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महात्मा जोतिबा फुले ने 'जाति प्रथा' के विरुद्ध किस प्रसिद्ध समाज की स्थापना की थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
महात्मा जोतिबा फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की थी।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया और इसके न्यायिक पुनरावलोकन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 368 संसद को इस संविधान के किसी भी उपबंध का संशोधन करने की शक्ति प्रदान करता है, जिसे संसद द्वारा अपनी संविधान-संशोधन की सामान्य विधायी प्रक्रिया के माध्यम से ही पारित किया जा सकता है, बशर्ते वह संशोधन संघीय ढांचे से संबंधित न हो।
2. ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि संसद की संविधान संशोधन की शक्ति असीमित नहीं है और वह अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण करने वाला संशोधन नहीं कर सकती है।
3. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि संविधान के भाग-III (मौलिक अधिकार) और भाग-IV (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) के बीच संतुलन संविधान के मूल ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा है, और संसद द्वारा अनुच्छेद 368 में किए गए वे संशोधन जो न्यायिक समीक्षा की शक्ति को पूरी तरह समाप्त करते हैं, असंवैधानिक घोषित किए जाएंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों (Pardoning Powers) तथा इससे संबंधित न्यायिक निर्णयों और सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, जिसके लिए दंड ऐसे विषय संबंधी संघ सूची की कार्यकारी शक्ति के विस्तार से बाहर के मामलों में भी दिया गया हो।
2. 'मारू राम बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 72 के तहत क्षमादान की शक्ति का प्रयोग पूरी तरह से उनके व्यक्तिगत स्वविवेक (Discretionary Power) पर आधारित है, और इस पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह या सहायता (Aid and Advice) का होना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है।
3. 'एकीकृत मानवीय बनाम तमिलनाडु राज्य' तथा अन्य हालिया निर्णयों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि यदि राज्यपाल किसी मामले में राज्य सूची के अंतर्गत क्षमादान याचिका पर एक उचित समय सीमा (जैसे कि वर्षों तक) के भीतर निर्णय लेने में विफल रहता है, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 72 के तहत उसी मामले में सीधे हस्तक्षेप करके दोषी की दया याचिका पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति का दायरा व्यापक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) का पद संविधान के किस अनुच्छेद में है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन की प्रक्रिया' और 'न्यायिक समीक्षा' की सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, किंतु इसे पारित करने के लिए प्रत्येक सदन में कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत होना अनिवार्य है, तथा इस प्रक्रिया में दोनों सदनों के बीच गतिरोध को दूर करने के लिए संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान उपलब्ध है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' वाद में यह प्रतिपादित किया गया था कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, किंतु वह 'संविधान के बुनियादी ढांचे' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण नहीं कर सकती है।
3. '99वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2014' (राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग - NJAC अधिनियम) को सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के बुनियादी ढांचे—विशेषकर न्यायपालिका की स्वतंत्रता—का उल्लंघन करने वाला मानते हुए असंवैधानिक और शून्य घोषित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (भाग 9) और 'भाग IX-क' (भाग 9ए) के अंतर्गत 'पंचायतों' तथा 'नगरपालिकाओं' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के संबंध में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
2. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार (नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम) के गठन का प्रावधान है, तथा बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के लिए कुल 24 कार्यकारी विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
3. संविधान के अनुच्छेद 243-I के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर एक 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और करों के हस्तांतरण के संबंध में संस्तुतियाँ देगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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