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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'स्मृति और विस्मरण (Memory and Forgetting)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हरमन एबिंगहॉस (Hermann Ebbinghaus) द्वारा प्रतिपादित 'विस्मरण वक्र' (Forgetting Curve) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus), 'अमिकडाला' (Amygdala), और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच सिनैप्टिक समेकन (Synaptic Consolidation), दीर्घकालिक प्रवर्धन (Long-Term Potentiation - LTP), और पुनर्प्राप्ति विफलता (Retrieval Failure) की सक्रियण गतिकी, तथा रिचर्ड एटकिंसन (Richard Atkinson) और रिचर्ड शिफ्रिन (Richard Shiffrin) के 'सूचना प्रक्रमण मॉडल' (Information Processing Model: संवेदी स्मृति, कार्यशील स्मृति और दीर्घकालिक स्मृति) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मेमोरी-ऑप्टिमाइज़्ड पेडागोजी (Memory-Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सूचना प्रतिधारण (Retention), संज्ञानात्मक दक्षता व समग्र स्मरण शक्ति के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यह प्रश्न 'स्मृति और विस्मरण' के न्यूरो-संज्ञानात्मक और मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों (एबिंगहॉस का विस्मरण वक्र और एटकिंसन-शिफ्रिन का सूचना प्रक्रमण मॉडल) पर आधारित है। हिप्पोकैम्पस मस्तिष्क की वह संरचना है जो अल्पकालिक स्मृतियों को दीर्घकालिक स्मृति में समेकित (Consolidate) करती है, जिसमें 'लॉन्ग-टर्म पोटेंशिएशन' (LTP) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हरमन एबिंगहॉस के अनुसार, अधिगम के तुरंत बाद विस्मरण की दर सबसे तीव्र होती है, जिसे बार-बार अभ्यास (Spaced Repetition) द्वारा रोका जा सकता है। एटकिंसन और शिफ्रिन का मॉडल (Sensory, Working, and Long-Term Memory) यह स्पष्ट करता है कि कैसे सूचनाएं विभिन्न चरणों से गुजरती हैं। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में इन न्यूरो-साइंटिफिक और संज्ञानात्मक सिद्धांतों का उपयोग करके शिक्षक 'स्पेसड लर्निंग' और 'मल्टीसेंसरी अप्रोच' जैसी रणनीतियों के माध्यम से विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति और दीर्घकालिक ज्ञान संधारण को बढ़ा सकते हैं। अतः विकल्प (b) पूर्णतः सही और वैज्ञानिक रूप से सटीक है।
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उत्तर प्रदेश के शास्त्रीय नृत्यों, लोक नृत्यों और संगीत घरानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कथक' (Kathak) उत्तर प्रदेश का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य है, जिसका उद्गम प्राचीन काल की कथा-वाचक परंपरा से माना जाता है, तथा इस नृत्य शैली के विकास में लखनऊ घराना और वाराणसी घराना अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
2. 'ख्याल गायकी' और 'ठुमरी' के प्रसिद्ध विकास के लिए जाने जाने वाले 'किराना घराना' का संबंध उत्तर प्रदेश के शामली जिले से है, जिसकी स्थापना मौहिद्दीन ख़ाँ और बन्दे अली ख़ाँ द्वारा की गई थी।
3. 'चरकुला नृत्य' उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र का एक प्रसिद्ध घड़ा नृत्य है, जिसमें महिलाएँ अपने सिर पर कई दीपकों से भरा हुआ रथ या पहिया (चक्र) रखकर राधा-कृष्ण की भक्ति में नृत्य करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में मनाए जाने वाले प्रसिद्ध लोकनृत्य 'छोलिया' (Chholia) या अन्य युद्ध कला से जुड़े नृत्यों की श्रेणी में, विशेष रूप से 'कहाँ' और किस अवसर पर तलवार और ढाल के साथ प्रदर्शन किया जाता है?
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक और विधायी ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश विधानसभा (Uttar Pradesh Legislative Assembly) में कुल सदस्यों की संख्या 403 निर्वाचित और 1 आंग्ल-भारतीय (एंग्लो-इंडियन) मनोनीत सदस्य मिलाकर कुल 404 हुआ करती थी, किंतु 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 के द्वारा लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए सीटों के मनोनयन के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
2. उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जो प्रशासनिक सुविधा के लिए 18 मंडलों में विभाजित किए गए हैं, और इनमें सबसे बड़ा मंडल क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से 'कानपुर' मंडल है, जबकि सबसे छोटा मंडल 'सहारनपुर' है।
3. राज्य में विधान परिषद के गठन का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत आता है, जिसके अनुसार संसद विधि द्वारा किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है यदि संबंधित राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से ऐसा संकल्प पारित कर दे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा यानी यह समझ कि किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है, किस विकासात्मक अवस्था की मुख्य विशेषता है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार 'संरक्षण' (Conservation) का तात्पर्य यह समझने की क्षमता से है कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार या रूप में परिवर्तन होने पर भी उसका द्रव्यमान, भार, आयतन या संख्या अपरिवर्तित रहती है, और यह क्षमता बच्चों में औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) में ही पहली बार विकसित होती है।
2. 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-deductive Reasoning) की क्षमता का पूर्ण विकास पियाजे के सिद्धांत की अंतिम अवस्था यानी 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता) के दौरान होता है, जहाँ किशोर बिना किसी ठोस या मूर्त सहारे के केवल प्रतीकों और प्रस्तावों के आधार पर समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।
3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों की यह विशेषता है कि ये सभी संस्कृतियों और समाजों में एक निश्चित और सार्वभौमिक क्रम में आगे बढ़ते हैं, अर्थात् कोई भी बच्चा किसी पूर्ववर्ती चरण को छोड़े बिना क्रमबद्ध रूप से ही अगली अवस्था में प्रवेश करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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