त्वरित लिंक्स
MPTET
5 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम' (Discovery Learning) सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए शब्दों, भाषा, गणितीय प्रतीकों और अमूर्त संकेतों का उपयोग करना सीख जाता है, जो इनैक्टिव (क्रियात्मक) और आइकॉनिक (प्रतिबिम्बात्मक) अवस्थाओं से आगे की उच्च-स्तरीय मानसिक प्रक्रिया है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक अभिव्यक्ति और उन्नत संज्ञानात्मक संरचनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) विकास की अंतिम और सबसे परिपक्व अवस्था है, जिसमें बालक भाषा, शब्दों और अमूर्त प्रतीकों के माध्यम से संसार को समझते हैं और मानसिक रूप से समस्याओं का समाधान करते हैं। यह अवस्था मूर्त अनुभवों से ऊपर उठकर उच्च-स्तरीय अमूर्त चिंतन, तार्किक विश्लेषण और स्वायत्त ज्ञान-निर्माण के लिए वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिन्ह-प्रभुत्व अधिगम सिद्धांत' (Sign-Gestalt / Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संज्ञानात्मक मानचित्र या कॉग्निटिव मैप' (Cognitive Map)**—जिसे उस मानसिक प्रतिनिधित्व (Mental Representation) या आंतरिक स्कीमा के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से कोई जीव या शिक्षार्थी अपने भौतिक या सामाजिक पर्यावरण के स्थानिक लेआउट, मार्गों, लक्ष्यों और वैकल्पिक रास्तों का एक व्यापक मानसिक नक्शा अपने मस्तिष्क में स्वतः निर्मित कर लेता है, बिना किसी प्रत्यक्ष या बाहरी पुरस्कार (Reward) के—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक चिंतन, स्थानिक अभिविन्यास और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन फ्लैवेल (John Flavell) के 'संज्ञानात्मक मनोविज्ञान और metacognition' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मेटाकॉग्निशन या अधिविज्ञान' (Metacognition)**—जिसे उस उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिक्षार्थी अपने स्वयं के ज्ञान, चिंतन प्रक्रियाओं, अधिगम रणनीतियों और मानसिक गतिविधियों के बारे में न केवल जागरूक रहता है, बल्कि उनका सक्रिय रूप से निरीक्षण (Monitoring), नियंत्रण (Regulation) और मूल्यांकन भी करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमित अधिगम (Self-regulated Learning), आलोचनात्मक चिंतन और स्वतंत्र समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवधारणा—**'अग्रगामी संगठक' (Advance Organizer)**—जिसके तहत मुख्य शिक्षण सामग्री या नए पाठ को प्रस्तुत करने से पहले एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और अमूर्त शिक्षण सामग्री या परिचय प्रस्तुत किया जाता है, जो शिक्षार्थी के पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) और नवीन सूचनाओं के बीच एक संज्ञानात्मक सेतु का कार्य करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा (Schema) के सुदृढ़ीकरण, तार्किक संप्रत्ययीकरण और सार्थक संज्ञानात्मक संरचना (Cognitive Structure) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत उत्तर-पारंपरिक नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality) के दूसरे चरण—अर्थात् 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा का अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation / Stage 6)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव, कानून या दंड के भय से परे जाकर अपने स्व-चयित आंतरिक सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, समानता और मानवीय गरिमा) के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे नियम सामाजिक कानूनों के विपरीत क्यों न हों—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय नैतिक विवेक, तार्किक स्वायत्तता और मूल्य-आधारित चरित्र निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंध सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'रूप देना या शेपिंग' (Shaping)**—जिसे उस क्रमिक सन्निकटन (Successive Approximations) की जटिल व्यवहारवादी तकनीक के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से किसी जीव या शिक्षार्थी द्वारा एक वांछित और जटिल नवीन अंतिम व्यवहार को तब तक छोटे-छोटे क्रमिक चरणों में सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) प्रदान करके स्थापित किया जाता है जब तक कि वह पूर्ण और जटिल अनुक्रिया को पूरी तरह से सीख नहीं लेता—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशलों के विकास, सकारात्मक व्यवहार-परिवर्तन और अनुशासित अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.