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Indian Polity
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अनुच्छेद 143 क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सलाहकारी।
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनीतिक दलों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन अधिनियमों के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और इसमें अंग्रेजी भाषा को शामिल नहीं किया गया है।
2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा के संबंध में उपबंध किए गए हैं, जिसके अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी और अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा, तथा इसके साथ ही संविधान में अंग्रेजी भाषा के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए संसद को विधि बनाने की शक्ति दी गई थी, किंतु न्यायालयों की भाषा के संबंध में विशेष उपबंध अनुच्छेद 348 में किए गए हैं।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, 'दल-बदल के आधार पर अयोग्यता के उपबंध' से संबंधित है, और इसके तहत किसी सदस्य की अयोग्यता पर निर्णय लेने की अंतिम शक्ति सदन के पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) में निहित होती है, जिसके न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) का अधिकार वर्ष 1992 के 'किहोटो होलोहन वाद' के पश्चात समाप्त कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया है, जो अनुच्छेद 243 से 243-O तक विस्तृत है, और इसके तहत त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली (ग्राम स्तर, मध्यवर्ती स्तर और जिला स्तर) का प्रावधान किया गया है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या बीस लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन न करने की छूट दी गई है।
2. इस अधिनियम के माध्यम से जोड़ी गई ग्यारहवीं अनुसूची में कुल 29 विषयों को शामिल किया गया है, और इन विषयों से संबंधित आर्थिक विकास तथा सामाजिक न्याय की योजनाओं को तैयार करने और उनके कार्यान्वयन की शक्ति पंचायतों को देना राज्यों के लिए पूरी तरह से अनिवार्य (Mandatory) संवैधानिक कर्तव्य है।
3. अनुच्छेद 243-I के उपबंधों के अनुसार, प्रत्येक राज्य का राज्यपाल पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति का पुनरावलोकन करने के लिए हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का गठन करेगा, और इस राज्य वित्त आयोग की संरचना, सदस्यों की योग्यता तथा उनके चयन के तरीके का निर्धारण संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा स्वयं अपने विवेक से किया जाता है, जिसमें राज्य विधानमंडल की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और उनके वित्तीय प्रबंधन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-H के अनुसार किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, पंचायतों को कुछ कर, शुल्क, टोल और फीस आदि आरोपित करने, वसूलने और विनियोजित करने की शक्ति प्रदान कर सकता है, साथ ही राज्य की समेकित निधि से पंचायतों को सहायता अनुदान (Grants-in-Aid) देने का प्रावधान भी कर सकता है।
2. 73वें संविधान संशोधन द्वारा यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक राज्य में पंचायतों के खातों की लेखापरीक्षा (Audit) के लिए एक स्वतंत्र 'राज्य पंचायत लेखा परीक्षक' (State Panchayat Auditor) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा सीधे की जाएगी, और राज्य विधानमंडल को इस संबंध में कानून बनाने की कोई शक्ति नहीं दी गई है।
3. अनुच्छेद 243-I के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, इस संविधान संशोधन के प्रारंभ से एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर, एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान सभा के गठन और उसके सदस्यों के निर्वाचन तथा कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों और मुख्य कमिश्नरी क्षेत्रों की सीटों को प्रमुख रूप से मुस्लिम, सिख और सामान्य - इन तीन समुदायों में विभाजित किया गया था।
2. संविधान सभा के लिए हुए चुनावों में रियासतों (Princely States) को कुल 93 सीटें आवंटित की गई थीं, किंतु रियासतों के शासकों ने प्रारंभ में ही संविधान सभा से दूरी बनाए रखी और उन्होंने इसके चुनावों में भाग लेने या अपने प्रतिनिधियों को मनोनीत करने से पूरी तरह इंकार कर दिया था, जिसके कारण सभा की प्रारंभिक बैठकों में कोई भी रियासती प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ था।
3. संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग को लेकर इस बैठक का पूर्ण बहिष्कार किया था, और फ्रांस की संसदीय परिपाटी के अनुरूप सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Provisional President) चुना गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कैबिनेट मिशन योजना (1946) के प्रावधानों के तहत संविधान सभा के लिए कुल 389 सीटें निर्धारित की गई थीं, जिनमें से ब्रिटिश प्रांतों को 292 सीटें, मुख्य आयुक्तों के 4 क्षेत्रों (दिल्ली, अजमेर-मारवाड़, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) को 4 सीटें तथा देशी रियाساतों को 93 सीटें आवंटित की गईं, और देशी रियासतों के इन प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा किया जाना था, न कि प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने इस बैठक का पूर्ण बहिष्कार किया था, और इस बैठक में फ्रांसिसी प्रथा का अनुसरण करते हुए सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था, जबकि डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 11 दिसंबर 1946 को सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई समितियों का गठन किया गया था, जिनमें संघ शक्ति समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू, प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल, और प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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