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Indian Polity
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प्रस्तावना में 'संप्रभु' (Sovereign) शब्द का क्या अर्थ है?

Detailed Explanation

'संप्रभु' का अर्थ है कि भारत आंतरिक और बाहरी मामलों में पूर्णतः स्वतंत्र है और किसी अन्य शक्ति के अधीन नहीं है।
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषाओं और राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की मान्यता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधनों द्वारा जोड़कर कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और इस अनुसूची में अंग्रेजी तथा राजस्थानी दोनों भाषाएँ वर्तमान में आधिकारिक राजभाषा के रूप में सम्मिलित हैं। 2. भारतीय संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 351 में यह निर्देश दिया गया है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके। 3. निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार किसी पंजीकृत दल को 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा चुनाव या आम विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और इसके अतिरिक्त कम से कम चार राज्यों से लोकसभा में कुल 4 सीटें भी जीते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के राष्ट्रपति की विधायी और कार्यकारी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 85 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोकसभा को विघटित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति पूरी तरह से प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल की सलाह के अधीन होती है, जिसका अर्थ है कि यदि मंत्रिमंडल लोकसभा को भंग करने की सलाह देता है, तो राष्ट्रपति उस सलाह को मानने के लिए पूर्णतः बाध्य है। 2. राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत करने की शक्ति रखता है, जो अनुच्छेद 108 के तहत किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों के बीचरोध उत्पन्न होने पर बुलाई जाती है, और इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता हमेशा लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, तथा यदि वह अनुपस्थित हो तो राज्यसभा के सभापति इसकी अध्यक्षता करते हैं। 3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के संबंध में मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर संघ के प्रशासन से संबंधित जानकारी राष्ट्रपति को प्रदान करे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की विधाई शक्तियों, अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रक्रिया और क्षमादान की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव है जो संसद के किसी अधिनियम का होता है, किंतु यह अध्यादेश संसद के पुनः समवेत होने के पश्चात छह सप्ताह की अवधि समाप्त होने पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, या यदि उससे पूर्व दोनों सदन इसके अननुमोदन का प्रस्ताव पारित कर दें तो उससे पहले भी समाप्त हो सकता है। 2. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72) के अंतर्गत 'क्षमा' (Pardon), 'प्रविलंबन' (Reprieve), 'विराम' (Respite), 'परिहार' (Remission) और 'लघुकरण' (Commutation) शामिल हैं, तथा न्यायालय द्वारा सैन्य न्यायालय (Court-martial) के अंतर्गत दिए गए दंड के मामलों में भी राष्ट्रपति को यह शक्ति अनन्य रूप से प्राप्त है, जिसे राज्य का राज्यपाल कभी प्रयोग नहीं कर सकता। 3. राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति का प्रयोग करने के लिए यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है कि संसद का कोई भी सदन सत्र में न हो या दोनों सदन सत्र में न हों, और राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग अपने पूर्ण स्वविवेक से कर सकता है, जिसके लिए मंत्रिपरिषद की लिखित सलाह या संस्तुति लेना पूरी तरह वैकल्पिक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता, अधीनस्थ न्यायपालिका तथा उनसे जुड़े विभिन्न संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 228 के अनुसार यदि किसी उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय में लंबित किसी मामले में संविधान के निर्वचन से संबंधित कोई महत्वपूर्ण विधि का प्रश्न अंतर्ग्रस्त है, तो वह उस मामले को अपने पास मंगा सकता है और या तो स्वयं ही उस मामले का निपटारा कर सकता है या फिर विधि के उस प्रश्न का निर्धारण करके उस मामले को वापस उसी न्यायालय को निर्देश के साथ लौटा सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 234 के तहत जिला न्यायाधीशों से भिन्न न्यायिक सेवा के अन्य व्यक्तियों की नियुक्ति, राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके बनाए गए नियमों के अनुसार की जाती है, जबकि जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा सीधे अपने स्वविवेक से की जाती है, जिसमें उच्च न्यायालय से परामर्श करना अनिवार्य नहीं होता है। 3. संविधान के अनुच्छेद 237 के अनुसार राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकता है कि इस अध्याय (अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित) के उपबंध, जो मजिस्ट्रेटों के किसी वर्ग पर लागू होते हैं, राज्य के किसी भी न्यायिक सेवा के अधिकारियों पर लागू नहीं होंगे, और यह शक्ति पूरी तरह से राज्य के मंत्रिमंडल के नियंत्रण में होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? अनुच्छेद 143 क्या है?
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