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मनोविज्ञान के व्यवहारवादी सम्प्रदाय के जनक कौन हैं?

Detailed Explanation

जोहन बी. वाटसन को व्यवहारवाद का जनक माना जाता है.
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→ एडवर्ड थार्नडाइक के 'संबंधवाद' (Connectionism) और सीखने के मुख्य नियमों—विशेषकर 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)—तथा बी.एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) के सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक आधारों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, थार्नडाइक के संतुष्टि और असंतुष्टि के संप्रत्यय तथा स्किनर के 'प्रबलन' (Reinforcement) के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा तात्विक एवं क्रियात्मक अंतर सर्वाधिक सटीक है? → अब्राहम मैस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs) के अनुसार, व्यक्ति की मूल प्रेरणाओं का स्वरूप 'कमी आधारित अभिप्रेरणा' (Deficiency Motivation या D-needs) से 'विकास आधारित अभिप्रेरणा' (Growth Motivation या B-needs) की ओर क्रमिक रूप से बदलता है। इस तात्विक रूपांतरण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक सटीक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है? → हावर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) और रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) के 'बुद्धि के त्रितंत्र सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence) का तुलनात्मक और गहन विश्लेषण करने पर, गार्डनर की 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalistic Intelligence) और स्टर्नबर्ग के त्रितंत्र सिद्धांत के 'घटकीय या विश्लेषणात्मक बुद्धि' (Componential / Analytical Intelligence) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सबसे अधिक वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक रूप से प्रामाणिक है? → शैक्षणिक आकलन (Assessment) और मूल्यांकन (Evaluation) के तात्विक और व्यावहारिक स्वरूप का गहन शिक्षण-शास्त्रीय विश्लेषण करने पर, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों अवधारणाओं के मध्य पाए जाने वाले पदानुक्रमित एवं परिणात्मक-गुणात्मक अंतर को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है? → गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रतिपादित 'सूझ या अंतर्दृष्टि के सिद्धांत' (Insight Learning Theory) के अंतर्गत, कोहलर के प्रयोगों में चिम्पैंजी 'सुल्तान' द्वारा अचानक समस्या का समाधान पा लेना तथा कर्ट कोफका और मैक्स वर्दिइमर द्वारा समर्थित 'गेस्टाल्ट' (समग्रता) के संप्रत्यय का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अधिगम प्रक्रिया के मूल दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक स्वरूप को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है?
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