BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
6 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एरिक्सन (Erik Erikson) के 'मनोसामाजिक विकास सिद्धांत' (Psychosocial Development Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पहचान बनाम भूमिका संभ्रम' (Identity vs. Role Confusion) की अवस्था—जिसके तहत किशोरावस्था (Adolescence) के दौरान युवा व्यक्ति अपने व्यक्तिगत मूल्यों, मान्यताओं, भविष्य के करियर, लैंगिक भूमिका और सामाजिक पहचान को स्थापित करने के लिए गंभीर आत्म-चिंतन और प्रयोग करता है, तथा अपनी स्वतंत्र अस्मिता की खोज करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-संकल्प (Self-Concept), आंतरिक स्थिरता और सकारात्मक आत्म-छवि के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास सिद्धांत के अनुसार, किशोरावस्था (लगभग 12 से 18 वर्ष) की मुख्य मनोवैज्ञानिक चुनौती 'पहचान बनाम भूमिका संभ्रम' (Identity vs. Role Confusion) है। इस अवस्था में किशोर अपनी व्यक्तिगत पहचान, मूल्यों और भविष्य के लक्ष्यों की तलाश करते हैं। यदि उन्हें अपने दृष्टिकोण को तलाशने की स्वतंत्रता मिलती है और शिक्षक या मार्गदर्शक एक सकारात्मक वातावरण प्रदान करते हैं, तो वे एक स्पष्ट और सुदृढ़ पहचान (Ego Identity) विकसित करते हैं। इसके विपरीत, समर्थन के अभाव में वे भूमिका संभ्रम का शिकार हो सकते हैं। अतः विकल्प (b) इस अवधारणा के वास्तविक मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक निहितार्थों को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित व्यक्तित्व की संरचनात्मक प्रणाली—(1) इड (Id), (2) ईगो (Ego), और (3) सुपरईगो (Superego)—तथा उनके द्वारा संचालित रक्षा तंत्रों (Defense Mechanisms) यथा 'युक्तिकरण' (Rationalization), 'दमन' (Repression), और 'उदात्तीकरण' (Sublimation) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तनाव प्रबंधन, नैतिक विकास, और भावनात्मक समायोजन के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्टवादियों (Gestalt Psychologists—जैसे वर्दीमर, कोहलर और कोफ्का) के 'अंतर्दृष्टि या सूझ के सिद्धांत' (Theory of Insightful Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अचानक संज्ञान' या 'अहा! अनुभव' (Aha! Experience / Sudden Cognitive Restructuring) की अवधारणा—जिसके तहत किसी समस्या का समाधान क्रमिक प्रयासों से न होकर संपूर्ण परिस्थिति के मानसिक पुनर्गठन (Mental Restructuring) द्वारा अचानक और अंतर्दृष्टिपूर्ण तरीके से प्राप्त होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के रचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान की समग्र समझ (Holistic Understanding), और अर्थपूर्ण अधिगम के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'स्पाइरल या चक्राकार पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum)**—जिसे उस उन्नत शैक्षणिक संरचना के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी भी कठिन विषय या जटिल संकल्पना को बच्चे के विकास के शुरुआती चरणों में उसके बौद्धिक स्तर के अनुकूल बहुत ही सरल, मूर्त और सहज रूप में प्रस्तुत किया जाता है, और जैसे-जैसे शिक्षार्थी की आयु, परिपक्वता और संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ती है, उसी विषय को उच्च कक्षाओं में अधिक गहरी, अमूर्त और विस्तृत जटिलता के साथ बार-बार (चक्राकार रूप में) पुनरावृत्ति करते हुए पढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संचयी ज्ञान-निर्माण, दीर्घकालिक स्मृति और तार्किक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम' (Discovery Learning) सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए शब्दों, भाषा, गणितीय प्रतीकों और अमूर्त संकेतों का उपयोग करना सीख जाता है, जो इनैक्टिव (क्रियात्मक) और आइकॉनिक (प्रतिबिम्बात्मक) अवस्थाओं से आगे की उच्च-स्तरीय मानसिक प्रक्रिया है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक अभिव्यक्ति और उन्नत संज्ञानात्मक संरचनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'असुरक्षित-प्रतिरोधी संलग्नता' (Insecure-Resistant Attachment / Ambivalent Attachment)** की अवधारणा—जिसके तहत शिशु अपनी देखभाल करने वाले (Primary Caregiver) के प्रति अत्यधिक चिपके रहने वाला व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, परंतु जब वह वापस लौटता है तो वे गुस्से, विरोध और सांत्वना पाने के बावजूद उसे अस्वीकार करने जैसे द्वंद्वपूर्ण (Ambivalent) और विरोधाभासी संवेगात्मक प्रतिक्रियाएं देते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन, विश्वास के संकट और कक्षा में सामाजिक-भावनात्मक समायोजन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.