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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे औषधीय पौधे लगाने के लिए किस नई पहल की शुरुआत की है?

Detailed Explanation

NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरियाली और स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करने के लिए 'आयुष वाटिका' पहल शुरू की है।
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, हाल के वर्षों में चर्चा में रहे 'हॉर्मोनल सिंक्रनाइज़ेशन' (Hormonal Synchronization या Oestrus Synchronization) और इसके अनुप्रयोगों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हॉर्मोनल सिंक्रनाइज़ेशन एक ऐसी पशुचिकित्सा और प्रजनन तकनीक है जिसमें झुंड (herd) की कई मादा पशुओं के एस्ट्रस चक्र (estrus cycle) को कृत्रिम रूप से इस प्रकार प्रबंधित किया जाता है कि वे लगभग एक ही समय में मद (heat) की स्थिति में आ जाएं। 2. इस तकनीक में मुख्य रूप से गोनैडोट्रॉपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन (GnRH), प्रोजेस्टेरोन और प्रोलैस्टिन जैसे सिंथेटिक हॉर्मोन्स का उपयोग किया जाता है, जो डिंबक्षोटन (ovulation) के समय को सटीक रूप से नियंत्रित करने में मदद करते हैं। 3. इस तकनीक का एक प्रमुख लाभ यह है कि इसके माध्यम से 'नियत समय पर कृत्रिम गर्भाधान' (Timed Artificial Insemination - TAI) को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जा सकता है, जिससे पशुओं में गर्भधारण दर में सुधार होता है और झुंड में बछड़े पैदा होने के मौसम को प्रबंधित करना आसान हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संविधान संशोधन प्रक्रिया' (Article 368) तथा न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रक्रिया का आरंभ केवल संसद के किसी भी सदन में इस प्रयोजन के लिए विधेयक प्रस्तुत करके ही किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Recommendation) लेना अनिवार्य होता है। 2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में उच्चतम न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह अभिनिर्धारित किया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) को छोड़कर किसी भी अन्य हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, और संविधान संशोधन अधिनियमों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। 3. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया कि सीमित संशोधन की शक्ति स्वयं संविधान के मूल ढाँचे का एक अनिवार्य हिस्सा है, और यदि संसद संविधान के अनुच्छेद 368 की शक्तियों का उपयोग करके अपनी संशोधन शक्तियों को अनियंत्रित या असीमित बना लेती है, तो ऐसा संशोधन असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं - अनुच्छेद 308 से 323) तथा 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार यदि 'राज्य सभा' उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद को संघ और राज्यों के लिए एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाएं (जिनके अंतर्गत न्यायिक सेवा भी शामिल की जा सकती है) सृजित करनी चाहिए, तो संसद विधि द्वारा ऐसी सेवाओं का सृजन कर सकती है। 2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, किंतु वे केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकार दोनों के नियंत्रण में कार्य करते हैं, जिन्हें 'कैडर नियंत्रण प्राधिकरण' (Cadre Control Authorities) के रूप में क्रमशः कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय तथा संबंधित राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रबंधित किया जाता है। 3. अनुच्छेद 311 के तहत अखिल भारतीय सेवा या संघ/राज्य की सिविल सेवा के किसी सदस्य को उसके पद से हटाने या पदावनत करने (Dismissal or Reduction in rank) से पूर्व उसे अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना देना और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करना अनिवार्य होता है, किंतु यह सुरक्षा उपाय किसी भी परिस्थिति में तब लागू नहीं होता जब बर्खास्तगी का आधार किसी आपराधिक आचरण के लिए न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि (Conviction on a criminal charge) हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' (निर्वाचन - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा चुनाव आयोग (Election Commission) से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार चुनाव आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और उतने ही अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं, यदि कोई हों, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करें, और मूल संविधान में इसे एक बहु-सदस्यीय (Multi-member) निकाय के रूप में स्थापित किया गया था। 2. मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की लिखित सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय पद से हटाया जा सकता है। 3. संविधान में चुनाव आयोग के सदस्यों की अहर्ताओं (Qualifications) जैसे कि विधिक, प्रशासनिक या शैक्षणिक योग्यताओं का कोई भी विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है, और न ही संविधान से सेवानिवृत्त होने वाले चुनाव आयुक्तों को सरकार द्वारा किसी अन्य नियुक्ति (Further Appointment) के लिए पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? एनी बेसेंट किस पत्रिका/अखबार के माध्यम से होम रूल आंदोलन का प्रचार करती थीं?
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