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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिक मैक्स वर्दिमियर (Max Wertheimer), कोहका (Koffka) और कोहलर (Köhler) के 'सूझ या अंतर्दृष्टि का अधिगम सिद्धांत' (Insight Learning Theory / Gestalt Psychology) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अचानक संज्ञान या प्रकाश जैसी अंतर्दृष्टि' (Aha! Experience / Insight) की अवधारणा—जिसके तहत प्राणी किसी समस्याग्रस्त परिस्थिति के किसी एक हिस्से को देखने के बजाय पूरी परिस्थिति (Gestalt) का समग्र रूप से (Holistic perception) प्रत्यक्षीकरण करता है और अचानक बिना किसी यांत्रिक प्रयास के मानसिक पुनर्गठन (Mental Restructuring) द्वारा समस्या का तार्किक समाधान खोज लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के रचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान और समग्र बोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (Gestalt Psychology) के अनुसार 'सूझ या अंतर्दृष्टि' (Insight) का सिद्धांत थार्नडाइक के प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत के बिल्कुल विपरीत है। इसके अंतर्गत वर्दिमियर, कोहलर और कोफ्का ने यह सिद्ध किया कि जब छात्र किसी समस्या को टुकड़ों में देखने के बजाय उसे उसके 'समग्र रूप' (Gestalt) में देखता है, तो उसके मस्तिष्क में एक तार्किक पुनर्गठन (Mental Restructuring) होता है और 'Aha! Experience' (अचानक समाधान का बोध) होता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह दृष्टिकोण रटने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करता है और विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, तार्किक विश्लेषण और रचनात्मक समस्या-समाधान (Problem-solving) कौशल को बढ़ावा देता है।
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