Civil services
Asked 2 months ago · Viewed 19 times
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IXक' (नगरपालिकाएँ - अनुच्छेद 243P से 243ZG) के अंतर्गत नगरपालिकाओं की संरचना, वार्ड समितियों और महानगर योजना समितियों (Metropolitan Planning Committees - MPC) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 243R के अनुसार किसी नगरपालिका के सभी स्थान उस नगरपालिका क्षेत्र के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरे जाएंगे, और इसके अतिरिक्त राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा किसी नगरपालिका में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों (जैसे लोकसभा या राज्यसभा के सदस्यों) को बिना मतदान के अधिकार के प्रतिनिधित्व प्रदान करने का उपबंध कर सकता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 243S के अनुसार तीस लाख या उससे अधिक की जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए प्रत्येक राज्य में एक 'महानगर योजना समिति' (MPC) का गठन किया जाएगा, जो उस महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजनाएँ तैयार करेगी, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम-से-कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्य महानगर क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और जिला पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से ही चुने जाएंगे।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 243W के अंतर्गत राज्य के विधानमंडल द्वारा विधिवत कानून बनाकर नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 18 विषयों से संबंधित कार्य सौंपे जा सकते हैं, किंतु इन विषयों पर कर लगाने या वित्तीय संसाधन जुटाने की शक्ति पूरी तरह से राज्य सरकार के अधीन होती है और नगरपालिकाओं को स्वतः कर लगाने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 243R के अनुसार किसी नगरपालिका के सभी स्थान प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरे जाते हैं। इसके अलावा, राज्य का विधानमंडल लोकसभा/राज्यसभा के सदस्यों और राज्य विधानमंडल के सदस्यों (विधायक/विधान परिषद सदस्य) तथा विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को प्रतिनिधित्व देने का उपबंध कर सकता है, लेकिन इन्हें नगरपालिकाओं की बैठकों में मतदान का अधिकार नहीं होता है।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 243ZE (न कि 243S) के अनुसार दस लाख (10 लाख) या उससे अधिक की जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए प्रत्येक राज्य में एक 'महानगर योजना समिति' (MPC) का गठन किया जाता है (तीस लाख नहीं)। साथ ही, इस समिति के कुल सदस्यों में से कम-से-कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्य महानगर क्षेत्र में स्थित नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और जिला पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं।
कथन 3 गलत है: बारहवीं अनुसूची के 18 विषयों पर कर लगाने, शुल्क वसूलने और वित्तीय संसाधन जुटाने की शक्ति राज्य के विधानमंडल द्वारा 'कानून बनाकर' नगरपालिकाओं को प्रदान की जाती है, जिसका अर्थ है कि संविधान ने राज्यों को यह अधिकार दिया है कि वे नगरपालिकाओं को कर लगाने की शक्ति प्रत्यायोजित (delegate) कर सकते हैं, और जब राज्य विधानमंडल ऐसा कानून बना देता है, तो नगरपालिकाओं को कर लगाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाता है।
अगला प्रश्न →
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII'…
← पिछला प्रश्न
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय…
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र और राज्यों के बीच 'प्रशासनिक संबंधों' (Administrative Relations - अनुच्छेद 256 से 263) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 256 के अनुसार प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा जिससे संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और उस राज्य में लागू होने वाले किसी भी पूर्ववर्ती केंद्रीय कानून का अनुपालन सुनिश्चित हो सके, और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संघ की कार्यपालिका राज्य को ऐसे निर्देश दे सकती है जो भारत सरकार के लिए आवश्यक प्रतीत हों।
2. संविधान के अनुच्छेद 257(1) के तहत प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा जिससे संघ की कार्यकारी शक्ति के प्रयोग में किसी भी प्रकार का बाधा या प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, और संघ की कार्यपालिका को यह शक्ति प्राप्त है कि वह राज्यों को संचार के साधन (जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग या रेलवे) के निर्माण और रखरखाव के संबंध में आवश्यक निर्देश दे सके।
3. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह लोक हित में एक 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) की स्थापना कर सकता है, और इस परिषद के निर्णयों को लागू करना सभी राज्यों और केंद्र सरकार के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी (Binding) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक ऋण प्रबंधन' (Public Debt Management) और केंद्र सरकार की उधार लेने की रणनीतियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में केंद्र सरकार के आंतरिक ऋण का प्रबंधन मुख्य रूप से 'भारतीय रिजर्व बैंक' (RBI) द्वारा सरकार के बैंकर और ऋण प्रबंधक के रूप में किया जाता है, जिसके तहत RBI सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) के नीलामी संचालन और तरबियत नियंत्रण का कार्य करता है।
2. 'सार्वजनिक ऋण प्रबंधन एजेंसी' (Public Debt Management Agency - PDMA) की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सरकारी ऋण प्रबंधन और मौद्रिक नीति संचालन के संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) को समाप्त करना था, और वर्तमान में PDMA पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से वित्त मंत्रालय के नियंत्रण से बाहर एक सांविधिक निकाय के रूप में कार्य करती है।
3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के तहत केंद्र सरकार के लिए यह वैधानिक रूप से अनिवार्य किया गया था कि वह वर्ष 2024-25 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 40% के लक्ष्य के भीतर केंद्र के ऋण और राजकोषीय घाटे को सीमित रखे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329क) के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) तथा चुनावी सुधारों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक अखिल भारतीय निकाय है, जो संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति अपने में निहित रखता है, और मूल संविधान में इसे एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया था जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के अलावा दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों का होना अनिवार्य किया गया था।
2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और संविधान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए निर्धारित की गई है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग को संसद या राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की अयोग्यता के प्रश्नों पर निर्णय देने की शक्ति सीधे तौर पर प्राप्त नहीं है, बल्कि इस संबंध में आयोग केवल राष्ट्रपति या संबंधित राज्य के राज्यपाल को अपनी परामर्शदात्री (Advisory) राय देता है, और राष्ट्रपति या राज्यपाल इस राय के अनुसार निर्णय लेने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) तथा भारत में अवसंरचना वित्तपोषण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तत्वावधान में लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक और आर्थिक अवसंरचना परियोजनाओं की पहचान करना, उन्हें समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित करना और वर्ष 2025 तक कुल 111 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना था।
2. NIP के कुल अनुमानित पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में ऊर्जा, सड़क, और रेलवे क्षेत्रों की हिस्सेदारी संयुक्त रूप से आधे से अधिक (50% से अधिक) है, जबकि सामाजिक बुनियादी ढांचा (जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य) का हिस्सा इसमें सबसे कम है।
3. NIP के प्रभावी कार्यान्वयन और वित्तपोषण के लिए स्थापित 'भारत अवसंरचना वित्त कंपनी लिमिटेड' (IIFCL) को प्रत्यक्ष रूप से केवल केंद्र सरकार से बजटीय सहायता प्राप्त होती है, और इसे घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से वाणिज्यिक ऋण या बॉंड जारी करके धन जुटाने की वैधानिक अनुमति नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.