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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1942 में शुरू किए गए 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) और उससे जुड़ी घटनाओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बंबई के ग्वालियर टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव के पारित होने के तुरंत बाद, ब्रिटिश सरकार ने 'ऑपरेशन जीरो आवर' (Operation Zero Hour) के तहत कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर उन्हें देश के विभिन्न अज्ञात स्थानों पर नजरबंद कर दिया था।
- 2. इस आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों (Parallel Governments) की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया (उत्तर प्रदेश), तामलुक (बंगाल) और सतारा (महाराष्ट्र) प्रमुख थीं, और सतारा की 'प्रति सरकार' इन सभी में सबसे लंबे समय तक चलने वाली समानांतर सरकार थी।
- 3. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी को गिरफ्तार करके पुणे के आगा खान पैलेस में नजरबंद किया गया था, जहाँ उन्होंने ब्रिटिश दमन के विरोध में 21 दिनों का ऐतिहासिक उपवास रखा था, जिसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे लंबा उपवास माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 8 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालियर टैंक मैदान में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। इसके तुरंत बाद, 9 अगस्त की सुबह 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत ब्रिटिश प्रशासन ने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आजाद सहित सभी प्रमुख कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
कथन 2 सही है: भारत छोड़ो आंदोलन की एक प्रमुख विशेषता देश के विभिन्न क्षेत्रों में 'समानांतर सरकारों' (Parallel Governments) का उदय था। बलिया में चित्तू पाण्ड के नेतृत्व में, तामलुक (मिदनापुर) में 'जातीय सरकार' के रूप में, और सतारा (महाराष्ट्र) में वाई.बी. चौहान और नाना पाटिल के नेतृत्व में 'प्रति सरकार' स्थापित हुई, जो सतारा में सबसे लंबे समय (1945 तक) तक सक्रिय रही।
कथन 3 गलत है: आगा खान पैलेस में नजरबंदी के दौरान महात्मा गांधी ने वर्ष 1943 में 21 दिनों का उपवास (फास्ट) अवश्य रखा था, लेकिन यह उपवास ब्रिटिश दमन के विरोध में नहीं, बल्कि सरकार द्वारा उनके स्वास्थ्य और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के लिए गांधीजी पर लगाए गए झूठे आरोपों और उनके आत्मशुद्धिकरण के लिए था। इसके अलावा, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इससे भी लंबे उपवास अन्य नेताओं (जैसे जतिन दास द्वारा 63 दिनों का भूख हड़ताल) द्वारा किए गए थे।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX-ख' (सहकारी समितियां - अनुच्छेद 243-ZH से 243-ZT) तथा 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा संविधान के भाग III में मूल अधिकारों के अंतर्गत 'संगठन या संघ बनाने या सहकारी समितियां बनाने' के अधिकार को एक मौलिक अधिकार के रूप में जोड़ा गया (अनुच्छेद 19(1)(c))।
2. इस संशोधन के माध्यम से संविधान में एक नया नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 43-ख) जोड़ा गया, जिसके तहत राज्य को सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है।
3. वर्ष 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय ('यंग इंडिया बनाम भारत संघ' या सहकारी मामले में) में 97वें संविधान संशोधन के उन प्रावधानों को पूर्णतः असंवैधानिक घोषित कर दिया जो बहु-राज्य सहकारी समितियों (Multi-State Cooperative Societies) से संबंधित थे, क्योंकि इन्हें संसद द्वारा बिना राज्य विधानमंडलों के आधे से अधिक अनुसमर्थन के पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्यों की रक्षा करना संघ का कर्तव्य है, यह किस अनुच्छेद में लिखा है?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक बुनियादी आय' (Universal Basic Income - UBI) की अवधारणा और इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वभौमिक बुनियादी आय एक ऐसी सामाजिक कल्याणकारी अवधारणा है जिसमें बिना किसी पूर्व शर्त, कार्य की बाध्यता या साधन-परीक्षण (Means-testing) के, देश के प्रत्येक नागरिक को एक निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से नकद हस्तांतरण (Cash Transfer) प्रदान किया जाता है।
2. आर्थिक सर्वेक्षण (2016-17) में UBI को भारत में पारंपरिक लक्षित सब्सिडी प्रणालियों के एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें यह तर्क दिया गया था कि यह गरीबी उन्मूलन में अधिक प्रभावी हो सकता है और इससे लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) या उर्वरक सब्सिडी में होने वाले प्रशासनिक रिसाव (Leakage) को समाप्त किया जा सकता है।
3. UBI के समर्थकों का यह मुख्य दृष्टिकोण रहता है कि यह महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सौदेबाजी की शक्ति में सुधार करता है, किंतु आलोचकों का मानना है कि इसके कार्यान्वयन से श्रम आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव (Adverse Labour Supply Effects) पड़ सकता है और इसके कारण उत्पन्न होने वाला भारी राजकोषीय बोझ देश के स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे उत्पादक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP - Articles 36-51) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान निर्माताओं ने DPSP के विचार को आयरलैंड के संविधान से ग्रहण किया था, जिसने इसे स्पेन के संविधान से लिया था, तथा इन तत्वों को देश के शासन में मौलिक (Fundamental) माना गया है, जिसका अर्थ है कि देश के लिए कानून बनाते समय राज्य का यह कर्तव्य होगा कि वह इन सिद्धांतों को लागू करे।
2. हालांकि DPSP को न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Justiciable) नहीं बनाया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त 'जीवन के अधिकार' के दायरे को विस्तृत करने के लिए राज्य के नीति निर्देशक तत्वों को मौलिक अधिकारों के पूरक के रूप में पढ़ा जाना चाहिए और राज्य उन पर पूरी तरह उपेक्षा का रुख नहीं अपना सकता।
3. मूल संविधान में DPSP को चार स्पष्ट श्रेणियों या विचारधाराओं में विभाजित किया गया था, जिनमें समाजवादी (Socialist), गांधीवादी (Gandhian), उदार-बौद्धिक (Liberal-Intellectual) और न्यायिक (Judicial) सिद्धांत शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सुमेलित कीजिए: A-2 (जामा मस्जिद-शाहजहाँ), B-1 (सासाराम मकबरा-शेरशाह सूरी), C-3 (आगरा किला-अकबर), D-4 (पुराना किला-हुमायूँ/शेरशाह सूरी)।
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