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1857 के विद्रोह के समय भारत का गवर्नर-जनरल कौन था?
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Detailed Explanation
1857 के विद्रोह के दौरान लॉर्ड कैनिंग भारत के गवर्नर-जनरल थे।
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जैन धर्म में 'कैवल्य' का क्या अर्थ है?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय के परामर्शदात्री अधिकारक्षेत्र' (Advisory Jurisdiction - Article 143) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि उन्हें यह प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो लोक महत्व का है, तो वे उस प्रश्न को विचार के लिए उच्चतम न्यायालय के पास भेज सकते हैं और न्यायालय ऐसी किसी भी संदर्भिका (Reference) पर राष्ट्रपति को अपनी राय देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
2. उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 143 के अंतर्गत दी गई परामर्शदात्री राय न तो एक न्यायिक निर्णय होती है और न ही यह राष्ट्रपति या सरकार पर बाध्यकारी होती है, तथा न ही यह देश के अन्य अधीनस्थ न्यायालयों के लिए एक पूर्व दृष्टांत (Precedent) के रूप में प्रवर्तनीय होती है।
3. यदि कोई मामला संविधान लागू होने से पूर्व की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य इसी प्रकार के दस्तावेजों से उत्पन्न विवाद से संबंधित है, तो ऐसे मामलों में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए परामर्श पर अपनी राय देना अनिवार्य (Compulsory) कर दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981' तथा 'जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974' के प्रावधानों तथा उनकी संस्थागत प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत गठित 'केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (CPCB) और 'राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (SPCBs) को यह वैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वे जल स्रोतों में प्रदूשक तत्वों के निर्वहन को विनियमित करें, तथा उल्लंघनकर्ताओं के परिसਰों का निरीक्षण करने और नमूने एकत्र करने का अधिकार रखते हैं।
2. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 को मूल रूप से केवल औद्योगिक स्रोतों से होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अधिनियमित किया गया था, किंतु वर्ष 1987 में किए गए संशोधनों के माध्यम से इसके दायरे में 'शोर प्रदूषण' (Noise Pollution) को भी एक प्रदूषक के रूप में औपचारिक रूप से शामिल कर दिया गया था।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) अधिनियम, 2010 की अनुसूची I के तहत जल अधिनियम और वायु अधिनियम दोनों को शामिल किया गया है, जिसका अर्थ है कि इन अधिनियमों के अंतर्गत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा दिए गए आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध NGT में सीधे अपील दायर की जा सकती है, न कि उच्च न्यायालयों में।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits - अनुच्छेद 264 से 300A) तथा भारत की संचित निधि और लोक लेखा के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार भारत की 'संचित निधि' (Consolidated Fund of India) एक ऐसा निधि है जिसमें भारत सरकार को प्राप्त होने वाले सभी राजस्व, उसके द्वारा जारी किए गए ट्रेजरी बिलों, ऋणों और ऋणों की अदायगी से प्राप्त सभी धन जमा किए जाते हैं, और इस निधि से धन संसद की विनियोग विधि (Appropriation Act) के पारित होने के पश्चात ही निकाला जा सकता है।
2. भारत के 'लोक लेखा' (Public Account of India - अनुच्छेद 266 का खंड 2) के अंतर्गत सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त किए जाने वाले सभी अन्य लोक धन (जैसे भविष्य निधि जमा, न्यायिक जमा, प्रेषण, बचत बैंक जमा आदि) जमा किए जाते हैं, और इस निधि से धन निकालने के लिए संसद की पूर्व स्वीकृति या विनियोग अधिनियम की आवश्यकता होती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 267 के तहत संसद को 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) की स्थापना करने की शक्ति दी गई है, जिसे राष्ट्रपति के распоря (अधिकार) के अधीन रखा जाता है, और इस निधि से किसी भी अप्रत्याशित व्यय को पूरा करने के लिए अग्रिम धन दिया जा सकता है, जिसके लिए बाद में संसद की अनुमति लेना आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत 'मूल अधिकार' (अनुच्छेद 12 से 35) तथा 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' (अनुच्छेद 32) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकार स्वयं में एक मौलिक अधिकार है, जिसके कारण सर्वोच्च न्यायालय इस आधार पर अपनी अधिकारिता से इनकार नहीं कर सकता कि मामले में कोई वैकल्पिक प्रभावी उपचार उपलब्ध है।
2. 'उत्प्रेषण' (Certiorari) रिट केवल न्यायिक और अर्द्ध-न्यायसंगत (Quasi-judicial) निकायों के विरुद्ध ही जारी की जा सकती है, तथा यह किसी प्रशासनिक प्राधिकारी (Administrative authority) या निजी व्यक्ति के विरुद्ध जारी नहीं की जा सकती, भले ही उनका कोई कार्य किसी व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित करता हो।
3. सशस्त्र बलों, अर्ध-सैनिक बलों, पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों के सदस्यों या लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियोजित किसी अन्य बल के सदस्यों के संबंध में मूल अधिकारों के अनुप्रयोग को प्रतिबंधित या निराकृत करने की अनन्य शक्ति केवल संसद के पास है, और राज्य के विधानमंडलों को ऐसी कोई विधायी शक्ति प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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