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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के त्रिआयामी सिद्धांत' (Structure of Intellect Model) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जे.पी. गुइफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'संक्रियाएँ, विषयवस्तु और उत्पाद' (Operations, Contents, and Products) के त्रि-आयामी वर्गीकरण के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), 'इंफीरियर टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Inferior Temporal Cortex) और 'डॉर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex) के बीच संवेदी सूचना प्रसंस्करण, प्रतीकात्मक रूपांतरण और अमूर्त तार्किक उत्पादन की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) द्वारा प्रतिपादित 'त्रितंत्र बुद्धि सिद्धांत' (Triarchic Theory: घटकीय, अनुभवात्मक और सांदर्भिक बुद्धि) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान और संज्ञानात्मक संवर्धन शिक्षाशास्त्र (Cognitive Enhancement Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुआयामी बौद्धिक क्षमताओं, विश्लेषणात्मक व व्यावहारिक कौशल के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

जे.पी. गुइफोर्ड के त्रिआयामी मॉडल (Structure of Intellect) और रॉबर्ट स्टर्नबर्ग के त्रितंत्र बुद्धि सिद्धांत का न्यूरो-संज्ञानात्मक विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्र (जैसे प्रीफ्रंटल, पैरिएटल और टेम्पोरल कॉर्टेक्स) मिलकर बौद्धिक संक्रियाओं, विषयवस्तु और उत्पादों का प्रसंस्करण करते हैं। यह दृष्टिकोण आधुनिक समावेशी कक्षाओं में विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि के विकास के साथ-साथ उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक कौशल और समस्या-समाधान क्षमताओं को बढ़ाने में अत्यधिक सहायक है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence) और सामाजिक-संज्ञानात्मक विकास के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, डेनियल गोलमैन (Daniel Goleman) द्वारा प्रतिपादित 'भावनात्मक बुद्धि के पाँच घटकों'—'आत्म-जागरूकता' (Self-Awareness), 'आत्म-नियमन' (Self-Regulation), 'प्रेरणा' (Motivation), 'सहानुभूति' (Empathy), और 'सामाजिक कौशल' (Social Skills)—के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'एपिडर्मल लिम्बिक सिस्टम', 'एमिग्डाला' (Amygdala) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) के बीच भावनात्मक आवेगों के नियंत्रण और संज्ञानात्मक मूल्यांकन की सक्रियण गतिकी, तथा जॉन मेयर (John Mayer) और पीटर सालोवे (Peter Salovey) के 'भावनात्मक बुद्धि मॉडल' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सकारात्मक सहकर्मी संबंधों और विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य व तादात्म्य के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Socio-cultural Theory of Development) और संज्ञानात्मक विकास की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वाइगोत्स्की के अनुसार बालक का संज्ञानात्मक विकास मुख्य रूप से जैविक परिपक्वता और स्वतंत्र अन्वेषण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक अंतःक्रिया (Social Interaction), संस्कृति (Culture) और भाषा (Language) के आपसी तालमेल से होता है। 2. 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) उस वास्तविक विकास स्तर और संभावित विकास स्तर के बीच का अंतर है, जिसे बालक किसी वयस्क या अधिक ज्ञानी अन्य (More Knowledgeable Other - MKO) के निर्देशन या सहयोग से प्राप्त कर सकता है। 3. 'मचान' या 'पाड़' (Scaffolding) उस स्थायी और अपरिवर्तनीय जैविक समर्थन को कहा जाता है जो आनुवंशिक रूप से माता-पिता द्वारा बच्चों को उनकी किशोरावस्था के दौरान प्रदान किया जाता है ताकि वे स्वतंत्र रूप से जटिल समस्याओं को हल कर सकें। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. इस चरण में व्यक्ति का यह मानना होता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते या अनुबंध का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसे बदला जा सकता है। 2. इस स्तर पर नैतिकता पूरी तरह से बाहरी दंड, पुरस्कार या सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह पर आधारित होती है, जहाँ व्यक्ति केवल इसलिए नियमों का पालन करता है ताकि वह कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों की नजर में अच्छा बन सके। 3. यह चरण कोहलबर्ग के सिद्धांत के स्तर-III (Level III) के अंतर्गत आता है, जो सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) से ठीक पहले की अवस्था है, और इसमें वैधानिक कानूनों की तुलना में सामाजिक न्याय एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास एवं उत्तर प्रदेश के पुरातत्व के संदर्भ में, राज्य के किस जनपद में स्थित 'ल्हौरादेव' (Lahuradeva) पुरास्थल से भारतीय उपमहाद्वीप में चावल (धान) के प्राचीनतम साक्ष्य (लगभग 8000 ईसा पूर्व से 9000 ईसा पूर्व) प्राप्त हुए हैं? उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक, पुरातात्विक स्थलों और सिंधु घाटी सभ्यता या महाजनपद काल से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हिंडन नदी के तट पर स्थित 'आलमगीरपुर' सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे पूर्वी पुरास्थल है, जिसकी खोज वाई.एम. शर्मा द्वारा की गई थी और यहाँ से कपास के खेती के साक्ष्य तथा टूटी हुई मृदभांड संस्कृतियाँ मिली हैं। 2. 'मृदभांड' (Pottery) के संदर्भ में उत्तर प्रदेश का हस्तिनापुर और अछछत्र क्षेत्र 'गेरुआ वर्णी मृदभांड संस्कृति' (Ochre Coloured Pottery - OCP) तथा 'चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति' (Painted Grey Ware - PGW) का एक प्रमुख केंद्र रहा है। 3. बौद्ध धर्म से जुड़े प्राचीन स्थल 'कौशाम्बी' और 'श्रावस्ती' दोनों ही स्थल प्राचीन काल में क्रमशः मल्ल और चेदि महाजनपदों की राजधानियाँ हुआ करती थीं, जहाँ सम्राट अशोक ने अपने अभिलेख खुदवाए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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