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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन फ्लैवेल (John Flavell) के 'संज्ञानात्मक मनोविज्ञान और metacognition' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मेटाकॉग्निशन या अधिविज्ञान' (Metacognition)**—जिसे उस उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिक्षार्थी अपने स्वयं के ज्ञान, चिंतन प्रक्रियाओं, अधिगम रणनीतियों और मानसिक गतिविधियों के बारे में न केवल जागरूक रहता है, बल्कि उनका सक्रिय रूप से निरीक्षण (Monitoring), नियंत्रण (Regulation) और मूल्यांकन भी करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमित अधिगम (Self-regulated Learning), आलोचनात्मक चिंतन और स्वतंत्र समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से 'मेटाकॉग्निशन' (अधिविज्ञान) बाल विकास और संज्ञानात्मक मनोविज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधुनिक संप्रत्यय है। जॉन फ्लैवेल द्वारा प्रतिपादित इस अवधारणा का अर्थ है—'ज्ञान के बारे में ज्ञान' या 'अपने ही चिंतन के बारे में चिंतन'। विकल्प (b) सबसे अधिक वैज्ञानिक और प्रामाणिक है क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि अधिविज्ञान शिक्षार्थी को अपने संज्ञानात्मक प्रक्रमों (जैसे समझना, याद रखना, समस्या हल करना) की निगरानी और नियंत्रण करने की क्षमता प्रदान करता है। जब बच्चा यह जानता है कि वह क्या जानता है और क्या नहीं जानता, तो वह अपनी गलत रणनीतियों को पहचानकर उन्हें संशोधित कर सकता है, जो 'स्व-नियमित अधिगम' (Self-regulated Learning) का मूल आधार है। अन्य विकल्प तथ्यात्मक रूप से भ्रामक और मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के विपरीत हैं।
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