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नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन द्वारा प्राप्त हुआ?

Detailed Explanation

74वें संशोधन (1992) द्वारा शहरी स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) और 'पीएम गति शक्ति' (PM GatiShakti) योजना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में वित्त मंत्रालय के अंतर्गत गठित एक उच्च-स्तरीय कार्यदल की संस्तुतियों के आधार पर लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक और आर्थिक अवसंरचना परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित करना है, और इसमें केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएं ही शामिल हैं। 2. 'पीएम गति शक्ति' - राष्ट्रीय मास्टर प्लान (National Master Plan) एक डिजिटल मंच है जो अर्थव्यवस्था के सात प्रमुख इंजनों (सड़क, रेलवे, विमानन, नौवहन, सार्वजनिक परिवहन, जलमार्ग और रसद अवसंरचना) को एक साथ जोड़ता है, ताकि बहु-मोडल कनेक्टिविटी (Multi-modal Connectivity) को बढ़ावा दिया जा सके और लॉजिस्टिक लागत को कम किया जा सके। 3. भारत की संधारणीय अवसंरचना विकास रणनीतियों के तहत, NIP और पीएम गति शक्ति दोनों पहलों में मुख्य रूप से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों और उच्च कार्बन उत्सर्जन वाली परिवहन प्रणालियों को प्राथमिकता दी गई है, तथा नवीकरणीय ऊर्जा और हरित भवनों जैसे क्षेत्रों को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1920-22 के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) तथा उससे जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और घटनाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागपुर के विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920) में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का विरोध चित्तरंजन दास (सी.आर. दास), मदन मोहन मालवीय और एनी बेनीसेंट जैसे नेताओं द्वारा किया गया था, हालाँकि दिसंबर 1920 के नागपुर के नियमित वार्षिक अधिवेशन में चित्तरंजन दास ने ही असहयोग के मुख्य प्रस्ताव को प्रस्तुत किया था। 2. असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से जलाया गया था, जिसे रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 'निष्ठावान बर्बरता' (Loyal Savagery) और राष्ट्रीय बर्बादी की संज्ञा दी थी, क्योंकि उनका मानना था कि कपड़ों को नष्ट करने के बजाय उनका सदुपयोग गरीबों की मदद के लिए किया जाना चाहिए था। 3. इस आंदोलन के दौरान केरल (मालाबार क्षेत्र) में हुए 'मोपला विद्रोह' (Moplah Rebellion, 1921) को असहयोग और खिलाफत आंदोलन का पूर्ण समर्थन प्राप्त था, और यह आंदोलन शुरू से अंत तक पूरी तरह से अहिंसक बना रहा, जिसे ब्रिटिश सरकार द्वारा केवल शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाप्त किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency - Article 352) के उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर ही की जा सकती है, और मूल संविधान में इसके लिए 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदलकर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) कर दिया गया। 2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित सिफारिश का होना संविधान में अनिवार्य किया गया है, और यह प्रावधान भी 44वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था ताकि प्रधानमंत्री द्वारा अकेले लिए जाने वाले निर्णयों पर अंकुश लगाया जा सके। 3. जब राष्ट्रीय आपातकाल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर प्रवृत्त होता है, तो संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त सभी छह मौलिक अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए अलग से किसी राष्ट्रपति के आदेश (Presidential Order) की कोई आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत भारत के राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि उन्हें प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है जो सार्वजनिक महत्व का है, तो वे उस पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकते हैं, तथा सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए ऐसे प्रत्येक प्रश्न पर अपनी राय देना और विधिक परामर्श देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। 2. 'विशेष संदर्भ संख्या 1 ऑफ़ 2002 (गुजरात दंगा मामला)' तथा अन्य ऐतिहासिक मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 143 के तहत दी गई सर्वोच्च न्यायालय की सलाहकार राय भारत के सभी न्यायालयों के लिए एक बाध्यकारी मिसाल (Binding Precedent) होती है, ठीक वैसे ही जैसे अनुच्छेद 141 के तहत घोषित कानून होते हैं। 3. अनुच्छेद 143(2) के प्रावधानों के तहत, राष्ट्रपति संविधान लागू होने से पहले की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य समान दस्तावेजों से उत्पन्न विवादों को सर्वोच्च न्यायालय के पास विचार और सलाह के लिए भेज सकते हैं, और इस विशिष्ट श्रेणी के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) की विधिक शक्तियों तथा अधिकारक्षेत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 14 और 15 के तहत NGT को पर्यावरण से जुड़े उन सभी सिविल मामलों में न्यायनिर्णयन की व्यापक शक्ति प्राप्त है जो अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध सात विशिष्ट पर्यावरण कानूनों (जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम आदि) के प्रवर्तन से संबंधित हैं। 2. 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ' या NGT से जुड़े अन्य न्यायिक निर्णयों में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया है कि अधिकरण के पास पर्यावरण संबंधी मामलों में आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) के मामलों को छोड़कर, अपने स्वयं के आदेशों, निर्देशों या निर्णयों की अवमानना के लिए सिविल अवमानना (Civil Contempt) के तहत दंडित करने की वही शक्ति प्राप्त है जो देश के उच्च न्यायालयों को होती है। 3. 'सेव मोनोआ बेसिन कमिटी बनाम भारत संघ' और अन्य मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि NGT के किसी भी आदेश या निर्णय के विरुद्ध सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने से पहले aggrieved party (व्यथित पक्षकार) को संबंधित उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष रिट याचिका दायर करना एक अनिवार्य और पूर्ववर्ती शर्त (Condition Precedent) है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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