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Civil services
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भारत में सिविल सेवाओं और प्रशासनिक सुधारों के इतिहास के संदर्भ में, 'हचिसन समिति' (Hutchison Committee) या अन्य समितियों से इतर, 'मैकॉले समिति' (Macaulay Committee, 1854) की निम्नलिखित संस्तुतियों पर विचार कीजिए:
- 1. इस समिति ने भारत में सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर सीधे नामजदगी (Patronage) की पुरानी व्यवस्था को पुनः लागू करने की जोरदार सिफारिश की थी।
- 2. समिति ने संस्तुति की थी कि सिविल सेवा के लिए चयन केवल ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ चुके यूरोपीय उम्मीदवारों तक ही सीमित रहना चाहिए, भारतीयों का प्रवेश वर्जित हो।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: वर्ष 1854 की मैकॉले समिति (Committee on the Public Service of India) ने ही वास्तव में यह सिफारिश की थी कि ईस्ट इंडिया कंपनी की सिविल सेवा में प्रवेश के लिए 'नामजदगी' (Patronage) की व्यवस्था को समाप्त किया जाए और इसे एक खुली प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली (Open Competitive Examination System) द्वारा प्रतिस्थापित किया जाए।
कथन 2 गलत है: मैकॉले समिति ने स्पष्ट रूप से यह संस्तुति की थी कि यह परीक्षा बिना किसी नस्लीय, वर्गीय या राष्ट्रीय भेदभाव के सभी योग्य ब्रिटिश प्रजाजनों (जिसमें भारतीय भी शामिल थे) के लिए खुली होनी चाहिए, ताकि सबसे मेधावी उम्मीदवारों का चयन हो सके। अतः दोनों कथन असत्य हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की संरचना, स्वतंत्रता और शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त, यदि कोई हों, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर निश्चित करें, शामिल होते हैं, तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए वही प्रक्रिया और आधार अपनाए जाते हैं जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए संविधान में उपबंधित हैं।
2. निर्वाचन आयोग के अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा किसी भी स्थिति में पद से नहीं हटाया जा सकता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वे कार्यपालिका के दबाव से पूरी तरह मुक्त होकर कार्य कर सकें।
3. 'निर्वाचन आयोग (सेवा की शर्तें और व्यवसाय का संचालन) अधिनियम, 1991' के प्रावधानों के तहत यह व्यवस्था की गई है कि यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच किसी मामले पर मतभेद उत्पन्न होता है, तो निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाएगा, और इस बहुसंख्यक निर्णय में मुख्य निर्वाचन आयुक्त की स्थिति अन्य आयुक्तों के समान ही होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के उद्गम केंद्र (Focus/Hypocenter) से उत्पन्न होने वाली तरंगों में 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं, जो ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं और वे केवल ठोस माध्यमों से ही गुजर सकती हैं।
2. पृथ्वी के आंतरिक भाग में क्रोड (Core) की सीमा के पास पहुँचने पर S-तरंगों का गायब हो जाना और P-तरंगों का मार्ग से विचलित होकर मंद गति से आगे बढ़ना इस बात का सबसे पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान करता है कि बाहरी क्रोड (Outer Core) तरल अवस्था में है।
3. धरातल पर पहुँचने वाली 'धरातलीय तरंगें' (Surface Waves या L-waves) शरीरिक तरंगों (Body Waves) की तुलना में अधिक गहराई तक यात्रा करती हैं और पृथ्वी के केंद्र से गुजरते हुए सबसे अधिक विनाशकारी प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' (Article 355) के प्रावधानों और इसके संवैधानिक निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 355 के अंतर्गत यह संघ (Union) का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक राज्य की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा करे तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
2. यदि कोई राज्य सरकार केंद्र द्वारा दिए गए किसी भी कार्यकारी निर्देश (Executive Direction) का पालन करने में विफल रहती है, तो केंद्र सरकार सीधे अनुच्छेद 355 के तहत उस राज्य में राष्ट्रपति शासन (Article 356) लागू कर सकती है, जिसके लिए किसी अन्य प्रक्रिया या चेतावनी की आवश्यकता नहीं होती है।
3. अनुच्छेद 355 केवल एक सैद्धांतिक घोषणा है और इसका कोई भी न्यायोचित (Justiciable) या प्रवर्तनीय संवैधानिक प्रभाव नहीं है, क्योंकि इसके अनुपालन न होने पर राज्य उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' (Article 32) के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की 'रिट अधिकारिता' (Writ Jurisdiction) और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता के बीच तुलनात्मक अंतर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जहाँ सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, वहीं उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य कानूनी या सामान्य उद्देश्यों (Any Other Purpose) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति रखते हैं।
2. सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र संपूर्ण भारत (Territorial Jurisdiction across India) पर लागू होता है, जबकि किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र सामान्यतः केवल उस राज्य या प्रादेशिक क्षेत्राधिकार तक ही सीमित होता है जिसके अंतर्गत वह उच्च न्यायालय कार्यरत है।
3. अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मूल अधिकार है, जिसके कारण सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में रिट जारी करने से अपनी 'अधिकारिता के अभाव' (Want of jurisdiction) के आधार पर मना कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालयों के लिए रिट जारी करना एक अनिवार्य संवैधानिक कर्तव्य है जिसे वे अस्वीकार नहीं कर सकते।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायती राज - अनुच्छेद 243 से 243O) तथा 'भाग IX-A' (नगरपालिकाएँ - अनुच्छेद 243P से 243ZG) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग IX को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था, जिसके माध्यम से त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर) का प्रावधान किया गया, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायतें गठित न करने की छूट दी गई है।
2. संविधान के अनुच्छेद 243D के अनुसार पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल सीटों की संख्या का कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) भाग आरक्षित होना अनिवार्य है, तथा इसके साथ ही यह प्रावधान भी किया गया है कि यह आरक्षण अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित कुल सीटों की संख्या पर भी लागू होगा, जबकि कुछ राज्यों (जैसे बिहार, मध्य प्रदेश आदि) ने अपने कानूनों के माध्यम से इस आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है।
3. संविधान के भाग IX-A के तहत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार (नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम) का गठन किया जाता है, और इसके साथ ही प्रत्येक नगरपालिका के गठन के लिए नगरपालिकाओं में वार्ड समितियों (Wards Committees) का गठन अनिवार्य किया गया है, चाहे उस नगरपालिका क्षेत्र की कुल जनसंख्या 3 लाख या उससे अधिक क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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