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UPTET
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक कालीन शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वैदिक काल में उच्च शिक्षा पूरी करने वाले छात्रों को उनकी अध्ययन अवधि के आधार पर तीन श्रेणियों - 'विद्यार्थी', 'स्नातक' और 'वसु' में विभाजित किया जाता था, तथा इस काल में महिलाओं को उपनयन संस्कार का अधिकार था और उन्हें 'ब्रह्मवादिनी' या 'सद्योवधू' के रूप में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की स्वतंत्रता थी।
- 2. गुरुकुल में शिक्षा की समाप्ति पर छात्र के घर लौटने से पूर्व 'समावर्तन संस्कार' का आयोजन किया जाता था, जिसके संपन्न होने के बाद छात्र को 'स्नातक' कहा जाता था और वह समाज में प्रवेश करने के लिए योग्य माना जाता था।
- 3. वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली का मुख्य उद्देश्य केवल भौतिक संपदा और व्यावसायिक कौशल अर्जित करना था, और इसमें नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास को कोई विशेष स्थान नहीं दिया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि वैदिक काल में उच्च शिक्षा पूरी करने वाले छात्रों की श्रेणियाँ 'विद्यार्थी' नहीं बल्कि 'स्नातक' (1 वर्ष अध्ययन), 'वसु' (2 वर्ष), 'रुद्र' (3 वर्ष) आदि थीं (यद्यपि महिलाओं को शिक्षा का अधिकार था, लेकिन सभी श्रेणियाँ इस प्रकार नहीं थीं)। कथन 3 पूरी तरह असत्य है क्योंकि वैदिक कालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक विकास, चरित्र निर्माण, ईश्वर भक्ति और मोक्ष प्राप्ति था, न कि केवल व्यावसायिक कौशल। कथन 2 बिल्कुल सही है; शिक्षा पूरी होने के बाद गुरुकुल से लौटने पर 'समावर्तन संस्कार' होता था जिसके बाद छात्र 'स्नातक' कहलाता था। अतः केवल कथन 2 सही है।
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