगने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के व्युत्क्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होता है।
3. पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर या पृथ्वी की गहराई में जाने पर गुरुत्वीय त्वरण ($g$) के मान में कमी आती है, तथा पृथ्वी के केंद्र पर $g$ का मान शून्य हो जाता है।
4. उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_0$) पृथ्वी की त्रिज्या पर निर्भर करती है और यदि कोई उपग्रह पृथ्वी के अत्यंत समीप परिक्रमा करे, तो उसकी कक्षीय चाल लगभग 7.9 किमी/सेकंड होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भौतिक राशियों, उनके विमीय सूत्रों और मापन की पद्धतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) का विमीय सूत्र $[ML^{-1}T^{-1}]$ होता है, तथा इसका एसआई मात्रक पास्कल-सेकंड ($Pa\cdot s$) या किलोग्राम प्रति मीटर-सेकंड ($kg \cdot m^{-1} \cdot s^{-1}$) होता है।
2. प्लांक नियतांक (Planck's Constant) और कोणीय संवेग (Angular Momentum) दोनों की विमाएँ पूर्ण रूप से समान होती हैं, और दोनों का विमीय सूत्र $[ML^2T^{-1}]$ होता है।
3. जब किसी भौतिक राशि के मापन में त्रुटि (Error) की गणना की जाती है, तो यदि कोई राशि $X = \frac{A^2 B^3}{C}$ के रूप में संबंधित है, तो उस राशि में अधिकतम आनुपेक्षिक त्रुटि (Maximum Fractional Error) का मान $\frac{\Delta X}{X} = 2\left(\frac{\Delta A}{A}\right) + 3\left(\frac{\Delta B}{B}\right) - \left(\frac{\Delta C}{C}\right)$ होता है।
4. प्रकाश वर्ष (Light Year) और पार्सेक (Parsec) दोनों खगोलीय दूरियाँ मापने की इकाइयाँ हैं, जिसमें 1 पार्सेक का मान लगभग $3.26$ प्रकाश वर्ष के बराबर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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संवेग p का मात्रक?
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पियाजे के अनुसार, 'संवेगात्मक विकास' (Emotional Development) किस अवस्था में सबसे अधिक सामाजिक होता है?
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