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भारत का कौन-सा राज्य 'सात बहनों' (Seven Sisters) का हिस्सा नहीं है?

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सिक्किम 'सेवन सिस्टर्स' का हिस्सा नहीं है; इसे अक्सर 'ब्रदर' के रूप में जाना जाता है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'रामसर अभीसमय' (Ramsar Convention) और भारत में 'आर्द्रभूमियों' (Wetlands) के संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रामसर अभीसमय वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षरित एक अंतर-सरकारी संधि है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों और उनके संसाधनों के संरक्षण तथा विवेकपूर्ण उपयोग (Wise Use) को बढ़ावा देना है, और भारत इस अभिसमय का एक अनुसमर्थक (Contracting Party) देश है। 2. 'मोंट्रिक्स रिकॉर्ड' (Montrex Record) रामसर सूची के अंतर्गत दर्ज आर्द्रभूमियों का एक रजिस्टर है, जिसमें ऐसी पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील आर्द्रभूमियों को शामिल किया जाता है जहाँ मानवीय हस्तक्षेप, तकनीकी विकास या प्रदूषण के कारण पारिस्थितिक परिवर्तन हो चुके हैं, हो रहे हैं या होने की संभावना है। 3. 'निती आयोग' भारत में रामसर स्थलों के रख-रखाव, नीतिगत निर्धारण और उनके आधिकारिक नामांकन के लिए जिम्मेदार सर्वोच्च और एकमात्र वैधानिक निकाय है, जो देश के सभी रामसर स्थलों के प्रबंधन के लिए सीधे बजट का आबंटन करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) तथा पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली 'प्राथमिक तरंगें' (P-Waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों की तरह व्यवहार करती हैं और केवल ठोस तथा तरल माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि गैसों में इनका संचलन संभव नहीं है। 2. 'द्वितीयक तरंगें' (S-Waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो प्रकाश तरंगों के समान होती हैं, और इनकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि ये केवल ठोस माध्यमों से ही गुजर सकती हैं तथा तरल या गैसीय माध्यमों में पूरी तरह लुप्त हो जाती हैं। 3. 'धरातलीय तरंगें' (Surface Waves या L-Waves) भूकंप के केंद्र (Focus) पर सबसे पहले उत्पन्न होने वाली तरंगें हैं, जो पृथ्वी के आंतरिक भाग से होते हुए सीधे केंद्र से सतह पर पहुँचती हैं और सबसे कम विनाशकारी होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 1857 के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर-जनरल कौन था? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) तथा 'अष्टम अनुसूची' (Eighth Schedule) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी है, किंतु संसद ने 'राजभाषा अधिनियम, 1963' के माध्यम से यह प्रावधान किया कि संघ के राजकीय प्रयोजनों और संसद में कार्य-व्यवहार के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग हिंदी के साथ-साथ अनिश्चितकाल तक जारी रखा जा सकता है। 2. संविधान की अष्टम अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें समय-समय पर विभिन्न संविधान संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधनों) के माध्यम से बढ़ाया गया, और वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ शामिल हैं, जिनमें अंग्रेजी, राजस्थानी और भोजपुरी भाषाएं भी विधिवत रूप से सम्मिलित हैं। 3. संविधान का अनुच्छेद 351 संघ का यह कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति (Composite culture) के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके विकास के लिए उसे केवल संस्कृत भाषा से ही शब्द ग्रहण करने का निर्देश देता है, अन्य क्षेत्रीय भाषाओं से नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संसद के 'विशेषाधिकार प्रस्ताव' (Privilege Motion) तथा संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों के हनन (Breach of Privilege) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विशेषाधिकार प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन के किसी भी सदस्य द्वारा उस मंत्री या सदस्य के विरुद्ध लाया जा सकता है, जिस पर यह आरोप हो कि उसने सदन या उसके किसी सदस्य के विशेषाधिकारों का हनन किया है या सदन के समक्ष तथ्यात्मक रूप से गलत, भ्रामक या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किए गए तथ्यों के माध्यम से सदन को गुमराह किया है। 2. लोकसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव की ग्राह्यता (Admissibility) पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) के पास होता है, और अध्यक्ष इस मामले को सीधे तौर पर प्रारंभिक जांच के लिए 'विशेषाधिकार समिति' (Privilege Committee) के पास भेज सकते हैं या स्वयं सदन में इस पर बहस की अनुमति दे सकते हैं। 3. 'संसद में प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियम' के अनुसार, यदि किसी मंत्री के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस संबंधित मंत्री को अपने बचाव में सदन में व्यक्तिगत स्पष्टीकरण देने का कोई संवैधानिक या प्रक्रियात्मक अवसर नहीं दिया जाता है, क्योंकि सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत मंत्रिपरिषद स्वतः दोषी मानी जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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