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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 330 से 342' तक लोकसभा में 'अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण' तथा 'राष्ट्रीय आयोगों' के संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण उस राज्य या निर्वाचन क्षेत्र में उनकी कुल जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय किया जाता है, और ये सीटें केवल उन्हीं वर्गों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होती हैं।
  2. 2. मूल संविधान में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी और एसटी के आरक्षण की अवधि 10 वर्ष (अर्थात वर्ष 1960 तक) के लिए निर्धारित की गई थी, जिसे समय-समय पर संवैधानिक संशोधनों द्वारा बढ़ाया गया है, और नवीनतम '104वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2019' द्वारा इसे बढ़ाकर वर्ष 2030 तक कर दिया गया है।
  3. 3. 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा अनुच्छेद 338 को विभाजित करके एक नया 'अनुच्छेद 338A' जोड़ा गया, जिसके तहत 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST) की स्थापना की गई, जो कि एक संवैधानिक निकाय है और इसके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 330 के तहत लोकसभा में और अनुच्छेद 332 के तहत राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रदान किया जाता है। कथन 2 सही है: मूल रूप से संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि आरक्षण की यह व्यवस्था लागू होने के 10 वर्षों के भीतर (अर्थात 1960 तक) समाप्त हो जाएगी, लेकिन संसद ने समय-समय पर (जैसे 95वें, 103वें और 104वें संशोधनों द्वारा) इसे आगे बढ़ाया है। हाल ही में '104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019' द्वारा इसे 25 जनवरी 2030 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। (साथ ही, इस संशोधन द्वारा आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदायों के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में मनोनयन के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया था)। कथन 3 सही है: 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से तत्कालीन 'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग' को दो अलग-अलग निकायों में विभाजित कर दिया गया—(i) अनुच्छेद 338 के तहत 'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग' (NCSC) और (ii) अनुच्छेद 338A के तहत 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST)। ये दोनों सांविधिक निकाय नहीं बल्कि पूर्ण संवैधानिक निकाय हैं, जिनके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। अतः तीनों कथन सही हैं।
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