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इब्न बतूता किसके शासनकाल में भारत आया था?

Detailed Explanation

इब्न बतूता 1333 ई. में मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दिल्ली पहुँचा था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' तथा इसके अंतर्गत जारी की जाने वाली विभिन्न 'रिट' (Writs) की सीमाओं और क्षेत्राधिकार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मौलिक अधिकार है, जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto) और उत्प्रेषण (Certiorari) रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है। 2. 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) रिट का शाब्दिक अर्थ 'को शरीर को प्रस्तुत किया जाए' है, और यह रिट किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण या निजी व्यक्ति दोनों के खिलाफ अवैध हिरासत के विरुद्ध व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जारी की जा सकती है। 3. 'उत्प्रेषण' (Certiorari) और 'प्रतिषेध' (Prohibition) दोनों रिट केवल न्यायिक और अर्ध-न्यायिक निकायों के विरुद्ध ही जारी की जा सकती हैं, और ये किसी प्रशासनिक प्राधिकरण (Administrative Authorities) या विधाई निकायों (Legislative Bodies) के कार्यों या निर्णयों के विरुद्ध जारी नहीं की जा सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (The Union Judiciary - अनुच्छेद 124 से 147) तथा उच्चतम न्यायालय की शक्तियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन या अनुच्छेद 143 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन, अपने द्वारा सुनाई गई किसी भी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है। 2. उच्चतम न्यायालय की 'सलाहकारिता अधिकारक्षेत्र' (Advisory Jurisdiction) के अंतर्गत, यदि राष्ट्रपति किसी सार्वजनिक महत्व के विधि या तथ्य के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय मांगते हैं, तो न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य है और न्यायालय द्वारा दी गई वह सलाह राष्ट्रपति पर पूर्णतः बाध्यकारी होती है। 3. संविधान के अनुच्छेद 142 के अनुसार उच्चतम न्यायालय अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए ऐसा कोई डिक्री या आदेश पारित कर सकता है जो उसके समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक हो, और ऐसा प्रत्येक आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत राज्यपाल की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) तथा इससे संबंधित न्यायिक निर्णयों और प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य के राज्यपाल को उस विषय से संबंधित, जिसके संबंध में राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार है, किसी विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से माफ करने या क्षमा (Pardon) देने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है। 2. 'मरु राम बनाम भारत संघ (1980)' और 'एतवा उरांव बनाम झारखंड राज्य' मामलों में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति का प्रयोग राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही किया जाना अनिवार्य है, और यह शक्ति न्यायोचित (Justiciable) है, अर्थात् यदि इसका प्रयोग दुर्भावनापूर्ण, राजनीतिक पूर्वाग्रह या असंगत आधारों पर किया जाता है, तो न्यायालय द्वारा इसकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। 3. 'श्रीहरन उर्फ मुरुगन बनाम भारत संघ (2016)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि यदि किसी मामले में केंद्र सरकार के कानूनों (जैसे IPC या ताज़ा BNS या विशेष केंद्रीय कानून) के तहत अपराध हुआ है और दंडादेश दिया गया है, तो उस स्थिति में राज्य के राज्यपाल के पास अनुच्छेद 161 के अंतर्गत क्षमादान देने की अनन्य शक्ति होती है, भले ही उस मामले में अंतिम अपील सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय की गई हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? स्वतंत्र भारत में प्रशासनिक सुधारों के इतिहास के संदर्भ में, वर्ष 2005 में गठित 'द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग' (Second Administrative Reform Commission - ARC) के अध्यक्ष और इसकी रिपोर्टों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस आयोग के प्रथम अध्यक्ष वीरप्पा मोइली (M. Veerappa Moily) थे, और उनके त्यागपत्र के बाद वी. रामचंद्रन को इस आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। 2. इस आयोग ने अपनी रिपोर्टों में 'नैतिकता और प्रशासन' (Ethics in Governance) तथा 'नाच केंद्रित प्रशासन' (Citizen Centric Administration) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत संस्तुतियाँ दी थीं। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' (National Green Hydrogen Mission) और ऊर्जा स्रोतों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता के साथ दुनिया का एक प्रमुख हब बनाना है, तथा इसके तहत जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। 2. 'हरित हाइड्रोजन' (Green Hydrogen) का उत्पादन मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस के स्टीम रीफॉर्मिंग (Steam Reforming) प्रक्रिया द्वारा किया जाता है, जिसमें उत्पादित कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (CCS) तकनीक द्वारा भूमिगत भंडारों में सुरक्षित रूप से संगृहीत कर दिया जाता है। 3. इस मिशन के एक उप-घटक के रूप में 'एस०आई०ई०पी०जी०' (SIGHT) कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य हरित हाइड्रोजन के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives) प्रदान करना और इलेक्ट्रोलाइज़र (Electrolysers) के उत्पादन को बढ़ावा देना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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