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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास के संज्ञानात्मक और मनोसामाजिक सिद्धांतों' के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत 'उत्तरापंर पारंपरिक स्तर' (Post-conventional Level) की 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) तथा 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles) अवस्थाओं के न्यूरो-नैतिक स्वरूप, तथा कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) द्वारा प्रतिपादित 'देखभाल की नैतिकता' (Ethics of Care) के अंतर्गत 'स्वयं केंद्रित से दूसरों की जिम्मेदारी और अंततः आत्म-व अन्य के बीच संतुलन' के चरणों के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, नैतिक दुविधा (Moral Dilemma) आधारित चर्चाओं और विद्यार्थियों में न्याय और परोपकारिता आधारित मूल्यों के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास के अपने सिद्धांत में न्याय (Justice) और अधिकारों पर विशेष जोर दिया, विशेषकर उत्तर-पारंपरिक स्तर पर। इसके विपरीत, उनकी सहकर्मी कैरल गिलिगन ने पारंपरिक न्याय-दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए 'देखभाल की नैतिकता' (Ethics of Care) का प्रतिपादन किया, जो संबंध, करुणा, सहानुभूति और अन्य लोगों की देखभाल पर आधारित है। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में बच्चों के सर्वांगीण नैतिक और सामाजिक विकास के लिए न्याय और देखभाल दोनों दृष्टिकोन महत्वपूर्ण हैं।
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