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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत उत्तर-पारंपरिक नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality) के दूसरे चरण—अर्थात् 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा का अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation / Stage 6)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव, कानून या दंड के भय से परे जाकर अपने स्व-चयित आंतरिक सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, समानता और मानवीय गरिमा) के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे नियम सामाजिक कानूनों के विपरीत क्यों न हों—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय नैतिक विवेक, तार्किक स्वायत्तता और मूल्य-आधारित चरित्र निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा का अभिविन्यास' (Stage 6) उत्तर-पारंपरिक स्तर का सर्वोच्च चरण है। इस चरण में व्यक्ति बाहरी सामाजिक कानूनों, नियमों या प्राधिकरण की परवाह किए बिना अपने स्वयं के अंतःकरण और सार्वभौमिक न्याय के सिद्धांतों (जैसे मानव जीवन की गरिमा, समानता और मानवाधिकार) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है। यह आंतरिक अभिप्रेरणा, वैचारिक स्वायत्तता और उच्चतम नैतिक परिपक्वता को दर्शाता है, जो बच्चों में मूल्य-आधारित शिक्षा और चरित्र निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय आयाम—**'स्थानिक बुद्धि' (Spatial Intelligence)**—जिसे दृश्य-स्थानिक दुनिया को सटीक रूप से देखने, मानसिक रूप से उसका परिवर्तन करने, स्थानिक रूपों की कल्पना करने और त्रिविम (3D) संबंधों को समझने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक मानचित्रण (Spatial Mapping), ज्यामितीय बोध, वास्तुकलात्मक कल्पना और दृश्य-श्रव्य अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मंटेल और रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) के 'त्रैतांत्रिक बुद्धि सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence) के अंतर्गत प्रतिपादित तीन प्रमुख घटकों—(1) घटकीय/विश्लेषणात्मक बुद्धि (Componential/Analytical Intelligence), (2) आनुभविक/सृजनात्मक बुद्धि (Experiential/Creative Intelligence), और (3) संदभर्शकीय/व्यावहारिक बुद्धि (Contextual/Practical Intelligence 또는 'Street Smartness')—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के 'व्यावहारिक अनुकूलन' (Practical Adaptation), पर्यावरण के चयन (Selection) तथा अपनी बुद्धि के सफल अनुप्रयोग के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक-संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांत' (Social Cognitive Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभावीकारिता या सेल्फ-एफ़िकेसी' (Self-Efficacy)**—जिसे उस व्यक्तिगत विश्वास या मनोवैज्ञानिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति किसी विशिष्ट परिस्थिति में सफलता प्राप्त करने, अपने कार्यों को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और अपने जीवन को प्रभावित करने वाली घटनाओं पर नियंत्रण रखने की अपनी क्षमता का स्वयं आकलन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिप्रेरण, लक्ष्य-निर्धारण और दृढ़ता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित 'मूर्त अनुभव' (Concrete Experience) से लेकर 'विचारशील प्रेक्षण' (Reflective Observation), 'मूर्त संकल्पनाकरण' (Abstract Conceptualization) और अंततः 'सक्रिय प्रयोग' (Active Experimentation) तक की प्रक्रिया में, 'मूर्त संकल्पनाकरण' (Abstract Conceptualization) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने अनुभवों और प्रेक्षणों का विश्लेषण करके वैचारिक सिद्धांतों, सामान्यीकरणों (Generalizations) और तार्किक मॉडलों का निर्माण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सैद्धांतिक ज्ञानार्जन, संज्ञानात्मक एकीकरण और वैचारिक स्पष्टता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी शिक्षण सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सुगमकर्ता या फैसिलिटेटर के रूप में शिक्षक' (Teacher as a Facilitator)**—जिसे उस लोकतांत्रिक और सहानुभूतिपूर्ण शैक्षणिक भूमिका के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षक कक्षा में ज्ञान थोपने वाले या सत्तावादी नियंत्रक के रूप में कार्य करने के बजाय एक ऐसे मार्गदर्शक, सहायक और सुरक्षित मनोवैज्ञानिक वातावरण के प्रस्तोता की भूमिका निभाता है जो शिक्षार्थी की आंतरिक जिज्ञासा, स्वायत्तता और आत्म-निर्देशित अधिगम (Self-Directed Learning) को स्वाभाविक रूप से पोषित और प्रोत्साहित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के भावनात्मक संवर्धन, सार्थक अनुभवात्मक ज्ञान और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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