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UPTET
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समावेशी कक्षा कक्ष (Inclusive Classroom) में अधिगम अक्षमता (Learning Disability) से ग्रसित विद्यार्थियों की पहचान और उनके सफल समावेशन हेतु निम्नलिखित में से कौन-सी रणनीतियाँ सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती हैं?
- 1. शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में बहुसंवेदी उपागम (Multi-sensory Approach) का प्रयोग करना, जिसमें दृश्य, श्रव्य और स्पर्शनीय सामग्रियों का एक साथ समावेश हो।
- 2. विद्यार्थियों के लिए मानकीकृत पाठ्यक्रम और एक ही प्रकार की कठोर मूल्यांकन विधियों को अनिवार्य रूप से लागू करना ताकि सभी का निष्पक्ष आकलन हो सके।
- 3. कक्षा में सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning) और पीयर ट्यूटरिंग (Peer Tutoring) को बढ़ावा देना, जिससे सामाजिक अन्तःक्रिया और आपसी सहयोग मजबूत हो।
- 4. अधिगम कार्यों को छोटे-छोटे और प्रबंधनीय चरणों (Scaffolding) में विभाजित करना तथा विद्यार्थियों को उनकी गति के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता देना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
समावेशी शिक्षा के अंतर्गत अधिगम अक्षमता (जैसे डिस्लेक्सिया, डिस्ग्राफिया आदि) से ग्रस्त विद्यार्थियों के लिए बहुसंवेदी उपागम, सहयोगात्मक अधिगम, पीयर ट्यूटरिंग और 'स्कैफोल्डिंग' जैसी लचीली रणनीतियाँ बेहद प्रभावी होती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि समावेशी शिक्षा में 'कठोर और मानकीकृत' पाठ्यक्रम के बजाय बाल-केन्द्रित, लचीले पाठ्यक्रम और विभेदित शिक्षण (Differentiated Instruction) पर बल दिया जाता है ताकि प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
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3. इस स्तर पर बच्चों की नैतिकता पूरी तरह से बाहरी दंड (Punishment) और पुरस्कार (Reward) की संभावनाओं या सामाजिक स्वीकृति प्राप्त करने की इच्छा द्वारा निर्देशित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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