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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' (National Green Tribunal Act, 2010) के प्रावधानों, शक्तियों और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) एक विशेष न्यायिक निकाय है जिसे पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के त्वरित निपटान के लिए स्थापित किया गया है, और यह अधिकरण भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के कड़े नियमों से बंधा हुआ नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है।
  2. 2. NGT अधिनियम के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि अधिकरण के समक्ष किसी भी पर्यावरण से जुड़े विवाद या आवेदन को उस कारण के उत्पन्न होने की तारीख से 'छह महीने' की अवधि के भीतर दायर किया जाना चाहिए, और किसी भी परिस्थिति में अधिकरण को इस समयावधि को आगे बढ़ाने की कोई कानूनी शक्ति प्राप्त नहीं है।
  3. 3. 'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986' के अंतर्गत आने वाले सभी सातों कानूनों को NGT के क्षेत्राधिकार की पहली अनुसूची (Schedule I) में शामिल किया गया है, किंतु 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers Act, 2006) और 'लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991' को इसके वैधानिक क्षेत्राधिकार से पूर्णतः बाहर रखा गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरण संबंधी मामलों के प्रभावी और तीव्र निपटान के लिए की गई थी। अधिनियम की धारा 19 के अनुसार, NGT भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तकनीकी नियमों से बाध्य नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) द्वारा संचालित होता है। कथन 2 गलत है: NGT अधिनियम की धारा 14 के अनुसार, अधिकरण के समक्ष आवेदन उस कारण के उत्पन्न होने या प्रथम बार प्रकट होने की तारीख से 'छह महीने' के भीतर दायर किया जाना चाहिए। हालांकि, अधिनियम अधिकरण को यह विवेकाधिकार देता है कि यदि वह इस बात से संतुष्ट है कि आवेदक पर्याप्त कारणों (Sufficient Cause) की वजह से निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन करने में असमर्थ था, तो वह इस अवधि को 'अधिकतम साठ दिनों' (यानी कुल 6 महीने + 60 दिन) की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकता है। इसलिए यह कहना गलत है कि समयावधि को किसी भी परिस्थिति में आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। कथन 3 गलत है: NGT अधिनियम, 2010 की अनुसूची I (Schedule I) में कुल सात केंद्रीय पर्यावरण कानूनों को शामिल किया गया है (जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल और वायु प्रदूषण निवारण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम आदि)। इसके अलावा, NGT अधिनियम की धारा 14 के अंतर्गत 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' (FRA) और 'लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991' से संबंधित मामलों को भी NGT के क्षेत्राधिकार के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है (जैसा कि मद्रास और अन्य उच्च न्यायालयों के निर्णयों में भी स्पष्ट किया गया है)। अतः कथन 3 का यह दावा कि वन अधिकार अधिनियम को बाहर रखा गया है, गलत है।
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