त्वरित लिंक्स
Civil services
7 views
हाल ही में अयोध्या में रामायण की कितनी वर्ष पुरानी पांडुलिपि खोजी गई है, जो अपनी विशेष लिखावट और संरक्षण के लिए चर्चा में है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अयोध्या में रामायण की 500 वर्ष पुरानी पांडुलिपि खोजी गई है।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency - अनुच्छेद 352) के प्रावधानों और इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा का आधार 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) था, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' शब्द को हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को शामिल किया गया।
2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके जारी रहने की संपुष्टि के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा इसे अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदित करना अनिवार्य है, और यह अनुमोदन उद्घोषणा की तिथि से दो माह के भीतर हो जाना चाहिए।
3. जब राष्ट्रीय आपातकाल प्रवर्तन में होता है, तब अनुच्छेद 358 के अंतर्गत स्वतः ही अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त सभी छह मूल अधिकार निलंबित हो जाते हैं, और इसके साथ ही राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त होता है कि वह अनुच्छेद 359 के तहत आदेश जारी कर भाग III द्वारा प्रदत्त अन्य मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन के लिए किसी भी न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा, इसके अनुमोदन और इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर ही नहीं, बल्कि ऐसी आसन्न संकटापस्थिति के आधार पर भी राष्ट्रपति द्वारा पहले ही की जा सकती है, जिसके बारे में राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि युद्ध या बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह का आसन्न खतरा वास्तव में मौजूद है।
2. '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया कि मंत्रिमंडल (Cabinet - जिसमें प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्री शामिल हैं) द्वारा राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के लिए लिखित रूप में संस्तुति दी जानी चाहिए, और संसद के दोनों सदनों द्वारा इस उद्घोषणा का अनुमोदन इसके जारी होने की तारीख से 'एक महीने' के भीतर विशेष बहुमत द्वारा किया जाना आवश्यक है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 19' द्वारा प्रदत्त सभी छह मूल अधिकार स्वतः और बिना किसी अपवाद के निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए अलग से कोई कार्यकारी आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होती है, भले ही आपातकाल की उद्घोषणा का आधार 'सशस्त्र विद्रोह' ही क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All-India Services) और लोक सेवा आयोगों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अंतर्गत राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित किए जाने पर संसद को नई अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन की शक्ति प्राप्त है, और इसके तहत वर्ष 1966 में 'भारतीय वन सेवा' (IFoS) को तीसरी अखिल भारतीय सेवा के रूप में जोड़ा गया था।
2. अनुच्छेद 316 के प्रावधानों के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) या किसी राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा आयोग के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष की अवधि या पैंसठ (65) वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) होता है, भले ही वह SPSC का सदस्य क्यों न हो।
3. अनुच्छेद 317 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग या किसी संयुक्त आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश से ही उसके पद से हटाया जा सकता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाने की शक्ति केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल के पास होती है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत 'मूल अधिकारों' के क्रियान्वयन और प्रवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में ही रिट (Writ) जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य विधिक या सामान्य कानूनी अधिकार के उल्लंघन पर भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
2. संसद को यह विशेष अधिकार प्राप्त है कि वह विधि द्वारा (Law) सशस्त्र बलों, अर्ध-सैनिक बलों, पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों के सदस्यों या लोक व्यवस्था बनाए रखने वाले कर्मचारियों के मूल अधिकारों के प्रयोग को प्रतिबंधित या निराकृत (Abrogate) कर सकती है, और इस प्रकार के कानून को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि यह अनुच्छेद 13 का उल्लंघन करता है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) के दौरान अनुच्छेद 352 के तहत, अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन को छोड़कर, राष्ट्रपति द्वारा अन्य सभी मूल अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने का आदेश दिया जा सकता है, जो संपूर्ण देश या उसके किसी हिस्से पर लागू हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
सर्वोच्च न्यायालय को अपने ही निर्णयों के 'पुनर्विलोकन' (पुनर्विचार) की शक्ति किस अनुच्छेद से प्राप्त है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.