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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक ऋण प्रबंधन' (Public Debt Management) और केंद्र सरकार की उधार लेने की रणनीतियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में केंद्र सरकार के आंतरिक ऋण का प्रबंधन मुख्य रूप से 'भारतीय रिजर्व बैंक' (RBI) द्वारा सरकार के बैंकर और ऋण प्रबंधक के रूप में किया जाता है, जिसके तहत RBI सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) के नीलामी संचालन और तरबियत नियंत्रण का कार्य करता है।
  2. 2. 'सार्वजनिक ऋण प्रबंधन एजेंसी' (Public Debt Management Agency - PDMA) की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सरकारी ऋण प्रबंधन और मौद्रिक नीति संचालन के संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) को समाप्त करना था, और वर्तमान में PDMA पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से वित्त मंत्रालय के नियंत्रण से बाहर एक सांविधिक निकाय के रूप में कार्य करती है।
  3. 3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के तहत केंद्र सरकार के लिए यह वैधानिक रूप से अनिवार्य किया गया था कि वह वर्ष 2024-25 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 40% के लक्ष्य के भीतर केंद्र के ऋण और राजकोषीय घाटे को सीमित रखे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारत में केंद्र सरकार के आंतरिक ऋण का प्रबंधन पारंपरिक रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा किया जाता है। RBI सरकार के बैंकर के रूप में ट्रेजरी बिल और सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) की नीलामी का प्रबंधन करता है। कथन 2 गलत है: यद्यपि सरकार ने भविष्य में PDMA (सार्वजनिक ऋण प्रबंधन एजेंसी) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था ताकि ऋण प्रबंधन और मौद्रिक नीति के बीच हितों के टकराव को दूर किया जा सके, किंतु अभी तक एक पूर्ण और स्वतंत्र PDMA को वित्त मंत्रालय से बाहर वैधानिक रूप से पूरी तरह कार्यात्मक नहीं बनाया गया है और RBI वर्तमान में भी अधिकांश ऋण प्रबंधन कार्य संभाल रहा है। कथन 3 गलत है: संशोधित FRBM अधिनियम, 2003 के लक्ष्यों के अनुसार, केंद्र सरकार के लिए वर्ष 2024-25 तक केंद्र के ऋण और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात को लगभग 40% (तथा केंद्र और राज्यों के संयुक्त ऋण को 60%) तक लाने का लक्ष्य रखा गया था, किंतु यह अधिनियम के शुरुआती रूप में नहीं बल्कि संशोधनों के बाद आया था और कथन में उल्लिखित पूर्ण वैधानिक बाध्यताएँ और तिथियाँ इस रूप में सटीक नहीं हैं क्योंकि COVID-19 महामारी के कारण इन लक्ष्यों की समय-सीमा में संशोधन किया गया है। अतः केवल कथन 1 सही है।
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