आधुनिक भौतिकी तथा परमाणु संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण ($K_{max} = h\nu - \Phi$) के अनुसार, उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर रेखीय रूप से निर्भर करती है और यह प्रकाश की तीव्रता से स्वतंत्र होती है।
- 2. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, हाइड्रोजन परमाणु की किसी भी स्थिर कक्षा में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग ($L$) प्लैंक स्थिरांक ($h$) का पूर्ण गुणज अर्थात् $L = \frac{nh}{2\pi}$ होता है, जहाँ $n$ मुख्य क्वांटम संख्या है।
- 3. रेडियोएक्टिव क्षय के नियम के अनुसार, किसी भी रेडियोधर्मी पदार्थ के विघटन की दर किसी भी क्षण उस समय उपस्थित परमाणुओं की कुल संख्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और इसका अर्द्ध-आयु काल विघटन नियतांक के वर्ग के सीधे आनुपातिक होता है।
- 4. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता के सिद्धांत ($E = mc^2$) के अनुसार, नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) और नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) दोनों ही प्रक्रियाओं में बंधन ऊर्जा (Binding Energy) प्रति न्यूक्लियन में वृद्धि के कारण द्रव्यमान क्षति (Mass Defect) ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
इस प्रश्न में दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है: कथन 1 सत्य है क्योंकि आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा केवल आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है, तीव्रता पर नहीं। कथन 2 सत्य है, यह बोर के क्वांटमीकरण प्रतिबंध को दर्शाता है जिसमें कोणीय संवेग $nh/2\pi$ का पूर्ण गुणज होता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि रेडियोधर्मी विघटन की दर उस क्षण उपस्थित परमाणुओं की संख्या के सीधे समानुपातिक (व्युत्क्रमानुपातिक नहीं) होती है ($-\frac{dN}{dt} = \lambda N$) तथा अर्द्ध-आयु $T_{1/2} = \frac{0.693}{\lambda}$ होती है, जो विघटन नियतांक के व्युत्क्रमानुपातिक होती है। कथन 4 सत्य है क्योंकि नाभिकीय अभिक्रियाओं में द्रव्यमान क्षतिज ऊर्जा में बदलती है। इस तरह के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।