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Indian Polity
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भारत के राष्ट्रपति की विधायी और कार्यकारी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 85 के अंतर्गत राष्ट्रपति को लोकसभा को विघटित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति पूरी तरह से प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल की सलाह के अधीन होती है, जिसका अर्थ है कि यदि मंत्रिमंडल लोकसभा को भंग करने की सलाह देता है, तो राष्ट्रपति उस सलाह को मानने के लिए पूर्णतः बाध्य है।
- 2. राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत करने की शक्ति रखता है, जो अनुच्छेद 108 के तहत किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों के बीचरोध उत्पन्न होने पर बुलाई जाती है, और इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता हमेशा लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, तथा यदि वह अनुपस्थित हो तो राज्यसभा के सभापति इसकी अध्यक्षता करते हैं।
- 3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के संबंध में मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर संघ के प्रशासन से संबंधित जानकारी राष्ट्रपति को प्रदान करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति को लोकसभा को विघटित करने की शक्ति प्राप्त है। 44वें संविधान संशोधन के पश्चात यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा। हालांकि, यदि मंत्रिमंडल स्पष्ट बहुमत खो देता है, तो राष्ट्रपति अपने स्वविवेक का प्रयोग कर सकता है, अन्यथा वह मंत्रिपरिषद की सलाह से ही ऐसा करता है। कथन 2 गलत है: संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और उनकी अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) करते हैं, न कि राज्यसभा के सभापति। राज्यसभा का सभापति कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करता है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री का यह दायित्व है कि वह संघ के प्रशासन और कानून निर्माण के प्रस्तावों से संबंधित सभी जानकारी राष्ट्रपति को दे। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें उनके पद से हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है, राज्यपाल के पास नहीं।
2. संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को दुराचार के आधार पर उसके पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा मामले को उच्चतम न्यायालय के पास जांच हेतु भेजा जाना अनिवार्य होता है, और यदि उच्चतम न्यायालय अपनी जांच में उस सदस्य को हटाने की संस्तुति कर देता है, तो राष्ट्रपति के लिए उस संस्तुति को मानना पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 319 के उपबंधों के तहत संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य रोजगार या कार्यालय के लिए पूर्ण रूप से अपात्र (Ineligible) हो जाता है, जबकि किसी राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने पद से निवृत्त होने पर संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाने की पात्रता रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'संविधान संशोधन' की प्रक्रिया में संसद की शक्ति बताता है?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के संरचनात्मक और वित्तीय प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और इसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके तहत ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के कार्यक्षेत्र के लिए कुल 29 विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
2. इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार त्रि-स्तरीय प्रणाली (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर) का गठन प्रत्येक राज्य के लिए अनिवार्य रूप से लागू होता है, किंतु 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों को मध्यवर्ती स्तर का गठन न करने की छूट प्रदान की गई है।
3. पंचायतों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिए प्रत्येक राज्य के राज्यपाल द्वारा हर पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग का गठन किए जाने का प्रावधान अनुच्छेद 243-I के तहत किया गया है, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और करों के संग्रह तथा करों के बंटवारे के संबंध में संस्तुति करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है जिसे राज्य सभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत ने पारित किया हो और जिससे लोकसभा सहमत हो, किंतु इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव तब तक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता जब तक कि इस आशय के प्रस्ताव की कम से कम चौदह दिन की पूर्व सूचना न दी गई हो।
2. अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के पश्चात प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
3. सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि मंत्रिमंडल का कोई भी निर्णय यदि संसद के किसी एक सदन में भी अस्वीकृत हो जाए, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल के दौरान भारत में संवैधानिक विकास की प्रक्रिया में पारित विभिन्न अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, जिसके प्रथम गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स थे।
2. 1813 के चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया, किंतु चाय, चीनी और पूर्वी देशों के साथ व्यापार पर उसका एकाधिकार अगले 20 वर्षों के लिए बना रहा।
3. 1853 के चार्टर अधिनियम के द्वारा पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को पृथक किया गया, तथा इसके तहत विधान परिषद में छह नए पार्षदों को जोड़ा गया जिन्हें 'विधान पार्षद' (Legislative Councillors) कहा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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