BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
16 views

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) के अंतर्गत संसद की भाषा, विधिनिर्माण और सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की भाषा के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, तथा संसद या राज्य के विधानमंडल द्वारा अधिनियमित प्रत्येक अधिनियम या राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश का आधिकारिक पाठ अंग्रेजी भाषा में ही होना अनिवार्य किया गया है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 348(2) के अंतर्गत किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, उच्च न्यायालय की कार्यवाही में (निर्णयों, डिक्रियों या आदेशों को छोड़कर) हिंदी भाषा या उस राज्य के शासकीय प्रयोजनों के लिए उपयोग की जाने वाली किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है, बशर्ते उच्च न्यायालय के निर्णय, डिक्री या आदेश हमेशा अंग्रेजी में ही दिए जाएँ।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए वह मुख्य रूप से संस्कृत भाषा से शब्द-भंडार प्राप्त करे, किंतु अन्य भारतीय भाषाओं (संविधान की आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट) की शब्दावली को आत्मसात करने का निर्देश संविधान में नहीं दिया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 348(1) के अनुसार, जब तक संसद विधि द्वारा अन्य उपबंध न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय की सभी कार्रवाइयाँ अंग्रेजी भाषा में होंगी। साथ ही, संसद या राज्य के विधानमंडल के प्रत्येक सदन में प्रयुक्त विधेयक, अधिनियम, अध्यादेश और आदेशों के पाठ अंग्रेजी में ही होंगे। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 348(2) के अंतर्गत किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी भाषा या राज्य के शासकीय प्रयोजनों के लिए उपयोग होने वाली किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है। हालांकि, यह प्रावधान उच्च न्यायालय के निर्णयों, डिक्रियों या आदेशों पर लागू नहीं होता, जो अंग्रेजी में ही होने चाहिए (जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे)। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 351 के अंतर्गत संघ के हिंदी भाषा के विकास और प्रसार के निर्देश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वह मुख्य रूप से संस्कृत से ही नहीं, बल्कि 'सामासिक संस्कृति' के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति सुनिश्चित करने के लिए 'संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं (संविधान की आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट)' की शब्दावली को आत्मसात करते हुए अपना शब्द-भंडार प्राप्त करेगा। अतः केवल संस्कृत तक सीमित करना गलत है।
Share:

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP - अनुच्छेद 36 से 51) तथा उनकी न्यायसंगतता के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार DPSP देश के शासन में मौलिक हैं और देश के लिए कानून बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये तत्व किसी भी न्यायालय द्वारा न्यायसंगत (Justiciable) नहीं हैं, अर्थात इन्हें किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है। 2. संविधान में यद्यपि DPSP को गैर-न्यायसंगत बनाया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह प्रतिपादित किया है कि मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के बीच संतुलन संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है, और नीति निर्देशक तत्वों के क्रियान्वयन के लिए बनाए गए कानून को अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के उल्लंघन के आधार पर पूरी तरह असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता यदि वह अनुच्छेद 39(b) या (c) के उद्देश्यों को पूरा करता हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का प्रावधान एक ऐसा नीति निर्देशक तत्व है जिसे केवल संसद द्वारा ही पूरे देश के लिए एक साथ अधिनियमित किया जा सकता है, और किसी भी राज्य के विधानमंडल को अपने राज्य क्षेत्र के भीतर समान नागरिक संहिता से संबंधित कोई भी कानून बनाने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संघीय प्रणाली' (Federal System) और राज्यपाल की विधायी शक्तियों से जुड़े 'अध्यादेश' (Ordinance - Article 213) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के विश्रामकाल के दौरान अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति राज्य सूची तथा समवर्ती सूची के उन सभी विषयों तक विस्तारित है जिन पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है, बशर्ते कि इसके लिए राष्ट्रपति के पूर्व निर्देशों (Prior Instructions) की कुछ विशेष परिस्थितियों में आवश्यकता होती हो। 2. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनः समवेत होने पर उसके समक्ष रखा जाना अनिवार्य है, और यदि राज्य विधानमंडल बिना किसी अनुमोदन के अध्यादेश को अस्वीकार कर देता है या छह सप्ताह की अवधि समाप्त हो जाती है, तो वह अध्यादेश स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है। 3. 'डी.सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987)' वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया कि राज्यपाल द्वारा अध्यादेशों का पुनरावृत्ति (Re-promulgation) के माध्यम से लगातार अनिश्चित काल तक प्रचालन करना संविधान की विधायी प्रक्रिया और संघवाद की भावना के विरुद्ध है, तथा यह कार्यपालिका की शक्ति का अवैध अतिक्रमण (Fraud on Constitution) माना जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → "TribeX" डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म किस मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया? → किस राज्य सरकार ने हाल ही में, कैंसर को एक अधिसूचनीय रोग घोषित किया है? → भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' (Wild Life (Protection) Act, 1972) के अंतर्गत विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों और संस्थागत निकायों के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत किसी राज्य की सरकार को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी भी क्षेत्र को, जो उसके स्वामित्व का है या किसी अभ्यारण्य की सीमा के भीतर है, पारिस्थितिकीय, जीवजंतु, वनस्पति, भू-आकृतिक या प्राणीशास्त्रीय महत्व के कारण 'राष्ट्रीय उद्यान' (National Park) के रूप में घोषित कर सकती है, बशर्ते इसके लिए राज्य विधानमंडल का अनुमोदन अनिवार्य हो। 2. वर्ष 2002 के संशोधन अधिनियम द्वारा इस अधिनियम में 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) के गठन का प्रावधान किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, और इस बोर्ड की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमाओं में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। 3. इस अधिनियम के तहत स्थापित 'केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण' (Central Zoo Authority - CZA) देश भर के सभी चिड़ियाघरों के रख-रखाव और प्रबंधन का विनियमन करता है, और इसे वन्यजीवों के अवैध व्यापार को रोकने तथा लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए कैप्टिव प्रजनन (Captive Breeding) कार्यक्रम आयोजित करने की सांविधिक शक्ति प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.