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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास एवं संज्ञानात्मक विकास' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory: संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त-संक्रियात्मक, और औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्थाएं) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus), 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), और 'पैरिएटल कॉर्टेक्स' (Parietal Cortex) के बीच स्कीमा निर्माण (Schema Formation), वस्तु स्थायित्व (Object Permanence), और अमूर्त तार्किक प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा कार्ल विट्टे (Karl Witte) और लेव वाइगोत्स्की के परिप्रेक्ष्य के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, कॉग्निटिव-ओरिएंटेड कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Cognitive-Oriented Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में तार्किक विसंगति संतुलन (Equilibration), स्व-निर्देशित ज्ञान निर्माण व समग्र संज्ञानात्मक परिपक्वता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बच्चे अपनी आयु और न्यूरोलॉजिकल परिपक्वता के साथ चरणों से गुजरते हैं। संवेदी-गामक अवस्था (Sensory-Motor Stage) में 'वस्तु स्थायित्व' का विकास हिप्पोकैम्पस और संबंधित स्मृति प्रणालियों के विकास से जुड़ा होता है। मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में पैरिएटल कॉर्टेक्स और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का परस्पर समन्वय संरक्षण (Conservation) और तार्किक वर्गीकरण को सक्षम बनाता है। समावेशी शिक्षा में, यह न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण शिक्षकों को बच्चों की विकासात्मक अवस्था के अनुसार मूर्त से अमूर्त शिक्षण पद्धतियां (Constructivist Pedagogy) अपनाने में मदद करता है।
Related Questions
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy - DPSP) के दार्शनिक संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन इस बात को सर्वाधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है कि DPSP भारतीय संविधान के निर्माताओं के लिए सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र का एक घोषणापत्र क्यों है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं कृषि जलवायु प्रदेशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश राज्य को कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) के आधार पर कुल 9 प्रमुख जोनों में विभाजित किया गया है, जो राज्य की विभिन्न मिट्टी, वर्षा और तापमान की भिन्नताओं को दर्शाते हैं।
2. उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक क्षेत्रफल पर पाई जाने वाली मिट्टी 'जलाढ़ या जलोढ़' (Alluvial Soil) है, जिसे स्थानीय भाषा में 'कब्बर' और 'मार' के नाम से भी जाना जाता है।
3. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' और 'काटन' (Black Cotton Soil) प्रकार की मिट्टियाँ मुख्य रूप से कपास और चना के उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धिमत्ता के बहुआयामी सिद्धांतों (Multidimensional Theories of Intelligence)' के संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) द्वारा प्रतिपादित 'बहुबुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत 'संगीतकीय बुद्धिमत्ता' (Musical Intelligence) और 'शारीरिक-संवेदी बुद्धिमत्ता' (Bodily-Kinesthetic Intelligence) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'सुपीरियर टेम्पोरल गाइरस' (Superior Temporal Gyrus - STG), 'सेरिबेलम' (Cerebellum) और 'मोटर कॉर्टेक्स' (Motor Cortex) के बीच श्रवण प्रसंस्करण, लेयबद्ध एकीकरण और सूक्ष्म-पेशीय समन्वय (Fine-motor coordination) की सक्रियण गतिकी, तथा डैनियल गोलमैन (Daniel Goleman) द्वारा प्रतिपादित 'संवेगात्मक बुद्धि सिद्धांत' (Emotional Intelligence Theory: आत्म-जागरूकता, स्व-प्रबंधन, सामाजिक जागरूकता और संबंध प्रबंधन) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, बहुसंवेदी कला-एकीकृत शिक्षाशास्त्र (Arts-integrated Pedagogy) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक नियमन, अंतर-वैयक्तिक समन्वय व समग्र कौशल विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के अंतर्दृष्टि या सूझ के सिद्धांत' (Insight Learning Theory) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, कॉहलर (Wolfgang Köhler) द्वारा प्रतिपादित 'गेस्टाल्ट अधिगम' (Gestalt Learning) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), 'इन्फीरियर टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Inferior Temporal Cortex) और 'पूर्व-ललाट पालि' (Prefrontal Cortex) के बीच समग्र मैपिंग, समस्या के अवयवों के पुनर्गठन और 'अहा! अनुभव' (Aha! Moment) की सक्रियण गतिकी, तथा कर्ट कोफ्का (Kurt Koffka) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक क्षेत्र और संगठन के नियमों' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान और खोज-आधारित शिक्षाशास्त्र (Discovery-Based Pedagogy) और विद्यार्थियों में अमूर्त चिंतन, तार्किक पुनर्गठन व समग्र संज्ञानात्मक अंतर्दृष्टि के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. इस चरण में व्यक्ति का यह मानना होता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते या अनुबंध का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसे बदला जा सकता है।
2. इस स्तर पर नैतिकता पूरी तरह से बाहरी दंड, पुरस्कार या सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह पर आधारित होती है, जहाँ व्यक्ति केवल इसलिए नियमों का पालन करता है ताकि वह कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों की नजर में अच्छा बन सके।
3. यह चरण कोहलबर्ग के सिद्धांत के स्तर-III (Level III) के अंतर्गत आता है, जो सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) से ठीक पहले की अवस्था है, और इसमें वैधानिक कानूनों की तुलना में सामाजिक न्याय एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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