रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत
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'अधिगम की शैलियाँ (Learning Styles) और कॉग्निटिव न्यूरोसांस' के संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) द्वारा प्रतिपादित 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के चार चरणों—'कंक्रीट एक्सपीरियंस' (Concrete Experience), 'रिफ्लेक्टिव ऑब्जर्वेशन' (Reflective Observation), 'एब्स्ट्रैक्ट कांसेप्चुलाइजेशन' (Abstract Conceptualization), और 'एक्टिव एक्सपेरिमेंटेशन' (Active Experimentation)—के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'संवेदी कॉर्टेक्स' (Sensory Cortex), 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus), 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), और 'मोटर कॉर्टेक्स' के बीच संवेदी सूचना एकीकरण, वैचारिक संश्लेषण और मोटर निष्पादन की सक्रियण गतिकी, तथा पीटर हनी (Peter Honey) और एलन मुमफोर्ड (Alan Mumford) के 'अधिगम शैली वर्गीकरण' (Activist, Reflector, Theorist, Pragmatist) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक लचीलेपन व स्वायत्त अधिगम के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: डेविड कोल्ब (David Kolb) का 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) इस बात पर जोर देता है कि ज्ञान अनुभव के परिवर्तन के माध्यम से सृजित होता है। इसके चार चरण—कंक्रीट अनुभव, चिंतनशील अवलोकन, अमूर्त अवधारणा और सक्रिय प्रयोग—मस्तिष्क के विभिन्न न्यूरो-संज्ञानात्मक क्षेत्रों (जैसे संवेदी कॉर्टेक्स, हिप्पोकैम्पस, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और मोटर कॉर्टेक्स) के साथ समन्वय स्थापित करते हैं। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) के अंतर्गत इन तंत्रिका मार्गों को सक्रिय करके विद्यार्थियों की विविध अधिगम शैलियों (जैसे एक्टिविस्ट, रिफ्लेक्टर, थ्योरिस्ट, प्रैग्मैटिस्ट) का पोषण किया जाता है, जिससे संज्ञानात्मक लचीलापन और दीर्घकालिक ज्ञान निर्माण संभव होता है। अतः विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है।
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