भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास और औपनिवेशिक शिक्षा नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1813 के चार्टर अधिनियम (Charter Act of 1813) द्वारा ब्रिटिश संसद ने भारत में साहित्य के पुनरुत्थान, विद्वान भारतीयों के प्रोत्साहन और विज्ञान के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये की धनराशि खर्च करने का प्रावधान किया था।
- 2. 'हंटर शिक्षा आयोग' (Hunter Commission, 1882), जिसे विलियम हंटर की अध्यक्षता में नियुक्त किया गया था, का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की प्रगति की समीक्षा करना था, और इसने विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा के नियंत्रण को स्थानीय निकायों (Municipalities and District Boards) को सौंपने की संस्तुति की थी।
- 3. 'रैले आयोग' (Raleigh Commission, 1902) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1904 में 'भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम' (Indian Universities Act) पारित किया गया, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण को कड़ा कर दिया गया और सीनेट के सदस्यों की संख्या सीमित कर दी गई।
- 4. वर्ष 1917 में गठित 'सैडलर विश्वविद्यालय आयोग' (Sadler University Commission), जिसे कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग भी कहा जाता है, ने माध्यमिक शिक्षा के सुधार के लिए 12-वर्षीय स्कूली शिक्षा की प्रणाली का प्रस्ताव दिया और विश्वविद्यालयों में 'सम्मान' (Honours) पाठ्यक्रमों की शुरुआत की संस्तुति की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. 1813 के चार्टर अधिनियम ने पहली बार भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए वित्तीय उत्तरदायित्व लेते हुए 1 लाख रुपये का वार्षिक अनुदान स्वीकृत किया था। 2. 1882 का हंटर आयोग मुख्य रूप से प्राथमिक शिक्षा की स्थिति की जाँच के लिए गठित हुआ था और इसने स्थानीय स्वशासी निकायों को प्राथमिक शिक्षा का जिम्मा देने पर बल दिया। 3. 1902 के रैले आयोग की संस्तुतियों पर 1904 का भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम आया, जिसने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को सीमित कर दिया और सरकारी प्रभाव बढ़ाया। 4. 1917 का सैडलर आयोग कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं के साथ-साथ समग्र स्कूली एवं उच्च शिक्षा सुधार से जुड़ा था, जिसने इंटरमीडिएट कक्षाओं को पृथक करने और 12-वर्षीय स्कूली शिक्षा की वकालत की। इस प्रकार के महत्वपूर्ण प्रश्नों और संपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।