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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 21' के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' और इसके विस्तृत न्यायिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऐतिहासिक 'मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)' वाद से पहले, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'ए.के. गोपालन वाद (1950)' में दिए गए निर्णय के अनुसार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure established by law) के दायरे में केवल यह देखा जाता था कि क्या प्रक्रिया निर्धारित करने वाला कोई कानून मौजूद है, और न्यायालय उस कानून की निष्पक्षता, न्यायसंगतता या तर्कसंगतता (Justness and fairness) की समीक्षा नहीं कर सकता था।
  2. 2. 'मेनका गांधी वाद (1978)' में उच्चतम न्यायालय ने ए.के. गोपालन वाद के पुराने दृष्टिकोण को पलटते हुए यह निर्धारित किया कि अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनने वाली प्रक्रिया न केवल वैध होनी चाहिए, बल्कि वह 'उचित, न्यायसंगत और तर्कसंगत' (Just, fair and reasonable) भी होनी चाहिए, जिससे भारतीय विधि-शास्त्र में अमेरिकी अवधारणा 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' (Due process of law) का अंतःक्षेपण हुआ।
  3. 3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त 'दैहिक स्वतंत्रता' के व्यापक दायरे में त्वरित विचारण (Speedy trial), मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार, एकांत कारावास के विरुद्ध संरक्षण, और प्रदूषणमुक्त जल एवं वायु का अधिकार भी शामिल हैं, किंतु इसमें विदेश जाने का अधिकार (Right to go abroad) शामिल नहीं है क्योंकि यह विषय विदेश मंत्रालय के प्रशासनिक विवेक के अधीन आता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 'ए.के. गोपालन वाद (1950)' में सर्वोच्च न्यायालय ने 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' की संकीर्ण व्याख्या की थी, जिसके तहत न्यायालय केवल यह देखता था कि क्या अधिकृत कानून मौजूद है या नहीं, और उस कानून की न्यायसंगतता की समीक्षा नहीं करता था। कथन 2 सही है: 'मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)' वाद में न्यायालय ने 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' और 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' के बीच की दूरी को कम करते हुए यह अनिवार्य किया कि कानून मनमाना, unfair या oppressive नहीं होना चाहिए, बल्कि वह उचित, न्यायसंगत और तर्कसंगत होना चाहिए। कथन 3 गलत है: मेनका गांधी वाद में ही सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह निर्णय दिया था कि 'विदेश जाने का अधिकार' (Right to go abroad) अनुच्छेद 21 के तहत 'दैहिक स्वतंत्रता' का एक अभिन्न हिस्सा है। अतः कथन 3 का यह दावा गलत है कि इसमें विदेश जाने का अधिकार शामिल नहीं है।
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