BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
6 views

भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment - EIA) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित NGT एक विशेष निकाय है जो पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के प्रभावी व त्वरित निपटान के लिए कार्य करता है, तथा इसे दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।
  2. 2. NGT के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले किसी भी पर्यावरण संबंधी आदेश, निर्णय या पुरस्कार से व्यथित व्यक्ति इस अधिकरण के आदेश के विरुद्ध 90 दिनों के भीतर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता इस अधिनियम के तहत वर्जित है।
  3. 3. पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) भारत में पहली बार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विधיक रूप से वर्ष 1994 में अधिसूचित किया गया था, और इसके तहत किसी भी नई विकास परियोजना के निर्माण से पहले उसके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना अनिवार्य होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई है। NGT को दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य नहीं है; इसके बजाय यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है। कथन 2 गलत है: NGT अधिनियम, 2010 की धारा 22 के अनुसार, NGT के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध 90 दिनों की अवधि के भीतर सीधे 'सर्वोच्च न्यायालय' (Supreme Court) में अपील की जा सकती है, उच्च न्यायालयों में नहीं। हालांकि, NGT के आदेशों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधिकार क्षेत्र के संबंध में उच्च न्यायालयों द्वारा रिट याचिकाएँ (Writ Petitions) दायर करने पर बहस रही है, लेकिन वैधानिक अपील सीधे सुप्रीम कोर्ट में ही होती है। कथन 3 सही है: भारत में पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना पहली बार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) द्वारा वर्ष 1994 में जारी की गई थी, जिसके तहत विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) अनिवार्य की गई।
Share:

Related Questions

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 359' के अंतर्गत आपातकाल के दौरान भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों के निलंबन और इसके न्यायिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के दौरान, राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा अनुच्छेद 359 के तहत भाग III (मौलिक अधिकार) द्वारा प्रदत्त किसी भी अधिकार के प्रवर्तन के लिए किसी भी न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, किंतु इसमें अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है। 2. अनुच्छेद 359 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया कोई भी निलंबन आदेश पूरे भारत में या उसके किसी भाग में प्रवर्तनीय हो सकता है, और ऐसे आदेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष उसकी स्वीकृति के लिए रखना अनिवार्य होता है। 3. ऐतिहासिक 'ए.डी.एम. जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला (1976)' (हेबियस कॉर्पस मामला) में सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत के निर्णय को बाद में 'पुट्टास्वामी वाद (2017)' और अन्य विधายनों द्वारा खारिज कर दिया गया, जिसमें यह स्थापित किया गया कि आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' और 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत आपातकालीन प्रावधानों और राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल होने के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 355 संघ का यह कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और इस बात की गारंटी दे कि प्रत्येक राज्य की सरकार इस संविधान के उपबंधों के अनुसार ही चलाई जा रही है। 2. 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' के ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 356 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की घोषणा पूर्णतः субъекिव (Subjective) संतुष्टि पर आधारित होती है और इस पर किसी भी प्रकार की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) नहीं की जा सकती है। 3. अनुच्छेद 356 के तहत की गई उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और यदि इस अवधि के भीतर लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो यह उद्घोषणा नई लोकसभा के गठन के बाद उसकी पहली बैठक से 30 दिनों तक प्रवृत्त बनी रहती है, बशर्ते इस बीच राज्यसभा द्वारा इसका अनुमोदन पहले ही कर दिया गया हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? जलमंडल (Hydrosphere) में जल की कौन-कौन सी अवस्थाएं शामिल हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'रामसर अभीसमय' (Ramsar Convention) और भारत में 'आर्द्रभूमियों' (Wetlands) के संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रामसर अभीसमय, आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग (Wise Use) के लिए वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षरित एक अंतर-सरकारी संधि है, और भारत इस अभिसमय का एक पक्षकार देश है, जिसने इसे वर्ष 1982 में औपचारिक रूप से लागू किया था। 2. रामसर सूची में शामिल किसी आर्द्रभूमि को जब 'मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड' (Montreux Record) के अंतर्गत दर्ज किया जाता है, तो इसका तात्पर्य यह होता है कि उस आर्द्रभूमि में मानवीय हस्तक्षेप, प्रदूषण या अन्य पर्यावरणीय कारणों से पारिस्थितिकीय स्वरूप में परिवर्तन हुआ है, हो रहा है या होने की संभावना है। 3. 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2010' (Wetlands Rules) के प्रावधानों के अंतर्गत भारत में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और नियमन का संपूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण और संवितरण प्रत्यक्ष रूप से केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के पास होता है, और इसमें राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेशों की किसी भी प्रकार की वैधानिक भूमिका नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329-क) तथा निर्वाचन आयोग से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में मूल रूप से वर्ष 1950 में ही स्थापित किया गया था, जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य निर्वाचन आयुक्त शामिल थे। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है। 3. निर्वाचन आयोग को संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के संचालन के लिए राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा आवश्यक प्रशासनिक कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.