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भारत के 98वें Chess Grandmaster कौन बने हैं?

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एस. अश्वथ (S. Aswath) भारत के 98वें शतरंज ग्रैंडमास्टर बने हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits) के प्रावधानों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार भारत और प्रत्येक राज्य की 'संचित निधि' (Consolidated Fund) से कोई भी धन विधि की प्राधिकृत प्रक्रिया के बिना नहीं निकाला जा सकता है, और इस निधि में केंद्र या राज्य द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, जुटाए गए सभी ऋण और ऋणों की अदायगी में प्राप्त धन जमा किया जाता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 267 के तहत संसद और राज्य विधानमंडल को कानून द्वारा क्रमशः 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) और 'राज्य की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of State) की स्थापना करने की शक्ति दी गई है, जिन्हें राष्ट्रपति या राज्यपाल के व्यय आधिपत्य में रखा जाता है और इनसे संसद या राज्य विधानमंडल की पूर्व स्वीकृति के बिना भी अप्रत्याशित खर्चों के लिए अग्रिम धन दिया जा सकता है। 3. संघ और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों (Net Proceeds) के वितरण के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का प्रावधान किया गया है, जो एक स्थायी संवैधानिक निकाय है और प्रत्येक चार वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले राष्ट्रपति द्वारा गठित किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राष्ट्रपति किस प्रकार के विधेयकों को संसद के पास पुनर्विचार हेतु लौटा सकते हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) के प्रावधानों और इसके न्यायिक अर्थघटन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान का अनुच्छेद 20(1) 'पूर्वपदाभिमुखी दांडिक विधि' (Ex-post-facto Criminal Law) के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है, जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जाएगा जो उस कार्य के किए जाने के समय लागू किसी कानून के उल्लंघन में नहीं था, और न ही उसे उस अपराध के लिए उस दंड से अधिक दंड दिया जाएगा जो उस अपराध के किए जाने के समय कानून में था। 2. अनुच्छेद 20(1) के अंतर्गत दी गई यह सुरक्षा केवल 'आपराधिक विधियों' (Criminal Laws) के मामलों तक ही सीमित है, और यह किसी भी स्थिति में दीवानी या कर संबंधी कानूनों (Civil or Tax Laws) पर पूर्ववर्ती प्रभाव (Retrospective Effect) के साथ लागू नहीं की जा सकती है, भले ही वे कर कानून किसी पिछली तारीख से लागू किए गए हों। 3. अनुच्छेद 20(2) 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) के सिद्धांत को संहिताबद्ध करता है, जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दण्डित किया जा सकता है, बशर्ते वह मामला अलग-अलग उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत में सिविल सेवाओं और प्रशासनिक सुधारों के इतिहास के संदर्भ में, 'हचिसन समिति' (Hutchison Committee) या अन्य समितियों से इतर, 'मैकॉले समिति' (Macaulay Committee, 1854) की निम्नलिखित संस्तुतियों पर विचार कीजिए: 1. इस समिति ने भारत में सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर सीधे नामजदगी (Patronage) की पुरानी व्यवस्था को पुनः लागू करने की जोरदार सिफारिश की थी। 2. समिति ने संस्तुति की थी कि सिविल सेवा के लिए चयन केवल ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ चुके यूरोपीय उम्मीदवारों तक ही सीमित रहना चाहिए, भारतीयों का प्रवेश वर्जित हो। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह भारत का पहला ऐसा विशेष न्यायिक निकाय है जिसे पर्यावरण से संबंधित किसी भी सिविल मामले में उच्च न्यायालयों की तरह 'मूल क्षेत्राधिकार' (Original Jurisdiction) का प्रयोग करने की शक्ति प्राप्त है। 2. NGT के अध्यक्ष (Chairperson) और न्यायिक सदस्यों (Judicial Members) की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के साथ परामर्श के पश्चात केंद्र सरकार द्वारा की जाती है, तथा NGT के Chairperson के रूप में केवल सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ही नियुक्त किया जा सकता है। 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, NGT पर्यावरण से संबंधित मामलों की सुनवाई करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के सख्त नियमों से बंधा नहीं होता है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है, तथा NGT के आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध केवल उच्चतम न्यायालय में ही सीधे अपील की जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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