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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायतों - अनुच्छेद 243 से 243O) और 'भाग IX-A' (नगरपालिकाओं - अनुच्छेद 243P से 243ZG) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से संविधान में क्रमशः भाग IX और IX-A जोड़े गए, जिनके तहत पंचायतों और नगरपालिकाओं दोनों के लिए महिलाओं को कुल भरी जाने वाली प्रत्यक्ष सीटों की संख्या के कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करना अनिवार्य किया गया है, तथा यह आरक्षण अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 243-I के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, इस अधिनियम के प्रारंभ होने से एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर, एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्यपाल को यह संस्तुति करेगा कि करों और शुल्कों के शुद्ध आगमों का राज्य और स्थानीय निकायों के बीच वितरण किस प्रकार किया जाना चाहिए।
- 3. स्थानीय निकायों के चुनावों को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से संचालित करने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 243K के तहत प्रत्येक राज्य में एक 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसके राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा उसे उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को हटाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों के अनुसार, पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए कुल भरी जाने वाली प्रत्यक्ष सीटों (तथा अध्यक्ष/अध्यक्षता के पदों) में से कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करना अनिवार्य किया गया है। यह आरक्षण महिलाओं के लिए अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित सीटों के कुल कोटे के भीतर भी लागू होता है (अर्थात SC/ST महिलाओं के लिए भी आरक्षित होता है)। परंतु कथन में तकनीकी रूप से यह बात अधूरी और भ्रामक हो सकती है यदि इसे इस प्रकार समझा जाए, लेकिन सबसे बड़ा दोष कथन 3 में है।
कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 243K के अनुसार राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उसे उसके पद से हटाने की प्रक्रिया वही है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (Judge of High Court) को हटाने की होती है, न कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) की। (उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत और राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जाता है, जबकि CEC को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान हटाया जाता है)। अतः कथन 3 गलत है।
कथन 2 सही है: संविधान के अनुच्छेद 243-I (पंचायतों के लिए) और अनुच्छेद 243-Y (नगरपालिकाओं के लिए) के तहत राज्यपाल द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष पर 'राज्य वित्त आयोग' के गठन का प्रावधान है, जो स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और करों के बँटवारे की संस्तुति करता है। अतः केवल कथन 2 सही है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम' (National Clean Air Programme - NCAP) और वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम' (NCAP) देश का पहला राष्ट्रव्यापी प्रयास है जिसका उद्देश्य देश के विशिष्ट गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment Cities) में वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है।
2. इस कार्यक्रम का प्रारंभिक लक्ष्य वर्ष 2024 तक आधार वर्ष (Base Year 2017) की तुलना में देश के लक्षित शहरों में पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5 दोनों) की सांद्रता में 20% से 30% तक की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40% की कमी का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. NCAP के अंतर्गत निर्धारित किए गए लक्ष्य और कार्य-योजनाएँ केवल केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन लागू की जाती हैं, तथा इसके क्रियान्वयन में राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) की कोई वैधानिक या अनुकरणीय भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 21' के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' और इसके विस्तृत न्यायिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऐतिहासिक 'मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)' वाद से पहले, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'ए.के. गोपालन वाद (1950)' में दिए गए निर्णय के अनुसार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure established by law) के दायरे में केवल यह देखा जाता था कि क्या प्रक्रिया निर्धारित करने वाला कोई कानून मौजूद है, और न्यायालय उस कानून की निष्पक्षता, न्यायसंगतता या तर्कसंगतता (Justness and fairness) की समीक्षा नहीं कर सकता था।
2. 'मेनका गांधी वाद (1978)' में उच्चतम न्यायालय ने ए.के. गोपालन वाद के पुराने दृष्टिकोण को पलटते हुए यह निर्धारित किया कि अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनने वाली प्रक्रिया न केवल वैध होनी चाहिए, बल्कि वह 'उचित, न्यायसंगत और तर्कसंगत' (Just, fair and reasonable) भी होनी चाहिए, जिससे भारतीय विधि-शास्त्र में अमेरिकी अवधारणा 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' (Due process of law) का अंतःक्षेपण हुआ।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त 'दैहिक स्वतंत्रता' के व्यापक दायरे में त्वरित विचारण (Speedy trial), मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार, एकांत कारावास के विरुद्ध संरक्षण, और प्रदूषणमुक्त जल एवं वायु का अधिकार भी शामिल हैं, किंतु इसमें विदेश जाने का अधिकार (Right to go abroad) शामिल नहीं है क्योंकि यह विषय विदेश मंत्रालय के प्रशासनिक विवेक के अधीन आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 361' के अंतर्गत प्रदत्त 'राष्ट्रपति और राज्यपालों के विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां' (Immunities) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के राष्ट्रपति और किसी राज्य के राज्यपाल को अपने कार्यालय की शक्तियों और कर्तव्यों के पालन के लिए तथा उनके द्वारा किए गए या किए जाने का दावा किए जाने वाले कृत्यों के लिए देश के किसी भी न्यायालय के प्रति जवाबदेह होने से पूर्ण संवैधानिक उन्मुक्ति प्राप्त है, और उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी न्यायालय द्वारा उनकी व्यक्तिगत क्षमता में भी कोई आपराधिक कार्यवाही (Criminal Proceedings) शुरू नहीं की जा सकती है।
2. हालांकि राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उनकी व्यक्तिगत क्षमता (Personal Capacity) में किसी भी प्रकार की दीवानी कार्यवाही (Civil Proceedings) शुरू करने पर पूर्ण प्रतिबंध होता है, किंतु यदि उनकी व्यक्तिगत क्षमता से संबंधित किसी दीवानी मामले में उन्हें दो महीने की पूर्व लिखित सूचना (Prior Notice) दी जाती है, तो न्यायालय उनके विरुद्ध दीवानी मुकदमा चलाने की अनुमति दे सकता है।
3. अनुच्छेद 361 के प्रावधानों के तहत, राष्ट्रपति या राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उनके विरुद्ध किसी भी न्यायालय से न तो कोई गिरफ्तारी का वारंट (Arrest Warrant) जारी किया जा सकता है और न ही उन्हें कारावास में भेजा जा सकता है, किंतु यदि वे अपने पद पर रहते हुए कोई गंभीर अपराध करते हैं, तो संसद या राज्य विधानमंडल महाभियोग या विशेष प्रस्ताव के माध्यम से उनके कार्यकाल के दौरान ही उन्हें गिरफ्तार करवा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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धन का निष्कासन (Drain Theory) का सिद्धांत किसने दिया था?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के गठन, क्षेत्राधिकार और शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रभावी और त्वरित प्रवर्तन के लिए की गई थी।
2. अधिकरण को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं और साक्ष्य अधिनियम के नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होता है, और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से बाध्य नहीं है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है, और अधिकरण के किसी भी आदेश को उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) के अंतर्गत चुनौती नहीं दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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