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General Science
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मानव शरीर में 'मायलीन शीथ' (Myelin Sheath) के निर्माण और उसके कार्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) में मायलीन शीथ का निर्माण 'ऑलिगोडेंड्रोजसाइट्स' (Oligodendrocytes) नामक कोशिकाओं द्वारा होता है, जबकि परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) में यह कार्य 'श्वान कोशिकाओं' (Schwann cells) द्वारा किया जाता है।
- 2. यह तंत्रिका तंतुओं (Nerve fibers) के चारों ओर एक विद्युतरोधी (Insulating) आवरण के रूप में कार्य करती है, जिससे तंत्रिका आवेगों (Nerve impulses) की चालन गति कम हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) में न्यूरॉन्स के axons के चारों ओर मायलीन शीथ का निर्माण ऑलिगोडेंड्रोजसाइट्स द्वारा होता है, जबकि परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) में यह श्वान कोशिकाओं (Schwann cells) द्वारा निर्मित होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि मायलीन शीथ तंत्रिका आवेगों (Nerve impulses) की चालन गति को कम नहीं करती है, बल्कि साल्टेटरी कंडक्शन (Saltatory conduction) के माध्यम से इनकी गति को कई गुना बढ़ा देती है।
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रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार सिद्धांत (Acids and Bases) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार वे होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकते हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) अवधारणा के अनुसार, एक अम्ल वह पदार्थ है जो प्रोटॉन ($H^+$) का त्याग कर सकता है, और इसके द्वारा प्रोटॉन त्यागने के बाद बनने वाली स्पीशीज को उसका 'संयुग्मी अम्ल' (Conjugate acid) कहा जाता है।
3. आयनिक बंधन (Ionic bond) के निर्माण के दौरान जालक ऊर्जा (Lattice energy) जितनी अधिक ऋणात्मक होती है, बनने वाले आयनिक यौगिक का स्थायित्व उतना ही अधिक होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की आनुवंशिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली की वंशागति सह-प्रभाविता (Codominance) और बहुयुग्मविकल्पी (Multiple allelism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें 'I' जीन के तीन एलील ($I^A$, $I^B$, और $i$) होते हैं, और जब $I^A$ तथा $I^B$ दोनों एक साथ उपस्थित होते हैं, तो वे दोनों अपनी स्वतंत्र अभिव्यक्ति के कारण 'AB' रक्त समूह बनाते हैं।
2. 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटalis' (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh+) पिता और Rh-ऋणात्मक (Rh-) माता की पहली संतान Rh-धनात्मक होती है, जिसके कारण प्रसव के दौरान माता के शरीर में Rh-प्रतिरक्षी (Antibodies) विकसित हो जाते हैं जो अगली गर्भधारण में भ्रूण के लाल रक्त कणिकाओं को नष्ट कर सकते हैं।
3. रक्त प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले प्रतिपिंड (Antibodies) प्रोटीन प्रकृति के होते हैं जिनका निर्माण यकृत की कोशिकाओं द्वारा किया जाता है, जबकि लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद एंटीजन (Agglutinogens) ग्लाइकोलिपिड या ग्लाइकोप्रोटीन के बने होते हैं।
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा संक्षारण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गैल्वेनीकरण' (Galvanizing) लोहे या इस्पात को जंग से बचाने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उस पर पिघली हुई जस्ते (Zinc) की एक पतली परत चढ़ाई जाती है, और इस प्रक्रिया में जस्ता 'बलिदान एनोड' (Sacrificial anode) के रूप में कार्य करता है क्योंकि जस्ते का मानक ऑप्शन विभव (Reduction potential) लोहे की तुलना में अधिक ऋणात्मक होता है।
2. 'एक्वा रेजिया' (Royal Water) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) का 3:1 के आयतन अनुपात में ताजा तैयार किया गया मिश्रण है, जो स्वर्ण और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट (Noble) धातुओं को भी घोल सकता है, क्योंकि यह मिश्रण अपने भीतर शक्तिशाली ऑक्सीकारकों जैसे 'क्लोरीन गैस' और 'नाइट्रोसिल क्लोराइड' का निर्माण करता है।
3. सफेद फास्फोरस ($P_4$) एक अत्यंत प्रतिक्रियाशील और विषैला अधातु है जो अंधेरे में चमकता है (स्फुरदीप्ति या Chemiluminescence), और इसे हवा में स्वतः प्रज्वलित होने से रोकने के लिए जल के भीतर डुबोकर रखा जाता है, जबकि लाल फास्फोरस इससे कम प्रतिक्रियाशील, पॉलीमेरिक संरचना वाला और जल में अघुलनशील होता है।
4. सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निर्माण के लिए प्रयुक्त 'कास्टनर-कैलनर सेल' (Castner-Kellner cell) या विद्युत अपघटनी प्रक्रिया में, नमकीन घोल (Brine) के विद्युत अपघटन के दौरान एनोड पर क्लोरीन गैस और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है, जबकि सोडियम धातु पारे (Mercury) के साथ मिलकर अमलगम का निर्माण करती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) में गति के नियमों, जड़त्व और संरक्षित राशियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी वस्तु का जड़त्व (Inertia) उसके द्रव्यमान का प्रत्यक्ष माप है; अर्थात जिस वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसके विराम या गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करने की प्रवृत्ति उतनी ही अधिक होती है।
2. न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार, क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, जिसके कारण वे एक-दूसरे को निरस्त (Cancel) कर देते हैं और परिणामस्वरूप निकाय का कुल त्वरण शून्य हो जाता है।
3. जब कोई व्यक्ति किसी गतिशील लिफ्ट में ऊपर की ओर त्वरित गति से यात्रा करता है, तो लिफ्ट के फर्श द्वारा उस व्यक्ति पर आरोपित अभिलंब प्रतिक्रिया बल (Normal reaction force) उसके वास्तविक भार से अधिक प्रतीत होता है।
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