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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' (Learning Disabilities and Children with Special Needs) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'डिसग्राफिया' (Dysgraphia) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'सुपीरियर पैराइटल लोब' (Superior Parietal Lobe), 'एक्समूर मोटर कॉर्टेक्स' (Exner's Area in Motor Cortex), और 'सेरिबेलम' (Cerebellum) के बीच ग्राफिमेटिक मोटर प्लानिंग (Graphemic Motor Planning) विफलता, सूक्ष्म गत्यात्मक समन्वय (Fine Motor Coordination) क्षरण, और दृश्य-स्थानिक कार्यशील स्मृति की सक्रियण गतिकी, तथा वर्जीनिया बर्जर (Virginia Berninger) के 'वर्किंग मेमोरी मॉडल फॉर हैंडराइटिंग एंड स्पेलिंग' (Working Memory Model for Handwriting and Spelling) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिसग्राफिया ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Dysgraphia Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में कीबोर्ड और वॉइस-टू-टेक्स्ट तकनीक का उपयोग, ग्रिड आधारित लेखन अभ्यास व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डिसग्राफिया (Dysgraphia) एक न्यूरोलॉजिकल अधिगम अक्षमता है जो मुख्य रूप से लेखन क्षमता, मोटर प्लानिंग और वर्तनी को प्रभावित करती है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, इसमें मस्तिष्क के 'एक्समूर मोटर क्षेत्र' (Exner's Area), 'सुपीरियर पैराइटल लोब' और 'सेरिबेलम' के बीच दृश्य-स्थानिक और गत्यात्मक सूचनाओं के समन्वय में बाधा आती है। वर्जीनिया बर्जर (Virginia Berninger) का 'वर्किंग मेमोरी मॉडल फॉर हैंडराइटिंग एंड स्पेलिंग' यह स्पष्ट करता है कि कैसे कार्यशील स्मृति और मोटर निष्पादन आपस में जुड़े हुए हैं। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में 'न्यूरो-डिसग्राफिया ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' के तहत ग्रिड पेपर, कीबोर्ड, वॉइस-टू-टेक्स्ट तकनीक और बहुसंवेदी ग्रिड का उपयोग करके विद्यार्थियों की इस कठिनाई को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकता है। अतः विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'प्रेरणा और अभिप्रेरणा (Motivation)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs: शारीरिक सुरक्षा से लेकर आत्म-सिद्धि तक) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हाइपोग्लॉसस/हाइपोथैलेमस' (Hypothalamus), 'वेंट्रल स्ट्रिएटम' (Ventral Striatum), और 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच होमियोस्टेटिक विनियमन, आंतरिक/बाह्य प्रेरणा एकीकरण (Intrinsic/Extrinsic Motivation Integration), और लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार (Goal-Directed Behavior) की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डेसी (Edward Deci) और रिचर्ड रायन (Richard Ryan) के 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory: स्वायत्तता, सक्षमता और संबद्धता) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मोटिवेशनल-ड्रिवेन ह्यूमैनिस्टिक पेडागोजी (Motivational-Driven Humanistic Pedagogy) और विद्यार्थियों में आंतरिक अभिप्रेरणा, भावनात्मक कल्याण व समग्र शैक्षणिक सहभागिता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास एक निरंतर प्रक्रिया न होकर चरणों में होने वाली क्रमिक और गुणात्मक रूप से भिन्न प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक बालक अपने परिवेश के साथ अंतःक्रिया करके अपने ज्ञान का निर्माण स्वयं करता है।
2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation), 'वर्गीकरण' (Classification), और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता विकसित हो जाती है, किंतु वे अमूर्त या काल्पनिक तर्कों पर आधारित समस्याओं को हल करने में असमर्थ होते हैं।
3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) इस सिद्धांत की अंतिम अवस्था है, जिसमें किशोरावस्था से प्रारंभ होकर 'निगमनात्मक तर्क' (Deductive Reasoning) और 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन' (Hypothetico-Deductive Reasoning) की क्षमता पूरी तरह से विकसित हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'पारिस्थितिक अनुक्रमण' (Ecological Succession) और 'क्लाइमैक्स कम्युनिटी' (Climax Community) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक अनुक्रमण (Primary Succession) उस नग्न क्षेत्र (Bare Area) में प्रारंभ होता है जहाँ पहले कभी कोई जीव समुदाय नहीं था, जैसे कि नवनिर्मित लावा, ठंडी चट्टानें या रेत के टीले, और इस प्रकार के अनुक्रमण की शुरुआती प्रक्रिया में सबसे पहले 'पायनियर स्पीशीज' (Pioneer Species) के रूप में लाइकेन (Lichen) या मॉस का विकास होता है।
2. द्वितीयक अनुक्रमण (Secondary Succession) उस क्षेत्र में शुरू होता है जहाँ पहले से ही जीवन मौजूद था, लेकिन किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे जंगल की आग, बाढ़) या मानवीय हस्तक्षेप (जैसे वनों की कटाई) के कारण वह नष्ट हो गया हो, और यह प्राथमिक अनुक्रमण की तुलना में बहुत धीमी गति से आगे बढ़ता है क्योंकि इसमें मृदा के निर्माण में लंबा समय लगता है।
3. अनुक्रमण की अंतिम अवस्था में बनने वाला समुदाय 'क्लाइमैक्स कम्युनिटी' (चरम समुदाय) कहलाता है, जो पर्यावरण के साथ पूर्ण संतुलन में होता है और जब तक कोई बड़ी पर्यावरणीय बाधा न आए, तब तक यह स्थिर और अपरिवर्तित रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक निकोलस हब्स (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित और विशेष शिक्षा से जुड़े 'प्रोजेक्ट्री मॉडल' या 'एकोलॉजिकल मॉडल' (Ecological Model / Project Re-Ed) की मूल अवधारणा के अनुसार, बालकों में behavioral and emotional disorders के उपचार हेतु सबसे अधिक बल किस पर दिया जाता है?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) शिक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र के संदर्भ में, 'जैव विविधता के पिरामिड' (Pyramid of Biodiversity) तथा 'ऊर्जा के पिरामिड' में निम्नलिखित में से कौन सा मूलभूत अंतर सर्वाधिक सटीक है, जो यह स्पष्ट करता है कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा (Inverted) क्यों होता है?
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