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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'भाषा विकास एवं चिंतन' के संदर्भ में, रूसी मनोवैज्ञानिक लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) द्वारा प्रतिपादित 'विचार और भाषा' (Thought and Language) के सिद्धांतों के अनुसार, बाल्यावस्था में बच्चे द्वारा अपने ही व्यवहार को निर्देशित करने, विनियमित करने और नियंत्रित करने के लिए जो उच्च स्वर में स्वयं से बातचीत (Self-Talk) की जाती है, उसे वाइगोत्स्की ने क्या कहा है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार, 'निजी वाक्' (Private Speech) वह माध्यम है जिसके द्वारा बच्चे अपने विचारों को नियंत्रित करते हैं और मौखिक रूप से अपने कार्यों का मार्गदर्शन करते हैं। वाइगोत्स्की का मानना था कि यह बच्चों में आत्म-नियमन (Self-Regulation) का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो बाद में विकसित होकर 'आंतरिक वाक्' (Inner Speech) में परिवर्तित हो जाता है। (ध्यान दें: 'अहम-केंद्रित वाक्' शब्द जीन पियाजे द्वारा प्रयोग किया गया था, जबकि वाइगोत्स्की ने इसे 'निजी वाक्' कहा है)।
Related Questions
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बच्चों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह से विकसित हो जाता है, जिससे वे किसी वस्तु के रूप या आकार में परिवर्तन होने पर भी उसके आयतन, द्रव्यमान और संख्या को अपरिवर्तित समझ सकते हैं।
2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत करने (Classification) तथा 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता प्राप्त कर लेता है, जिससे वह किसी समस्या को एक से अधिक दृष्टियों से देख सकता है।
3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning) की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत' (Sociocultural Theory of Learning) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) द्वारा प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'चान्स्कैफोल्डिंग' (Scaffolding) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral Prefrontal Cortex' (DLPFC - कार्यकारी नियंत्रण और योजना), 'Mirror Neuron System' (MNS - अवलोकन और अनुकरण के माध्यम से सीखना), और 'Anterior Cingulate Cortex' (ACC - सामाजिक संज्ञान और त्रुटि निगरानी) के बीच अंतःक्रियात्मक सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर और वायगोत्स्की के विचारों के अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-सोसियोकल्चरल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Sociocultural Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सामाजिक मध्यस्थता (Social Mediation), सहयोगात्मक समस्या-समाधान व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि-जलवायु क्षेत्रों तथा प्रमुख फसलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएं चिकनी और अत्यधिक उपजाऊ होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की विशेष क्षमता होती है, जो चना और मटर जैसी रबी फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती हैं।
2. उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा राज्य को कुल 20 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जो यहाँ की वर्षा, तापमान और मिट्टी की विविधता को स्पष्ट करते हैं।
3. उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टी मुख्य रूप से उपजाऊ कछारी और नम प्रकार की होती है, जहाँ धान और गन्ने की बंपर पैदावार होती है, लेकिन यह क्षेत्र बाजरे की खेती के लिए राज्य में सबसे प्रसिद्ध माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'चार्वाक दर्शन' (लोकायत दर्शन) और उसके भौतिकवादी सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चार्वाक दर्शन भारत का एकमात्र प्रमुख प्राचीन नास्तिक (Heterodox) दर्शन है जो वेदों की प्रमाणिकता को पूरी तरह अस्वीकार करता है और इसे केवल 'धूर्तों की रचना' मानता है।
2. इस दर्शन के अनुसार इस जगत की उत्पत्ति पृथ्वी, जल, तेज (अग्नि) और वायु- इन चार महाभूतों से हुई है, और चेतना या आत्मा इन तत्वों के विशिष्ट संयोग से उत्पन्न होने वाला एक आकस्मिक गुण है, जो शरीर के नाश के साथ ही समाप्त हो जाता है।
3. चार्वाक दर्शन मोक्ष या पुनर्जन्म के सिद्धांत को नहीं मानता और 'यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्' (जब तक जियो, सुख से जियो, ऋण लेकर भी घी पियो) के माध्यम से जीवन के एकमात्र उद्देश्य 'सुखवाद' (Hedonism) या भौतिक सुख को स्थापित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के त्रिआयामी सिद्धांत' (Structure of Intellect Model) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जे.पी. गिल्फ़र्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि संरचना मॉडल' (Operations, Contents, and Products: कुल 150/180 घटक) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - DLPFC), 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), और 'टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Temporal Cortex) के बीच सूचना प्रसंस्करण (Information Processing), श्रेणीबद्ध वर्गीकरण (Categorization), और संक्रियात्मक लचीलेपन की सक्रियण गतिकी, तथा चार्ल्स स्पीयरमैन के 'द्विकारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-इंटेलिजेंस ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Intelligence Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहु-आयामी बौद्धिक कौशल, विश्लेषणात्मक व व्यावहारिक चिंतन व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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