जीन पियाजे
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage, लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में पाई जाने वाली 'जीववाद' (Animism) और 'अहंप्रभाव/अहंकेन्द्रिता' (Egocentrism) की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक सटीक और वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष) की दो प्रमुख विशेषताएं 'जीववाद' (Animism) और 'अहंकेन्द्रिता' (Egocentrism) हैं। जीववाद (Animism) का अर्थ है कि बच्चा निर्जीव वस्तुओं (जैसे खिलौने, गुड़िया, बादल आदि) को भी सजीव मानता है और सोचता है कि वे भी हमारी तरह महसूस करती हैं। वहीं, अहंकेन्द्रिता (Egocentrism) से तात्पर्य उस स्थिति से है जिसमें बालक यह मानता है कि हर व्यक्ति उसके अपने दृष्टिकोण, विचारों और अनुभवों को ही देख और महसूस कर रहा है, और वह दूसरों के दृष्टिकोण को समझने में असमर्थ होता है। अतः विकल्प 'अ' पूर्णतः सत्य है।
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning / Assimilation Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer)**—जिसे उस शैक्षणिक और पेडागोजिकल रणनीति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें शिक्षक नई विषय वस्तु या पाठ पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और ज्ञान के साथ नए आने वालेथ्यों को जोड़ने के लिए उच्च-स्तरीय, समावेशी और परिचयात्मक सामग्रियां प्रस्तुत करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा एकीकरण (Schema Integration), बोधगम्य निवेश (Comprehensible Input) और दीर्घकालिक अर्थपूर्ण स्मरण (Meaningful Retention) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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